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राजस्थान के समाचार पत्र मालिकों में खलबली..

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जयपुर राजस्थान से प्रकाशित होने वाले सभी समाचार पत्रों को श्रम विभाग ने नोटिस जारी कर मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने पर स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है.justice-majithia-left-chairman-of-the-wage-boards-for-working-journalists-and-non-journalists-and-other-newspaper-employees-submitting-the-recommendations-to-labour-secretary-p-k-ch1

रिपोर्ट मांगने के का कारण श्रम विभाग में लगी एक आरटीआई है जो इंडियन फेडरेशन फॉर वर्किंग जर्नलिस्ट की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष जगदीश जैमन ने लगा रखी है जिसके तहत राज्य के सभी समाचार पत्रों को श्रम विभाग ने नोटिस जारी किया है.

salary slabदूसरी तरफ नोटिस जारी होने से मीडियाकर्मियों में ख़ुशी की लहर व्याप्त है कि उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलने की सम्भावना बढ़ गयी है.

ज्ञात रहे सर्वोच्च न्यालालय की पूर्ण पीठ ने गत वर्ष नवम्बर में निर्णय दिया था कि सभी समाचार पत्र और न्यूज़ एजेंसियां मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करें.

गौरतलब है कि मजीठिया बोर्ड की सिफारिशें सिर्फ समाचार पत्र यानि प्रिंट मीडिया पर लागू होती हैं. इसमें समाचार पत्रों को श्रेणीबद्ध किये जाने, उनके काम काज के तरीकों, कार्य अवधि निर्धारण और मेहनताने के संबंध में राय दी गयी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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