DU में दलित छात्रा को ज्योतिष पढ़ाने से टीचर ने किया इंकार, मामला पहुंचा आयोग के पास

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दिल्ली यूनिवर्सिटी की एमए (संस्कृत) की दलित छात्रा ने विभाग के शिक्षक पर ज्योतिष विषय पढ़ाने लिए कहने पर ‘ज्योतिष तुम्हारी जाति के लिए नहीं है’ कहने का आरोप लगाया है। दलित छात्रा ने इस बात की शिकायत ई-मेल के जरिए डीयू कुलपति से भी। मामले में कोई कार्रवाई होता नहीं देख छात्रा ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने छात्रा की शिकायत के संबंध में यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा है।

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग में एमए अंतिम के तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई 21 जुलाई से शुरू हो चुकी है। इसमें 9 ऑप्शनल विषयों में से एक विषय हर छात्र को पढ़ना होता है। छात्रा सरिता का कहना है कि उसने ऑप्शनल के रूप में ज्योतिष विषय का चयन किया था। विभाग ने 5 अगस्त तक सभी छात्रों से ऑप्शनल विषय के फॉर्म भरवाकर जानकारी मांगी। हालांकि, इससे पहले विभागीय प्राध्यापक यह कह चुके थे कि अकेली छात्रा होने के चलते ज्योतिष पढ़ाने वाले शिक्षक का इंतजाम होना मुमकिन नहीं है।

इसके ठीक उलट छात्रा का दावा है कि पिछने साल अकेले छात्र को ज्योतिष विषय ऑप्शनल के रूप में पढ़ाया गया था। वह छात्र जाति से ब्राह्मण था। इस बार भी ऑप्शनल के फॉर्म में पांच छात्रों ने ज्योतिष पढ़ने की इच्छा जाहिर की, लेकिन प्राध्यापकों के दबाव में यह संख्या 5 से 3 हो गई। छात्रा के मुताबिक, संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेष कुमार चतुर्वेदी से अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में कार्यालय से बाहर बरामदे में कहा कि ज्योतिष उसकी जाति के लोगों के लिए नहीं है।

उधर,  पीड़ित दलित छात्रा अपने साथ हुए भेदभाव की शिकायत 13 अगस्त को दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह को ई-मेल के माध्यम से की थी। 15 दिन बाद भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होता देख छात्रा ने राष्ट्रीय अनुसुचित दलित आयोग का दरवाजा खटखटाया है। छात्रा की शिकायत को संज्ञान लेते हुए आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा है।

छात्रा का कहना है कि उसका मकसद किसी के खिलाफ कार्रवाई करवाना नहीं, बल्कि ज्योतिष विषय की पढ़ाई शुरू करवाना है। छात्रा का कहना है कि उसे ज्योतिष पढ़ाने से इनकार करना सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक विवाद की सुनवाई करते हुए साल 2004 में अपने निर्णय में साफ तौर पर आदेश दिया था कि हर जाति के छात्र ज्योतिष पढ़ सकते हैं।

इस मामले में यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह भी अपना पलड़ा झाड़ते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि संस्कृत के विषय के कुछ छात्रों ने ज्योतिष पढ़ाने के लिए प्राध्यापक नियुक्त करने की मांग की थी। इस पर आश्वासन दिया था, लेकिन दलित छात्रा के भेदभाव के साथ ज्योतिष नहीं पढ़ाने की बात की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया। वहीं, यूनिवर्सिटी के रजिष्ट्रार ने राष्ट्रीय अनुसुचित दलित आयोग के स्पष्टीकरण मांगने की बात स्वीकारी है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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20 thoughts on “DU में दलित छात्रा को ज्योतिष पढ़ाने से टीचर ने किया इंकार, मामला पहुंचा आयोग के पास

  1. dekho bhai dekho abhi bhi itna samay hone ke bad bhi pandito ke ander ye bhawana hai ki dalit sanskrit nahi pad sakte hai . kyu nahi kya pandito ke ghar se ya unke bapo ke yahan se yan shiksha jati hai.

  2. dekho bhai dekho abhi bhi itna samay hone ke bad bhi pandito ke ander ye bhawana hai ki dalit sanskrit nahi pad sakte hai . kyu nahi kya pandito ke ghar se ya unke bapo ke yahan se yan shiksha jati hai.

