हाईकोर्ट से वन सत्याग्रही को जमानत मिली..

admin
0 0
Read Time:2 Minute, 41 Second

सिंगरौली, करीब तीन हफ्ते से अधिक जेल में गुजारने के बाद वन सत्याग्रही और महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता बेचनलाल साह को जबलपुर हाईकोर्ट ने जमानत दे दी. शाह को तीन और वन सत्याग्रहियों के साथ 8 मई को महान जंगल को बचाने के प्रयास में गिरफ्तार किया गया था.10246364_10152100467627844_4646206535751946919_n

इनमें से तीन सत्याग्रहियों को 40 घंटे बाद ही रिहा कर दिया लेकिन शाह को जमानत देने से इंकार कर दिया गया था. इस गिरफ्तारी के खिलाफ महान क्षेत्र के ग्रामीणों ने सिंगरौली क्षेत्र के दूसरे सामाजिक संगठनों के साथ 19 मई को जिला कलेक्टर के सामने शांतिपूर्ण धरना भी दिया था.

महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता विरेन्द्र सिंह कहते हैं कि, “अपने जंगल को बचाने के लिए बेचनलाल जी को चार हफ्ते जेल में रहना पड़ा. हम उन्हें सलाम करते हैं. उनके उत्साह और जोश ने हमें संकट की घड़ी में लगातार प्रेरित किया है.”

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी वन सत्याग्रहियों को गिरफ्तार करने के तरीकों को लेकर पुलिस की आलोचना की थी. जहां एक तरफ पुलिस फर्जी ग्राम सभा के खिलाफ एफआईआऱ करने से पीछे हट रही है वहीं दूसरी तरफ उसने 48 घंटे के भीतर ही आधी रात को सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया.

ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई कहती हैं कि, “हमलोगों ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके मांग किया है कि पुलिस अधिक्षक सिंगरौली फर्जी ग्राम सभा मामले में एफआईआर दर्ज करें.”

महान संघर्ष समिति और ग्रीनपीस बेचनलाल जी के उत्साह को सलाम करती है. साथ ही समिति अब ज्यादा ताकत से महान जंगल को बचाने की लड़ाई को जारी रखेगी. जब तक फरवरी में महान कोल लिमिटेड (एस्सार व हिंडाल्को का संयुक्त उपक्रम) को मिले दूसरे चरण की मंजूरी को वापस नहीं लिया जाता तबतक वन सत्याग्रह जारी रहेगा.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

एडस पर एक साफ सुथरी फिल्म: द इंटरनेशनल प्रॉब्लम..

भारतीय सिनेमा के सौ वर्षों के गौरवाशाली इतिहास में पहली बार  एक नई सोच, एक नई दिशा, एक नया क्रांतिकारी कदम है द इंटरनेशनल प्रॉब्लेम . यूं तो फिल्मकारों ने एडस और गे व लेस्बियन जैसे विषयों को कई बार उठाया, लेकिन अब इस विषय पर किसी ने पहली बार […]
Facebook
%d bloggers like this: