गंगाजल की सौगंध के साथ छुड़ाया जा रहा हैं अमल-डोडा..

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बायतू विधायक की अभिनव पहल की चौतरफा वाह-वाही.. शिविरों में 2250 अमलदार हुए नशा मुक्त..

-दलपत धतरवाल||
बायतू. सौगंध लेना किसी को दिलाने की परम्परा तो प्राचीन समय से ही चली आ रही हैं उस समय की सौगंध रिश्ते नाते, क्लेश और पंचायतों द्वारा दिलाई जाती थी लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ बदलाव होने लगे तो सौगंध के स्वरुप भी बदले और दायरा भी. लेकिन उसी प्राचीन परम्परा के आधार पर सौगंध की चर्चा इन दिनों बाड़मेर जिले में हो रही हैं. ये सौगंध कोई रिश्ते नाते या भाई-भाई के झगड़ों को लेकर नही दिलाई जा रही हैं, बल्कि ये सौगंध अमलदारों को नशा छुड़वाने के लिये दिलाई जा रही हैं जिसमें बायतू विधायक कैलाश चौधरी अमलदारों को हाथ में गंगाजल डाल कर गंगाजल की सौंगध दिला कर नशा मुक्ति का संकल्प दिला रहे हैं वे कभी जिन्दगी में नशे के नजदीक भी नही जाएंगे.IMG-20140609-WA0009

गौरतलब है कि सीमावर्ती जिले बाड़मेर-जैसलमेर में विधानसभा चुनावों के बाद डोडा पोस्त की अचानक कमी आने के बाद नशेडिय़ों के हाथ पांव फूल गये तथा डोडा पोस्त का मुद्दा लोकसभा चुनावों में प्रमुख चुनावी मुद्दों में शुमार था तथा डोडा पोस्त आपूर्ति की घोषणाएं खुले मंचों पर हुई, लेकिन लोक सभा चुनावों के बाद हालात और ज्याद बिगड़ गये नशेड़ी डोडा पोस्त के लिए सडक़ों पर उतर आए तथाा आन्दोलित हो गये. इन सबको देखते हुए बायतू विधायक कैलाश चौधरी ने युक्ति सोची तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बायतू क्षेत्र में जगह-जगह नशा मुक्ति शिविर लगवा कर डोडा पोस्त के नशेडिय़ों को अफीम-डोडा पोस्त छुड़वाने के साझा प्रयास शुरु कर दिये तथा उनके संकेत भी काफी अच्छे निकल कर आ रहे हैं.

शिविरों की ली हर वक्त जानकारी
बायतू विधायक कैलाश चौधरी के प्रयासों से जिले में नशा मुक्ति का अभियान चलाया जा रहा हैं जिसके तहत बायतू क्षेत्र के गिड़ा, बायतू, बाटाडू में विशेष नशामुक्ति शिविरों का आयोजन कर अमलदारों को अमल-डोडा के नशे से मुक्ति दिलाई. डोडों की किल्लत के चलते नशेडिय़ों ने भी इसे त्यागने में भलाई समझी और विधायक चौधरी के कहने पर इनसे सदा के लिये दूर रहने का संकल्प लेते हुए नशा मुक्ति शिविर में भर्ती हो गये. वहीं लगाये गये नशा मुक्ति शिविरों की पल-पल की जानकारी लेते रहे कि किसी को भी किसी प्रकार की परेशानी नही रहे.

चिकित्सा विभाग भी रहा मुस्तैद
बायतू में नशा मुक्ति को लेकर लगाये गये शिविरों में चिकित्सा विभाग भी पूरी तरह से मुस्तैद रहा जिसका नतीजा यह रहा कि नशा मुक्ति शिविरों से किसी प्रकार की बुरी खबर निकल कर नही आई. अब यह पहल लगातार जारी रही तो आने वाले कुछ ही समय में बाड़मेर जिला प्रदेश का ऐसा जिला बन सकता हैं जहां सर्वाधिक डोडा पोस्त वितरण हो रहा हैं वहीं की स्थिति शून्य तक पहुंच जाए तो कोई अतिश्योक्ति नही.

बाबा! गंगाजल की सौगंध जो अमल-डोडा लिया तो
बायतू विधायक अपने देशी स्टाईल को लेकर हमेशा युवाओं के दिलों की धडक़न रहे तो अब उनके प्रशंसकों मे बुजुर्ग भी जुड़े हुए हैं. नशा मुक्ति शिविरों के बाद तो युवाओं से ज्यादा बुजुर्गो के दिल की धडक़न बन चुके हैं. विधायक अपने देसी स्टाईल में नशा मुक्ति शिविरों में समापन के दिन नशेडिय़ों को गंगाजल की सौगंध दिला कर कह रहे थे ‘‘बाबा थोने इण गंगाजल री सौंगन हैं जो थे पासा अमल-डोडों ने नेड़ा ग्या तो ’’ विधायक ने गंगाजल की सौगंध के साथ लोगों को संकल्प दिलाया कि वे कभी भी नशे के पास नही जाएंगे.

हर जगह एक ही अपील
विधायक कैलाश चौधरी ने नशेडिय़ों से अपील करते हुए कहते हैं कि नशा एक सामाजिक अभिशाप है. इसकी गिरफ्त में आया व्यक्ति अपने परिवार का ही शत्रु है और उसके कहर से उसका बच्चा भी नहीं बच पाता है. नशे से घरबार का सत्यानाश हो जाता है. वह नशे के कारण समाज में अपनी पहचान खो देता है और चरित्रहिन हो जाता है. इसलिए शिविरों से विदा हो रहे व्यक्ति यह प्रण लें कि वह प्रेरक बनकर समाज में व्याप्त नशे जैसी कुरूती को छुड़ाने में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाएगे. उन्होंने अपील की कि नशा मनुष्य को मानसिक,नैतिक,आर्थिक रूप से बर्बाद कर देता हैं. उन्होंने नशे की पवृति को त्यागने का आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति नशा नहीं करे ताकि अपना समाज नशामुक्त हो सके. जिन लोंगों ने नशा छोड़ा है वह यहाँ से संकल्प लेकर जाये कि मैं आगे जाकर समाज के लोगों को नशा मुक्त करूँगा.

बायतु ही नहीं बाड़मेर को करेंगे नशामुक्त
बायतू विधायक कैलाश चौधरी का संकल्प हैं कि वो बायतू ही नही पूरे जिले को नशामुक्त करेंगे. उन्हाने ने कहा कि बायतु विधानसभा क्षेत्र के गाँवों में काफी लोग बंधाणी थे. जो पूरे परिवार सहित डोडा पोस्त की दूकान पर कई घंटो तक लाइन में खड़े रहते थे. परन्तु आखिर में उन्हें डोडे नहीं मिलते थे. हमने लोगों से नशा छोडऩे का आग्रह किया तो उन्होंने सहमती दे दी और हमने नशामुक्ति शिविर शुरू कर दिये. जिसके संचालन में हमें लोगों का अच्छा सहयोग मिला. इन शिविरों में करीब 2250 लोग नशा छोड़ चुके हैं. लोगों ने गंगाजल हाथ में लेकर नशा न करने की कसम खायी हैं और हमें विश्वास हो गया है कि वह अब नशामुक्त हो जायेगें. ये नशामुक्ति के प्रयास आगे भी जारी रहेगें.आने वाले एक साल के अन्दर हम बायतु ही नहीं बल्कि बाड़मेर को नशामुक्त कर देगें.

लोग ले रहे है प्रेरणा
बायतु के युवा विधायक कैलाश चौधरी के इस नशामुक्ति के प्रयास से लोग काफी प्रभावित होते नजर आ रहे हैं. आसपास के क्षेत्रों के लोग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं. बायतु के अलावा पचपदरा,गुड़ामलानी,शिव विधानसभा के लोग भी इनकी प्रेरणा लेकर नशामुक्ति की पहल कर रहे है. अनूठी पहल. बाटाडू स्थित वीर तेजाजी छात्रावास में पिछले दिनों समाज के लोगों द्वारा निर्णय लिया गया था कि किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में डोडा और अफीम का सेवन नहीं किया जाएगा. बाटाडू सहित आसपास के गाँवो के मौजिज लोगों के द्वारा नशामुक्ति का संकल्प लिया गया था. वह अब सार्थक साबित हो रही है. लोग सामाजिक कार्यक्रम में डोडा व अफीम की जगह काजू और बादाम की मनुहार कर रहे है. इस नशामुक्ति की पहल से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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