  3. Bharatiya vishvidyalayon mein aaj bhi daliton ki itni aur isse bhi buri sthiti hai.Meri bhi ek thesis par ek Marathi brahman(Shirin Lakhe of Sitarurdi, Nagpur) ko RSU raipur ne Ph.D. ki upadhi di.Main ne tatkalik Brahman Rashtrapati Dr. Shankar Dayal Sharma ko kisi bhi Bharatiya vishvavidyalaya se Ph.D. karne ke liye challenge kiya, par mujhe koi jawab nahin diya gaya.Rashtrapati R. Venkatraman ne meri shikayat par karravai ki.RSU , Raipur ke brahmanvadi adhikariyon ne do-char bar aupcharik patra likh kar mamla khatma kar diya.Lakhe aaj yahan , Korba mein bahut bada librarian hai, jahan main uske rahte ja nahin sakta.

  4. इस खबरमे १० फीसदिभी सच्चाई है तो मुआमला बहुतही गंभीर है. हालहीमे प्रदर्शित हुए फिल्म आरक्षण में इस विषयको बहुतही बखुबिसे उजागर किया गया है. सरकार के साथही जनाताकोभी
    अपनी भूमिका तय करनी होगी.क्योंकि अब दलितोंके अन्यायकी अलगही व्याखा कार्यान्वित होते
    दिखाई दे रही है.इसपर अधिक चर्चा होना आवश्यक है.मीडिया दरबारको विशेष धन्यवाद…

  5. ऐसी गरीब और तुच्छ मानसिकता का इलाज शायद शख्त कार्यवाही से हो सकता है…

  6. जय हिंद
    पहले तो मुझे यह खबर पढ़ कर अत्यंत दुःख हो रहा है /
    इस शिक्षक को जिसको सरकार ने विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा देने को नियुक्त किया है और वही इस तरह की भावना रखता है / हिंदुस्तान की दशा सचमुच में कितनी भयानक है और इसका परिणाम क्या होगा इस बात का ध्यान उस शिक्षक को नहीं होगा / इसको तुरंत नौकरी से निकल दो यह नौकरी इस के पद के योग्य नहीं है ……………..जय भारत ………………..तुरंत इसको नौकरी से हटा दो ……..यह यहाँ पर कोई अहसान करने नहीं आया ………….नौकरी करने आया है और हिंदुस्तान का नौकर है / इसको जेल होने चाहिए

  7. जातिवाद इस देश की सबसे बड़ी समस्या है……………लेकिन ये बात पड़े – लिखे दलितों को समझ में तो आती नहीं है……..

  8. जय भीम
    दोस्त गबराने जररूत न ह
    आज हम बहुत मजबूत ह
    अगर बविस्य मे कबी ऐसी गटना हो तो
    आप हमें यद् करे
    हम आपके साथ ह
    और एस मनुवाद का हमें दत क्र मुकाबला करना होगा

    संदीप सिंगल
    कुरुक्षेत्र university कुरुक्षेत्र
    डॉ आंबेडकर स्टुडेंट कल्याण संघ

  9. जाति/ धर्म/ लिंग के आधार पर ज्ञान बांटने से इनकार करने वाला शिक्षक कहलाने का अधिकारी नहीं है !

  10. माननीय मिथलेश जी कया ऐसा हुआ है ?
    अगर ऐसा हुआ है तो आप को ऐसा नहीं करना चाहिए ??
    कोई भी छात्र ज्योतिषशास्त्र पढ़ सकता है….. इस मामले में संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेष कुमार चतुर्वेदी को स्पष्टिकरन तो देना चाहिए….
    यह सरासर गलत है , .इस तरह के मामलो में शिक्षा और शिक्षक दोनों की बदनामी होती है ! अखिल भारतीय छात्र कल्याण परिषद् इसका जोरदार विरोध करती है और प्रशाशन से अनुरोध करती है की मामले की जाँच करके उचित कार्यवाही कर हमें भी सूची करे ……
    धन्यवाद सहित

    नरेश कुमार शर्मा
    अखिल भारतीय छात्र कल्याण परिषद्

  11. कोई भी छात्र ज्योतिषशास्त्र पढ़ सकता है. आज तक ऐसा नहीं सुना की ज्योतिषशास्त्र सिर्फ ब्राह्मण छात्र ही पढ़ सकते हैं. इस मामले में संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ. मिथिलेष कुमार चतुर्वेदी को स्पष्टिकरन तो होना चाहिए .यह सरासर गलत है. ऐसा मेरे साथ भी मैट्रिक में हुआ था,हमारे संस्कृत टीचर ने मुझे मुसलमान जानकर संस्कृत पढ़ने से मना किया था ,हालांकि एक पीरियड के बाद ही वे मुझे संस्कृत पढ़ाने लगे.चूँकि मेरा विषय संस्कृत था.इया तरह के मामले पर जोरदार विरोध होना चाहिए .

  12. दिल्ली विश्वविद्यालय मे ज्योतिषशास्त्र क्यो पढ़ा रहे है? वो दलित अगर खुद होकर पढ़ना चाहता है तो वो मुर्ख है

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