ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के चैयरमैन आनंद सिंघल पर यौन प्रताड़ना का मामला दर्ज़..

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जयपुर. सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ग्लोबल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के चैयरमैन  आनंद सिंघल के खिलाफ संस्थान में कार्यरत महिलाकर्मी के साथ यौन प्रताडऩा का शर्मनाक मामला सामने आया है. आरोपी ने पीडि़ता को शारीरिक संबंध बनाने के लिए 3 करोड़ रुपए, अपार्टमेंट में एक मंजिल और सवाई माधोपुर में स्थित अपनी एक निजी यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर पद देने का ऑफर किया. Anand Singhal, Chairman, GTC

संस्थान चैयरमेन की इन शर्मनाक कारगुजारियों से त्रस्त होकर पीडि़ता पुलिस कमिश्नर के पास पहुंची और आपबीती सुनाई. पुलिस आयुक्त के निर्देश पर कमिश्नरेट से आई लिखित रिपोर्ट पर सांगानेर सदर थाना पुलिस ने भादंसं की धारा 354 ए (1) और 354 डी (1) के तहत मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार अजमेर रोड निवासी पीडि़ता पिछले चार साल से जीआईटी कॉलेज में काम रही है. 30 वर्षीय महिलाकर्मी पर काफी समय से कॉलेज चैयरमेन की गंदी निगाहें थीं. आरोप है कि चैयरमेन आनंद सिंघल पीडि़ता पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए लगातार दबाव डाल रहा था और उसने कहा कि ‘तुम तुम्हारे दिल का दरवाजा मेरे लिए खोल दो, मैं तुम्हारे को तीन करोड़ रुपए, आनंद प्लाजा में एक फ्लोर रहने के लिए दे दूंगा. साथ ही, सवाई माधोपुर में अपनी निजी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर भी बना दूंगा.

पुलिस कमिश्नरेट से आई रिपोर्ट की जांच कर रहे थाना प्रभारी मनोज गुप्ता ने बताया कि कल यह मुकदमा दर्ज किया गया है. आज पीडि़ता के बयान दर्ज किए जाएंगे और कॉलेज जाकर मौके से तथ्यात्मक जानकारी जुटाई जा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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