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स्वास्थ्य मंत्री और घरेलू उपाय..

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ० हर्षवर्धन ने एक भाषण में कहा कि सरकार को एड्स और एच आई वी आदि यौन संक्रमित रोगों की रोकथाम के लिए पति पत्नी के बीच के रिश्ते की नैतिकता और ईमानदारी को बढ़ावा देना चाहिए न कि कंडोम और अन्य कृत्रिम साधनों के उपयोग को. न्यू यॉर्क टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में डॉ० हर्षवर्धन ने कहा-“कंडोम के प्रचार प्रसार से जनता में गलत सन्देश प्रचरित हो रहा है. एड्स कैम्पेन की धार केवल कंडोम के इस्तेमाल तक सीमित नहीं होनी चाहिए.”Harsh Vardhan

फेसबुक पर इस बयान के अर्थों पर चर्चा..
फेसबुक पर इस बयान के अर्थों पर चर्चा..

नेशनल एड्स कण्ट्रोल आर्गेनाइजेशन ने पारंपरिक रूप से देश में एड्स की रोकथाम के लिए कंडोम के इस्तेमाल पर जोर दिया है , खास तौर से उन चिन्हित इलाकों में जहां एड्स फैलने का खतरा अधिक है. डब्ल्यू एच ओ और यू एन एड्स के अनुसार पुरुष कंडोम ऐडा और एच आई वी की रोकथाम में सबसे कारगर हथियार हैं. गौरतलब है की डॉ० हर्षवर्धन भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और खुद पेशेवर चिकित्सक हैं.

डॉ० हर्षवर्धन के इस बयान के बाद से आलोचनाओं का बाज़ार गर्म हो गया है. सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली लेकिन विरोध सबमें समान था. सभी जगह एक सिरे भर्त्सना की गयी है और कहा गया है कि डॉ० हर्षवर्धन संघ की विचारधारा को देश पर थोपना चाहते हैं. एक सोशल नेटवर्किंग साईट पर पोस्ट में संस्कृति की तुलना गर्भनिरोधक से करते हुए इसे बाज़ार का नया अविष्कार बताया गया है. इसी तरह एक पोस्ट में हर्षवर्धन को डॉक्टर नहीं वैद्य कहने की सलाह दी गयी है. इसे संघ की पश्चिम विरोधी विचारधारा, मोदी के अच्छे दिन आदि आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

नाको के प्रमुख वी के सुब्बराज ने बताया कि इस के बाद भी दूर दराज के इलाकों और एच आई वी बहुल क्षेत्रों में नाको की नीतियां नहीं बदलेंगी. ये संभव है कि आम जनता के लिए किये जा रहे प्रचार के विषय में परिवर्तन किये जायें.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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