Home गौरतलब वोडाफोन के राजफाश और नीयत पर उठने लगे हैं सवाल..

वोडाफोन के राजफाश और नीयत पर उठने लगे हैं सवाल..

वोडाफोन के नेटवर्क के अन्दर उपभोक्ताओं की कॉल, एसएमएस और ईमेल पर सरकारी निगरानी का राजफ़ाश होने के बाद से कई बातें सामने आई हैं. कहा जा रहा है कि सरकार और वोडाफोन के बीच रिश्ते अब पहले जैसे अच्छे नहीं रहे, जिनकी वजह से कंपनी को ये राज़ खोलने पड़े हैं.vodafon_311213

गौरतलब है कि वोडाफोन इंडिया का भारत में सात सर्किलों में लाइसेंस इस साल के अंत में ख़त्म हो रहा है जिसे डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (डीओटी) ने रिन्यू करने से मना कर दिया है. कंपनी ने दिसंबर में ख़त्म हो रहे लाइसेंस को आगे बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल की थी जिसे डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (डीओटी) ने ख़ारिज कर दिया. डीओटी ने कंपनी से परमिट को यूनिफाइड लाइसेंस में बदलने को और साल के अंत में होने वाली नीलामी में स्पेक्ट्रम खरीदने को कहा है. उपभोक्ताओं की संख्या के लिहाज से कंपनी भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. कंपनी ने मई माह में केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश ईस्ट, महाराष्ट्र और गुजरात में अपने लाइसेंस को आगे बढ़ाने के लिए 1995 के नियम के तहत आवेदन किया था. उस समय के रूल्स में ऑपरेटर्स को अपने परमिट के शुरुआती 20 वर्ष पूरे होने पर अवधि 10 वर्ष के लिए बढ़वाने की छूट थी.

amita narayan about vodafoneगत 4 जून को डीओटी ने वोडाफोन के आवेदन को ख़ारिज करने के तुरंत बाद वोडाफोन की तरफ से नैतिकता और उपभोक्ताओं के साथ खड़े होते हुए कंपनी ने सरकार के साथ गठजोड़ और अनैतिक निगरानी की बात सामने रखी. जिसका विरोध इस समय पूरे विश्व में हो रहा है. साथ ही अपुष्ट खबरों के अनुसार वोडाफोन और सरकार के बीच रार की एक वजह टैक्स को लेकर पेचीदगियां भी हैं. कंपनी टैक्स में कुछ छूट चाहती हैं और सरकार इस समय किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं दिख रही. ऐसे में कंपनी ने सरकार के ऊपर दबाव बनाने के लिए खुलासों का सहारा लिया है जिससे अपनी साख बचाने में सफल हो सके. वोडाफोन की एक वरिष्ठ अधिकारी अमिता नारायण ने फेसबुक पर एक टिप्पणी करते हुए कंपनी का बचाव करते हुए यहाँ तक कहा कि “कानून रूप से ये गलत नहीं, बल्कि सही ही है. सभी कंपनियों ने गृह मंत्रालय के आदेश पर सरकार को निगरानी करने की छूट दे रखी हैं.”

Facebook Comments
(Visited 4 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.