वन सत्याग्रहियों को किया सम्मानित, पर्यावरण दिवस पर लिया महान जंगल को बचाने का संकल्प..

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सिंगरौली, 5 जून 2014. महान जंगल क्षेत्र के ग्रामीण एक बार फिर पुलिस-प्रशासन और कंपनी के साझेदारी के खिलाफ खड़े हुए. वन सत्याग्रही बेचनलाल साह के जेल से बाहर आने के बाद आज अमिलिया में उनके स्वागत में एक सभा का आयोजन किया गया. इस सभा में पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रामीणों ने महान जंगल को बचाने का संकल्प भी लिया.Greenpeace01

शाह को तीन और वन सत्याग्रहियों के साथ 8 मई को महान जंगल को बचाने के प्रयास में गिरफ्तार किया गया था. इनमें से तीन सत्याग्रही 40 घंटे बाद ही रिहा हो गए लेकिन शाह को जमानत देने से इंकार कर दिया गया था. इस गिरफ्तारी के खिलाफ महान क्षेत्र के ग्रामीणों ने सिंगरौली क्षेत्र के दूसरे सामाजिक संगठनों के साथ 19 मई को जिला कलेक्टर के सामने शांतिपूर्ण धरना भी दिया था.

इससे पहले कल देर शाम बेचनलाल की रिहाई पचौर जेल से हुई, जहां सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उन्हें लेने पहुंचे थे. आज स्वागत सभा में करीब 400 की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. इस सभा को संबोधित करते हुए बेचनलाल साह ने कहा कि, “भले जेल में डालकर कंपनी और प्रशासन के लोग हमें डराने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन हम जंगल बचाने की अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे. हमारी महान जंगल को बचाने की लड़ाई शांतिपूर्वक ढ़ंग से चलती रहेगी”.

Greenpeace02इस अवसर पर चार वन सत्याग्रहियों अक्षय गुप्ता, विजयशंकर सिंह, बेचनलाल साह और विनित गुप्ता को ग्रामीणों ने सम्मानित किया. महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता विजय शंकर सिंह भी उन चार वन सत्याग्रहियों में शामिल थे जिन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया था . उन्होंने कहा कि, “हमलोगों का अपराध बस इतना है कि हम अपनी आजीविका के साधन महान जंगल को बचाना चाहते हैं. चाहे हमें सैकड़ों बार जेल जाना पड़े लेकिन हम अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे. हमें जितना दबाया जाएगा हम और उत्साह से अपनी लड़ाई को तेजी से आगे बढ़ायेंगे”.

राज्य प्रशासन जाली ग्राम सभा के प्रस्ताव के बारे एमएसएस सदस्यों की लगातार शिकायतों पर अपने पैर खींच रहा है. इसी ग्राम सभा के आधार पर केन्द्रीय सरकार ने महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी दी है. हालांकि इसी महीने पुलिस ने आधी रात को नींद से जगाकर चार वन सत्याग्रहियों को गिरफ्तार करने में कोई देरी नहीं की. ग्रामीणों ने यह फैसला लिया कि आगे भी इस तरह की अनैतिक गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे.

इस अवसर पर ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा कि, “हम पुलिस और जिला प्रशासन से फर्जी ग्राम सभा को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन उनकी तरफ से कोई कार्रवायी नहीं की गयी. अब हमलोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि फर्जी ग्राम सभा में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज हो सके”.
महान संघर्ष समिति ने कंपनी द्वारा पर्यावरण दिवस पर बच्चों के लिए आयोजित कार्यक्रम को औपचारिकता भर बताया और कहा कि कंपनी पर्यावरण के प्रति अपनी दिखावटी चिंता को बंद करे. अगर सच में कंपनी पर्यावरण को लेकर चिंतित है तो महान जंगल में खदान को रद्द करे तथा बिजली की आपूर्ती के लिए अक्षय ऊर्जा के दूसरे स्रोतों को अपनाए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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