Home देश मंत्री समूह भंग होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में आएगी तेजी …

मंत्री समूह भंग होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में आएगी तेजी …

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बनाई मंत्री समूह व्यवस्था को खत्म कर दिया है. प्रधानमंत्री ने सभी 30 मंत्री समूह और उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह भंग कर दिये हैं. उन्होंने मंत्रालयों और विभागों से लंबित मसलों पर फैसले के लिए कहा है. प्रधानमंत्री ने दो दिन पहले ही प्रशासन के 10 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा करते हुए इस बात के संकेत दे दिए थे कि जीओएम और ईजीओएम से फैसला कराने के तरीके को वह पसंद नहीं करते हैं.modi1

इसमें कहा गया था कि मंत्रालयों के भीतर अंतर-मंत्रालीय समितियां बनें, जो अहम फैसले करेंगी. कुछ मंत्रालयों ने तो इस निर्देश के आधार पर अंतर-मंत्रालीय समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी. उन्होंने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे अधिकांश फैसले अपने स्तर पर ही करें. जहां मुश्किल होगी वहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कैबिनेट सचिवालय की मदद ली जाएगी.

उच्चाधिकार प्राप्त 9 मंत्री समूह (ईजीओएम) और 21 मंत्री समूह (जीओएम) को भंग करने के फैसले का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और व्यवस्था में अधिक जवाबदेही आएगी. बयान में कहा गया कि मंत्रालय और विभाग अब ईजीओएम और जीओएम के समक्ष लंबित मुद्दों पर विचार करेंगे और मंत्रालय और विभाग के स्तर पर ही उचित फैसला करेंगे. पीएमओ ने कहा कि जहां कहीं भी मंत्रालयों को कठिनाई आएगी, कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ निर्णय लेने की प्रक्रिया में मदद करेंगे.

बयान में ईजीओएम और जीओएम भंग करने के ऐलान को बड़ा कदम बताते हुए कहा गया है कि ऐसा मंत्रालयों और विभागों के सशक्तीकरण के लिए किया गया है. पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी अधिकांश ईजीओएम के अध्यक्ष थे। भ्रष्टाचार, अंतरराज्यीय जल विवाद, प्रशासनिक सुधार और गैस एवं दूरसंचार मूल्य जैसे मुद्दों पर फैसले के लिए उक्त समूहों का गठन किया गया था. ईजीओएम के पास केन्द्रीय मंत्रिमंडल की तर्ज पर फैसले लेने का अधिकार था. जीओएम की सिफारिशें अंतिम फैसले के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश की जाती थीं.

संप्रग कार्यकाल में सीबीआइ, कैग व अन्य एजेंसियों की वजह से फैसले लेने की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. मगर अब हालात बदलेंगे. जहां फैसला करने में मुश्किल होगी, वहां कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय मदद करेगा. स्पष्ट है कि पीएमओ के साथ ही कैबिनेट सचिवालय ज्यादा मजबूत होंगे. इससे फैसले जल्द किए जा सकेंगे.

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