फर्जी फेसबुक प्रोफाइल की तस्वीरों से पुणे में हिंसा, तनाव..

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फर्जी फेसबुक प्रोफाइल, फर्जी तसवीरें और भड़क गया दंगा. छत्रपति शिवाजी महाराज, बाल ठाकरे और कुछ अन्य लोगों की मॉर्फ की हुयी तसवीरें फेसबुक पर पोस्ट करने के बाद पुणे में भड़की हिंसा. शांति बहाली के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किये गए. पत्थरबाजी में कई घायल हुए हैं और संपत्ति और माल की काफी हानि हुयी है.Nilesh-Tikone

प्राप्त जानकारी के अनुसार फेसबुक पर एक विवादित पोस्ट, जिसमें शिवाजी महाराज, बाल ठाकरे समेत कुछ अन्य लोगों को अशालीन तरीके से संबोधित किया गया था, के विरोध में पुणे में जगह जगह प्रदर्शन हुए जो बाद में हिंसक होते चले गए. प्रदर्शन कारियों में ज़्यादातर भाजपा और शिवसेना के कार्यकता बताये जाते हैं. प्रदर्शन के उग्र होने और हिंसा फैलने का आलम ये था कि शनिवार और रविवार में शहर के 33 में से 24 पुलिस थानों में इसका असर देखा गया .
रात के समय में शरारती तत्वों ने पत्थर फेंके और 130 पीएम पीएमपीएमएल की बसें 21 निजी वाहन बर्बाद कर दिए. एक बस और एक पुलिस मोटरसाइकिल समेत तीन वाहनों को आग लगा दी गयी. कई कई दुकानें भी आग के हवाले कर दी गयीं. इन सबके बीच इस विरोध प्रदर्शन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश भी की गयी जब पुणे के निकटवर्ती इलाकों बोप्खेल के निकट गणेशनगर, भोसदी के लांडेवाड़ी, लोहेगाँव, हडपसर के सैयदनगर में संप्रदाय विशेष के कुछ धार्मिक स्थलों में तोड़ फोड़ की गयी.

shiva-sena-set-bus-ablazeविरोध प्रदर्शन करने वालो को मोटरसाइकिलों पररालियाँ निकलते और झुण्ड में भगवा झंडा लहराते हुए नारे लगते हुए देखा गया इस इलाकों में. भाजपा और शिवसेना ने दुकानदारों को जबरन दुकानें बंद करने के लिए मजबूर किया और विरोध करने पर कुछ दुकानों को आग भी लगा दी. बाद में सुरक्षा एजेंसियों ने फेसबुक से इस पोस्ट को हटवा दिया जिसके बाद विरोध कमज़ोर पड़ा.

रविवार की शाम तक 117 लोगों को गिरफ्तार किया गया था जबकि 101 को नज़रबंद किया गया. इसके साथ ही कुछ शरारती तत्वों की पहचान कर ली गयी है जिन पर नज़र रखी जा रही है. इस पूरे प्रकरण में 52 घटनाओं के लिए अलग अलग थानों में 34 केस दर्ज किये गए. भोसड़ी में सबसे ज्यादा संपत्ति हानि की खबर है.

धर्मवीर श्री संभाजी महाराज के नाम से एक फेसबुक प्रोफाइल पर शनिवार रात कुछ आपत्तिजनक तसवीरें अपलोड की गयीं जिनमें कथित तौर पर शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, हिन्दुओं के पूज्य देवता गणेश और बाल ठाकरे की थीं. ये तसवीरें किसी निखिल तिकोने ने whats app पर शनिवार रात में निहाल खान के नाम से प्रचारित की थी. रविवार दोपहर तक निहाल खान की असली पहचान निखिल तिकोने के रूप में कर ली गयी थी और तस्वीरों को इन्टरनेट से हटा लिया गया. बाद में निखिल तिकोने, जो की पुणे के क़स्बा पेठ का निवासी बताया जाता है, को घर में बुरी तरह पीटे जाने की भी खबरें मिली हैं.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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