इबोला के मारे सड़कों पर छोड़ कर भाग रहे हैं परिजनों को ..

Desk

लाइबेरिया में इबोला वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. बीमारों की स्थिति भयावह होती जा रही है.

पश्चिमी अफ्रीका में स्थित लाइबेरिया में खतरनाक रूप से बढ़ रहे इबोला वायरस के कहर से भयभीत हो कर लोगों ने अपने बीमार परिजनों और रिश्तेदारों को सडकों पर लावारिस हालत में छोड़ना शुरू कर दिया है. लोग घसीट घसीट कर अपने बीमार परिजनों को सिर्फ इसलिए सडकों पर ला कर बेसहारा हालत में छोड़ रहे हैं क्यों कि उन्हें डर है कि कहीं वे भी इस वायरस की चपेट में न आ जायें. cuerpos_ebola_ap-web

लाबेरिया के इन निवासियों की आँखों में न तो अपने परिजनों को सड़क पर यूं बेसहारा छोड़ने का दर्द है न ही कोई अफ़सोस. इबोला का खौफ ऐसा है कि लोग अपने लोगों की कीमत पर अपनी जान बचाना च रहे हैं.लिबेरिया के सूचना मंत्री लेविस ब्राउन ने पुष्टि की है कि इस वायरस से पीडित लोगों को उनके परिजन घरों से घसीटते हुए लाकर सड़कों पर फेंक रहे हैं. उनके अनुसार लोगों के मन में डर बैठ गया है कि इबोला के इलाज के लिए गए लोग वापस नहीं आते और ये लाइलाज बीमारी है. उन्होंने जनता से ऐसा न करने की अपील भी की और आश्वासन दिया कि लोग बीमारों को घरों में रखें. सरकार उन्हें घरों से ले कर जाने की व्यवस्था कर रही है. पश्चिमी अफ्रीका में अब तक लगभग 900 की जान जा चुकी है. 

लाइबेरियन सरकार ने इबोला की रोकथाम कारगर रूप से लागू किये जाने के लिए आपातकाल की घोषणा करते हुए स्कूल कॉलेज आदि बंद कर दिए हैं जिससे संक्रमण अधिक न फैले. इसके अलावा रोगियों और उनके परिजनों पर निगरानी भी रखी जा रही है जिससे किसी भी विषम परिस्थिति में उनकी सहायता की जा सके. सोमवार को लाइबेरिया की सरकार ने सरकारी रेडियो पर लोगों को चेताया कि इबोला से मरे लोगों की लाशों को दफनानाबेहद जरूरी है अन्यथा यह बीमारी पूरे स्वास्थ सिस्टम को तबाह कर देगी. सरकार ने लाशों को दफनाने के लिए सेना को बुलाया है.

इबोल वायरस एक ऎसा वायरस है, जिससे ईबोला वायरस बीमारी (ईवीडी) या ईबोला रक्तस्त्राव बुखार (ईएचएफ) होता है. सबसे पहले ये वायरस 1976 में सुडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाया गया था. इतने वर्षों में प्रति वर्ष संक्रमण दर लगभग 1000 व्यक्ति प्रति वर्ष की रही लेकिन इस वर्ष अचानक संक्रमण की दर में भरी बढ़ोतरी देखने को मिली है. प्रभावित क्षेत्रों में लाइबेरिया, सिएरा लियोन आदि प्रमुख हैं. इसके इलाज के लिए वैक्सीन खोजा जा रहा है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है.

इबोला प्रभावित इलाकों में कई भारतीय भी फंसे हैं. नाईजीरिया में चालीस हज़ार, लाइबेरिया में तीन से चार हज़ार और सिएरा लियोन में डेढ़ हज़ार से अधिक भारतीय हैं . केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो संभव है सारे भारतीय वापस भारत आएं. सरकार इस पूरे मामले पर नज़र बनाये हुए है. 

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