यूक्रेन में मलेशियाई विमान पर मिसाइल से हमला, 298 लोगों की मौत..

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यूक्रेन में सेना और रूस समर्थक अलगाववादियों के बीच जारी संघर्ष के बीच गुरुवार को मलेशिया के एक बोइंग यात्री विमान को एक मिसाइल हमले में मार गिराया गया. हमले में एम्सटर्डम से कुआलालंपुर जा रही फ्लाइट एमएच 17 में सवार सभी 298 लोगों की मौत हो गई. इसमें 283 यात्री और चालक दल के 15 सदस्य शामिल हैं. विमान के जलते टुकड़ों को रूसी सीमा से 50 किमी दूर पूर्वी यूक्रेन के विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में गिरता देखा गया.ukrain

यूक्रेन के आंतरिक मंत्री के सलाहकार एंटन गैरेशेंको ने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के हवाले से कहा है कि बक लांचर से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागकर विमान को निशाना बनाया गया. मलेशियाई एयरलाइन ने भी पुष्टि की है कि यूक्रेनी सीमा के निकट शाम 7.30 बजे उसका एमएच 17 से संपर्क टूट गया.

इंटरफैक्स की रिपोर्ट का कहना है कि रूसी वायुसीमा में प्रवेश करने से पहले बोइंग 777 विमान को निशाना बनाया गया और उसके जलते हुए टुकड़े दोनेत्स्क प्रांत के सीमावर्ती इलाकोंमें गिरे. यूक्रेनी सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि हमले के वक्त विमान करीब दस हजार मीटर (33 हजार फीट) की ऊंचाई पर था. पूर्वी यूक्रेन के विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाके में पहले भी ऐसे लॉन्चर देखे गए हैं.

यूक्रेन के अशांत इलाके दोनेत्स्क की प्रांतीय सरकार ने भी कहा है कि विमान ग्राबेवो गांव के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान के मलबे के साथ कुछ शव भी मिले हैं, माना जा रहा है कि ये विमान यात्रियों के शव हैं. यह इलाका अभी रूस समर्थक अलगाववादियों के नियंत्रण में है. इस इलाके में यूक्रेनी सेना और रूस समर्थक अलगाववादियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है.

यूक्रेन सरकार ने कहा, उसने नहीं किया हमला

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने कहा है कि उनकी सेना ने हवा में किसी लक्ष्य को नहीं भेदा है. लेकिन हमले की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा. जबकि पूर्वी यूक्रेन के रूस समर्थक अलगाववादी नेता एलेक्जेंडर बोडरेई ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन सरकार ने विमान पर मिसाइल से हमला किया है. दोनेत्स्क पीपुल्स रिपब्लिकन के पीएम बोडरेई का कहना है कि हमारे पास ऐसे हथियार नहीं हैं. यूक्रेन सरकार का कहना है कि रूस निर्मित बक लांचर से दागी गई 22 हजार मीटर (72 हजार फीट) के लक्ष्य तक निशाना बनाया जा सकता है. मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने भी घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं.

छह माह में मलेशियाई विमान के साथ दूसरी घटना

मलेशिया के यात्री विमान के साथ छह माह में यह दूसरा बड़ी घटना है. इससे पहले मार्च में कुआलालंपुर से बीजिंग जा रही मलेशियाई एयरलाइन का बोइंग विमान एमएच 370 समुद्र में किसी अज्ञात स्थान पर गिर गया था. विमान में सवार सभी 239 यात्री दुर्घटना के कारणों और विमान का मलबा आज तक खोजा नहीं जा सका. कहा जाता है कि दक्षिण हिंद महासागर के निकट समुद्र में कहीं उसका मलबा गिरा लेकिन लंबे खोजबीन अभियान के बाद आज तक विमान का सुराग नहीं मिल सका है.

पुतिन ने की ओबामा से बात

इस सनसनीखेज हमले के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से फोन पर बात की है. ओबामा ने वरिष्ठ अधिकारियों से यूक्रेनी सरकार के संपर्क मे रहने को कहा है. वहीं अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन ने कहा है कि यूक्रेन सरकार के पास ऐसे हथियार नहीं हैं. अलगाववादियों के पास ऐसे हथियार होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें तो रूस सरकार का समर्थन हासिल है, ऐसे में कुछ नहीं कहा जा सकता. फ्रांस सरकार ने अपनी एयरलाइनों से यूक्रेनी वायुसीमा में प्रवेश करने से परहेज करने को कहा है.

पांच महीने से जंग का अखाड़ा बना हुआ है दोनेत्स्क

यूक्रेन के जिस इलाके में मलेशियाई विमान को गुरुवार को मार गिराया गया है, वह पिछले करीब पांच महीने से रूस समर्थकों और शेष यूरोप समर्थक यूक्रेन के बीच जंग का अखाड़ा बना हुआ है. दोनेत्स्क को अभी भी रूस समर्थक विद्रोहियों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए यूक्रेन की सेना कार्रवाई कर रही है. हाल के दिनों में इस इलाके में विद्रोहियों और यूक्रेन की सेना के बीच जमकर लड़ाई हुई है. बुधवार को ही यूक्रेन ने रूसी वायुसेना पर अपना एक लड़ाकू विमान एसयू-25 को मार गिराने का दावा किया था. उसने रूस पर अपनी सीमा में मिसाइल दागने का भी आरोप लगाया था. हालांकि, विद्रोहियों का दावा था कि उन्होंने इस विमान को गिराया है. इससे पहले भी विद्रोहियों ने एन-26 विमान को मार गिराया था.

यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोसेंको ने बकायदा विदेश मंत्रालय को इसके खिलाफ आधिकारिक रूप से प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया था. उनका कहना था कि रूसी गांव गुकोव से लुहांस्क स्थित यूक्रेनी सैन्य ठिकानों पर ग्राड रॉकेट दागे जा रहे हैं. इस तनाव की वजह से एक बार फिर शीत युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है. 25 मार्च को विद्रोही प्रांत क्रीमिया को रूस ने अपने में मिला लिया था. इसके खिलाफ पश्चिमी देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी और अमेरिका ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. इस तीखी प्रक्रिया देते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि इससे उसके अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में खटास आएगी.

उल्लेखनीय है कि दोनेत्स्क ने 7 अप्रैल ने यूक्रेन से अलग होने का एलान कर दिया था. 11 मई को बकायदा इसके लेकर एक जनमत संग्रह कराया गया और 12 मई को कथित जनमत में इसके पक्ष में नतीजे आए. 24 मई को दोनेत्स्क ने पड़ोसी विद्रोही प्रांत लुहांस्क के साथ मिलकर संघ बनाने के समझौते पर दस्तखत किए.

रूस-यूक्रेन का झगड़ा का क्या है

पिछले कुछ समय से रूस और यूक्रेन में झगड़ा चल रहा है. सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन अलग देश बना था. पिछले कुछ समय से रूस से सटे यूक्रेन के इलाके एक बार फिर रूस के साथ मिलना चाहते हैं जिसका यूक्रेन विरोध कर रहा है. यूक्रेन का आरोप है कि रूस की ओर से विद्रोहियों को मदद की जा रही है. इसी बात को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी चल रही है.

खबर सुनते ही वॉल स्ट्रीट ने लगाया गोता

मलेशियाई विमान को यूक्रेन में मार गिराए जाने की खबर से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट का दौर शुरू हो गया. इस खबर के बाद एयरलाइन कंपनियों के शेयर गोता लगाने लगे. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के एकरा एयरलाइन इंडेक्स में करीब 1.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की. अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी गिरावट आई. यूनाइटेड हेल्थ के शेयर की कीमत करीब 4.84 फीसदी तक गिर गई. डॉउ जोंस में कुल 51.27 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक यूक्रेन-रूस तनाव और माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 18 हजार नौकरियों की कटौती से बाजार में पहले ही निराशा का माहौल था. लेकिन इस खबर से निवेशकों के भरोसे को और डिगा दिया.

मोदी ने त्रासदी पर दुख जताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशियन एयरलाइन के विमान से जुड़ी घटना में लोगों की मौत को लेकर संवेदना प्रकट करते हुए कहा है कि भारत दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है.

मोदी ने आज ट्वीट किया, हमारे विचार और प्रार्थना उन लोगों के परिवारों के साथ हैं जिन्होंने एमएच 17 विमान में अपनी जान गवां दी.

मलेशियन एयरलाइन के विमान को गुरुवार को रूसी सीमा के निकट पूर्वी यूक्रेन में आतंकवादियों ने मार गिराया जिससे विमान में सवार सभी 298 लोग मारे गए.

सोशल मीडिया पर बढ़ी सक्रियता

विमान के मार गिराए जाने की खबर आते ही सोशल मीडिया पर भी समाचार एजेंसी और यूजर्स सक्रिय हो गएं. कुछ लोगों की संवेदना प्रकट की तो कुछ लोगों ने लगातार होती असुरक्षित हवाई यात्रा और विश्व में व्याप्त असुरक्षा के माहौल पर चिंता जताई. वहीं, कई यूजर्स ने यूक्रेन के विद्रोहियों के प्रति नाराजगी का भी इजहार किया है.
ट्विटर पर संवेदना के अंबार

मलेशियाई विमान हादसे से हैरत में हूं और बेहद दुखी भी. अफसरों के साथ स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक जारी है.
डेविड कैमरन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री

मलेशियाई विमान हादसा हैरत करने वाला है. मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जाहिर करता हूं.
अखिलेश यादव, सीएम, उत्तर प्रदेश

यह पूरी तरह से पागलपन है. इसमें निर्दोष लोगों की जान गई है. मेरी संवेदना पीड़ित परिवारों के साथ है.
कुणाल कपूर, अभिनेता

अगर वास्तव में मलेशियाई विमान को विद्रोहियों ने मार गिराया है, तो इस तरह की हवाई यात्रा कभी नहीं हो सकती है. पूरी दुनिया में सशस्त्र संघर्ष जारी है.
शेखर कपूर, फिल्म निर्देशक

पूरी तरह से नया खेल शुरू हो चुका है. यह खेल प्रतिशोध का है. अगर एक पक्ष ने विमान को मार कर गिराया है, तो निश्चित रूप से दूसरा पक्ष भी उसके लिए जिम्मेदार है. प्रीतिश नंदी, फिल्मकार

पहले ही दी गई थी चेतावनी

अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (एफएएए) ने 23 अप्रैल को ही पायलटों को यूक्रेन के अशांत इलाके के ऊपर से उड़ान न भरने की चेतावनी जारी कर दी थी. एफएफए ने पायलटों और विमानन कंपनियों को दिए निर्देश में कहा था कि वह अमेरिकी सरकार की इजाजत के बिना क्रीमिया के शहर सिम्फरपोल के ऊपर से उड़ान न भरे. इसके साथ ही यूक्रेन कीव, लावोव, देनेप्रोपेत्रोवस्क और ओडेस्सा सहित अशांत दोनेत्स्क और लुहांस्क पर उड़ान भरने से परहेज करें. यह चेतावनी अगले वर्ष 23 अप्रैल तक प्रभावी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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