रिचा शर्मा ने कनाडा में देश का मान बढ़ाया..

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हाल ही में कनाडा की राजधानी ओटावा में हुऐ दस दिवसीय ३४ वें जैज़ संगीत समारोह में भारत की प्रसिद्ध गायिका रिचा शर्मा ने उद्घाटन वाले दिन अपनी गायकी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया । ५० हज़ार दर्शकों के बीच जिसमें लगभग ४० हज़ार विदेशी थे ने जमकर उनकी गायकी पर नृत्य किया ।Richa Sharma

यह पहला अवसर था जब ३४ वर्षो में किसी भारतीय गायक को इस प्रतिष्ठित संगीत समारोह में गाने का निमंत्रण मिला हो । रिचा शर्मा कहती है मेरी जिम्मेदारी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी क्यों कि एक तरफ मुझे भारत की बहुमूल्य कला संस्कृति का ख़्याल रखना था बल्कि इतने महत्वपूर्ण समारोह में पहले ही दिन गाना था मेरा प्रदर्शन ही अगले ९ दिन इस समारोह की सफलता की नींव रखता ।

८ संRicha Sharma 3गीतकार बैंड के साथ जब मैंने संस्कृत में गुरु मन्त्र ,गणपति एवं मंगल मन्त्र से शुरुआत की तब माहौल देखने लायक था क्यों कि मैंने लाल रंग की ड्रेस पहनी थी और ऐसी ही तैयारी हमारे बैंड की थी मतलब पूरा माहौल भारतीय था ।

उसके बाद जब मैंने अपने गाने शुरू किये सजदा, बिल्लू रानी, माही वे, जिंदगी में कोई, मैं समझ गई, जोर का झटका, तौबा तौबा,जोगी-कोक स्टूडियो, नुसरत साहेब के तेरे बिन दिल नहीं लगता ढोलना, आज जाने की ज़िद न करो, छाप तिलक आदि गानों ने दर्शकों को सम्मोहित कर दिया. हजारों लोगों की प्रतिक्रिया देख कर मैंने स्टेज पर ही तय किया कि मैं भी इन्हे एक अलग गाना देती हूँ और मैंने टाइटैनिक फिल्म का गाना माय हार्ट विल गो ओन जिसे सुनकर तो दर्शक चक्कर में पड़ गए कि सूफ़ी, पंजाबी और ठेठ हिंदी गाने वाली ने कैसे यह अंग्रेजी गाना गा दिया ।

पहली बार इस समारोह में ऐसा हुआ कि निश्चित समय १. ४५ मिनट को २० मिनट बढ़ाया गया दर्शकों की मांग पर । ३४ सालों में यह भी पहली बार हुआ कि दर्शक नाचे इस समारोह में ऐसा आयोजकों ने हमें बाद में बताया ।

अन्य कौन से ऐसे संगीतकार-गायक थे इस समरोह में जिन्हे आप पहचानती हैं के जवाब में रिचा ने कहा बाप रे नाम लेने में ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं इस गायिका को १८ बार ग्रैमी अवॉर्ड मिले हैं संगीत की सर्वश्रेष्ठ रोलिंग स्टोन पत्रिका ने अभी तक के बेस्ट १०० गायकों में पहले नंबर पर रखा हैं उनका नाम है अरिथा फ्रेंकलिन, १० बार ग्रैमी जीत चुके बॉबी मक्फ्रिन, चार बार ग्रैमी विजेता डीआने रीव्स और इन जैसे ही एक से एक गायक, संगीतकार, बैंड सब मिलाकर ६०-७० आर्टिस्ट, ३ स्टेज बस पूछो न क्या धमाल था वहां ।

उनको ही क्यों बुलाया गया के जवाब में रिचा ने बताया कि आयोजको को एक लम्बी लिस्ट दे गई थी अपने देश के गायकों की। उनकी रिसर्च टीम ने २ महीने लगाये गायक निश्चित करने में जैसा इस समारोह के लिये चाहिए था हाँ मेरा अंतरष्ट्रीय मैनेजर आमिर सम्सी पिछ्ले ३ सालो से कोशिश कर रहा था कि कोई भारतीय गायक भी इस प्रतिष्ठित समारोह का हिस्सा बने लिहाज़ा उनका धन्यवाद ।

अब आपने इस समारोह का रास्ता खोल दिया है भारतीय गायकों के लिए किसका नाम देंगी अगले साल के लिये रिचा ने कहा सोनू निगम बेस्ट रहेंगे लेकिन सुनिधि चौहान भी कमाल हैं यदि उन्हें कमाल के पंजाबी गायक चाहियेंगे तो मैं आल टाइम ग्रेट गुरुदास मान जी का नाम देना चाहूंगी । लेकिन मेरी बड़ी इच्छा हैं की ऐसा कुछ हमारे यहाँ भी होना चाहिये ना हमारे यहाँ आयोजकों की कमी है ना दर्शकों की बस जरुरत थोड़ी कोशिश की हैं ।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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