Home देश उत्तराखंड त्रासदी के एक साल बाद भी पुनर्वास अधूरा..

उत्तराखंड त्रासदी के एक साल बाद भी पुनर्वास अधूरा..

आपदा के एक वर्ष पूर्ण होने के बावजूद अभी तक पीडिंतों का विस्थापन व पुर्नवास न किये जाने पर आपदा प्रभावितों ने आज यहां धरना देकर सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया. पीड़ितों ने चेतावनी दी है की यदि शीध्र ही उनका विस्थापन व पुर्नवास न किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगें.uttarakhand

आपदा के एक वर्ष पूरे होने पर केदारघाटी विस्थापन व पुर्नवास संर्धष समिति के तत्वाधान में आपदा प्रभावित स्थानीय रामलीला मैदान में एकत्र हुए और वहां धरने पर बैठे. इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पूर्व दायित्वधारी अजेन्द्र अजय ने कहा कि आपदा को आज एक वर्ष का समय हो चुका है. मगर सरकार पीड़ितों का विस्थापन व पुर्नवास नहीं कर पायी है. उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने पीड़ितों को तीन किश्तों में पांच लाख रूपये का प्राविधान किया है. पीड़ितों को पहली किश्त तब वितरित की जा रही है जब वे भवन निर्माण के लिए भूमि के दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे. मगर अधिकांश पीड़ितों के पास भूमि भी नहीं रह गयी है. ऐसे में पीड़ितों के सामने यह समस्या पैदा हो गयी है कि वह भूमि की व्यवस्था कैसे करे उन्होने पांच लाख रूपये की धनराशि एकमुश्त पीड़ितों को दिये जाने की मांग की. इसके अलावा यह धनराशि बढाये जाने अथवा भूमि उपलब्ध कराये जाने की मांग भी की.

उन्होने कहा कि पूर्व में सरकार द्वारा बेघर लोंगों को एक हजार वर्ग  फीट भूमि उपलब्ध करने और इंिन्दरा आवास योजना के तहत् 75 हजार रूपये देने की घोषणा भी की गयी मगर उस पर कोई अमल नहीं किया गया. इस मौके पर वक्ताओं ने पीड़ित परिवारों के लिए प्रतिमाह तीन हजार रूपये किराया राशि बतौर दिये जाने सम्बन्धी शासनादेश के ठीक से क्रियान्वयन न होने पर रोष जताया और कहा कि कई पीड़ितों को किराया राशि नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है. जनपद में निर्माणाधीन सिंगोली- भटवाड़ी जल विघुत परियोजना की निर्माणदायी कंपनी एल0 एन0 टी0 द्वारा पीड़ितों को अभी तक मुआवजा न दिये जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा पीड़ितो के लिए स्वीकृत मुआवजा राशि से प्रदेश सरकार सड़क, पुल इत्यादि का निर्माण करवा रही है. साथ ही चेतावनी दी गयी की यदि कंपनी द्वारा जल्द ही पीड़ितों को मुआवजा राशि नहीं वितरित की गयी तो आन्दोलन छेड़ा जायेगा.

इस मौके पर पीड़ितों ने गत वर्ष केदारनाथ त्रासदी में मृत आत्माओं की शान्ति के लिए दो मिनट का मौन रखा. इस दौरान पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चमोला, हिमालय बचाओ आन्दोलन की सुशीला भण्डारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य गंगा  देवी आर्य, चन्दापुरी के पूर्व प्रधान विश्वनाथ आशीष नेगी, दस्तक संस्था के दीपक बेंजवाल, अनूप सेमवाल, सामाजिक कार्यकर्ता शम्भू प्रसाद भटट, मनोज नेगी, राजेन्द्र सिंह नेगी, जगदीश चमोला, मदन लाल, हिमांशु भटट, देवेन्द्र जगवाण, बीरेन्द्र रावत, कुवर गोस्वामी, राजेन्द्र कुमार, राजू राणा, शम्भू प्रसाद आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे.

Facebook Comments
(Visited 9 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.