डिफेंस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश डिसइनवेस्टमेंट और प्राइवेटाइजेशन को देगा बढ़ावा…

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सरकार ने भले ही खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश से इंकार किया हो मगर वह डिफेंस सेक्टर में इसे लाने के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल एडवाइजरी के लिए एक कैबिनेट नोट जारी कर चुकी है. सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. वह डिफेंस सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी करने के सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ है. सीटू का मानना है कि यह डोमेस्टिक प्रोडक्शन के लिए ‘पूरी तरह घातक’ होगा.fdi-intro-image

सीटू ने एक बयान में कहा, ‘इस तरह की पहल डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन नेटवर्क विशेषकर सरकारी विभाग व पीएसयू के हितों को पूरी तरह नुकसान पहुंचाएगा. साथ ही यह राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियों के लिए भी नुकसानदेह साबित होगा.इसके अलावा, इस कदम से रक्षा क्षेत्र के पीएसयू विशेषकर आयुद्ध कारखानों में डिसइनवेस्टमेंट या प्राइवेटाइजेशन की मांग जोर पकड़ेगी.

सीटू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा डिफेंस सेक्टर में एफडीआई सीमा बढ़ाकर100 फीसदी करने पर इंटर मिनिस्ट्रियल एडवाइजरी के लिए एक कैबिनेट नोट जारी किया गया है. डिफेंस सेक्टर में एफडीआई की मौजूदा सीमा 26 फीसदी को बढ़ाकर100 फीसदी करने के प्रस्ताव का उद्देश्य देश में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी लाना है. 15 पन्नों के नोट के मुताबिक पोर्टफोलियो निवेशकों जिसमें विदेशी संस्थागत निवेशक भी शामिल है, को इस क्षेत्र में 49 फीसदी निवेश की ही अनुमति है. नोट में यह भी कहा गया है कि कोई विदेशी कंपनी यदि आधुनिक टेक्नॉलजी देश में लाती है तो वह घरेलू कंपनी का अधिग्रहण भी कर सकती है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने के अनुसार विदेशी कंपनियों को देश में विशाल स्टोर खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अभी अनुमति देना उचित नहीं है, क्योंकि छोटे व्यापारियों व किसानों का अभी उचित तरीके से सशक्तीकरण नहीं हुआ है. एफडीआई के आ जाने यह वर्ग बुरी तरह प्रभावित होगा.खुदरा व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने सीतारमण की इस घोषणा का स्वागत भी किया था और इसे भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र के अनुरुप भी बताया.

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