शशि थरूर ने AIIMS के डायरेक्टर को दो ईमेल किये थे..

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सुनंदा पुष्कर की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने एम्स के निदेशक को अपनी पत्नी सुनंदा पुष्कर की हेल्थ कंडीशन को लेकर दो ई-मेल भेजे थे।shashitharoor1_SUNANDA_20100413

सुनंदा की ऑटोप्सी करने वाले एम्स के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने थरूर की ओर से भेजे गई ई-मेल की कॉपी कैट में दाखिल हलफनामे के साथ नत्थी किए थे। गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उन पर सुनंदा पुष्कर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव बनाया गया था। इस तरह की अटकलें हैं कि एम्स प्रशासन डॉक्टर गुप्ता के खिलाफ कदाचार के मामले में कार्रवाई कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक एम्स प्रशासन सुनंदा पुष्कर की संदिग्ध मौत के मामले की जांच सीबीआई से कराने के पक्ष में है।

एक ई-मेल में थरूर ने लिखा था,मैं एम्स के डॉक्टर मिश्रा के ध्यान में एक जानकारी लाना चाहता हूं। यह जानकारी हम दोनों के कॉमन फ्रेंड अनिल चट्टा के जरिए मिली है। मुझे याद है कि आपने आशंका जाहिर की थी कि सही मात्रा में पानी और नमक नहीं लेने से उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक ढंग से गिर सकता है। हो सकता है कि उसके साथ यही हुआ हो, क्योंकि वह दो-तीन दिन से ढंग से नहीं खा पी रही थी।

यह भी हो सकता है कि अगर उसने एल्प्रेक्स खाल ली हो तो उससे उसकी हार्ट बीट और भी कम हो गई हो। इससे उसे मदद के लिए कोशिश करने में दिक्कत हुई होगी। अगर उसने तीन दिन तक खाना नहीं खाया और सिर्फ नारियल पानी पीया, तो इससे उसके शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ गई होगी, क्योंकि नारियल में पोटेशियम ज्यादा होता है। इससे उसकी दिल की धड़कनों की रफ्तार कमजोर पड़ गई होगी।

थरूर ने एम्स के निदेशक को जो ईमेल किए थे,वे उन्हें 26 जनवरी और 12 फरवरी को फैमिली फिजीशियन और दुबई में प्रैक्टिस करने वाले चाइल्ड स्पेशलिस्ट ने भेजे थे। दोनों ई-मेल में कहा गया था कि सुनंदा पुष्कर की मौत प्राकृतिक वजहों से हुई थी। ई-मेल में सुनंदा पुष्कर की मेडिकल हिस्ट्री की विस्तृत जानकारी दी गई थी।

दोनों ई-मेल में सुनंदा पुष्कर की मेडिकल कंडीशन को लेकर विवादित तथ्यों की स्पष्ट रूप से पुष्टि की गई थी। ई-मेल में कहा गया है कि सुनंदा पुष्कर त्वचा पर खरोचों को लेकर बहुत संवेदनशील थी। सुनंदा पुष्कर की जैसी हालत थी उसमें अल्प्रेक्स टैबलेट लेने से मौत हो सकती है। थरूर ने यह कहते हुए मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया कि जांच चल रही है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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