UPSC में CSAT को लेकर आज हो सकता है बड़ा फैसला..

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यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा में CSAT को लेकर आज कोई बड़ा फैसला हो सकता है. इस मसले को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने जो मियाद दी थी, वह रविवार को खत्म हो रही है.upsc_w_f

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यूपीएससी परीक्षा को लेकर छात्रों को भरोसा दिया है कि सरकार इस मामले पर रविवार को कोई फैसला ले लेगी. सिविल सर्विसेज परीक्षा से CSAT हटाने की मांग को लेकर सरकार को सौंपी गई अरविंद वर्मा कमेटी की रिपोर्ट पर रविवार को सरकार चर्चा करने वाली है. इस मामले में कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह वरिष्ठ मंत्रियों से चर्चा कर सकते हैं.

वर्मा कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्‍ट नहीं हैं पीएम!
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी CSAT पर वर्मा कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्‍ट नहीं है. मोदी इस मामले में सीनियर नौकरशाहों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं.

सिलेबस में बदलाव की सिफारिश नहीं
खबरों के मुताबिक, वर्मा कमेटी की रिपोर्ट में सिविल सर्विसेज के सिलेबस में बदलाव की सिफारिश नहीं की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो पैटर्न लागू किया गया था, वह सोच-समझकर किया गया था. बताया जा रहा है कि यूपीएससी के चेयरमैन डीपी अग्रवाल इस मसले पर अड़ियल रवैया अपना रहे हैं. वे सीसैट के मौजूदा प्रारूप में किसी भी तरह के बदलाव के खिलाफ हैं. मगर मोदी सरकार इस मसले पर छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए ही फैसला करने का मन बना चुकी है.

जारी है छात्रों का आंदोलन
CSAT हटाने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. शनिवार को छात्रों ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर के बाहर जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की. प्रदर्शनकारी छात्र मोदी सरकार से पूछ रहे हैं कि छात्रों के अच्छे दिन कब आएंगे? एनएसयूआई के छात्रों की मांग है कि यूपीएससी के सीसैट के खिलाफ आंदोलन कर रहे बेकसूर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया दमन तत्काल बंद होना चाहिए. छात्र गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मामले में दखल देने की मांग कर रहे हैं. गौरतलब है कि यूपीएससी विवाद को लेकर शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में खूब हंगामा मचा था.

आख‍िर क्या है CSAT विवाद
दरअसल, 2011 से यूपीएससी सीसैट यानी सिविल सर्विसेज एप्टीच्यूड टेस्ट लेता है. हिंदीभाषी छात्र इस टेस्ट को लेकर आरोप लगाते हैं कि पेपर का हिंदी अनुवाद ठीक से नहीं होता और उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस साल मार्च में यूपीए सरकार ने सीसैट को लेकर अरविंद वर्मा कमेटी बनाई, जिसने अब सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है. लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही यूपीएससी ने प्रिलिम्स परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए, जिससे बवाल बड़ा हो गया. मोदी सरकार ने छात्रों को भरोसा दिया है कि मसले का हल जल्द से जल्द निकाला जाएगा.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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