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ISIS आतंकियों ने ज़ारी किया फ़तवा कि मोसुल की 11-46 साल की सभी लड़कियों-महिलाओं का हो खतना..

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जेनेवा, सुन्‍नी आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (इस्‍लामिक स्‍टेट ऑफ इराक एंड अल-शाम) ने इराक की महिलाओं के खिलाफ एक फतवा जारी किया है. फतवे में कहा गया है कि 11 साल से 46 साल तक की उम्र की सभी महिलाओं को खतना कराना होगा.9452_isis

आतंकवादी संगठन के इस आदेश से इराक की 40 लाख से ज्‍यादा महिलाएं प्रभावित हो सकती हैं. गौरतलब है कि आईएसआईएस इराक के कई इलाकों पर कब्‍जा जमा चुका है. अपने कब्‍जे वाले इलाकों को वह इस्‍लामिक राष्ट्र घोषित कर चुका है और यहां पर वह अपने नियम-कानून लागू कर रहा है.

आईएसआईएस का फतवा
संयुक्‍त राष्ट्र के एक अधिकारी ने बताया कि यह फतवा इराकी शहर और नाइनवेह प्रांत की राजधानी मोसुल के लिए जारी किया गया है. अधिकारी ने कहा, ‘इराक में खतने का चलन ना के बराबर है. सिर्फ कुछ हिस्‍सों में ही ऐसा किया जाता है.

हमें पता चला है कि आईएसआईएस ने इस बारे में फतवा जारी किया है. हमें पता नहीं है कि इससे कितनी लड़कियां और महिलाएं प्रभावित होंगी, लेकिन जनसंख्‍या संबंधी संयुक्‍त राष्ट्र के आंकड़ों को देखें तो करीब 40 लाख महिलाओं और लड़कियों पर इसका असर हो सकता है.’

इस्‍लाम का अपमान?
भारत के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आईएसआईएस के इस कदम को इस्‍लाम का अपमान बताया है. शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्‍बास ने कहा, ‘रमजान के पवित्र महीने के दौरान किसी भी मानव को चोट पहुंचाना गलत है. खतना संबंधी आईएसआईएस का यह फैसला इस्‍लाम का अपमान है.’ उधर, दारूल उलूम देवबंद के अशरफ उस्‍मानी ने कहा, ‘भारत में खतने का चलन पहले था. अब इस काम को अंजाम नहीं दिया जाता.’

(भास्कर)

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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