व्हाइट हाउस ने नहीं किया स्नोडेन को माफ..

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वाशिंगटन : व्हाइट हाउस ने कहा है कि भंडाफोड़ करने वाले, सीआईए के पूर्व अनुबंधकर्ता एडवर्ड स्नोडेन के लिए ‘क्षमा’ की कोई गुंजाइश नहीं है, उन्हें अमेरिका लौटना होगा और स्वयं पर लगे आरोपों का सामना भी करना होगा.NSA whistleblower Edward Snowden, an analyst with a U.S. defence contractor, is pictured during an interview with the Guardian in his hotel room in Hong Kong

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्नी ने कहा कि देखिए, सब कुछ बिल्कुल साफ है, क्षमा की कोई गुंजाइश नहीं है. स्नोडेन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अमेरिका लौटने की इच्छा जताई थी. अमेरिका में उन पर गोपनीय दस्तावेजों को अनधिकृत रूप से लीक करने का आरोप है.

उन्होंने कहा कि इस संबंध में मूल विचार यह है कि उन्हें अमेरिका लौटना होगा और स्वयं पर लगे आरोपों का सामना करना होगा. कार्नी ने कहा कि हमारा मानना है कि उन पर जो भी आरोप लगे हैं वे बेहद गंभीर हैं. उन्होंने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, अमेरिका व अमेरिका के लोगों की सुरक्षा और हमारे सहयोगियों को लेकर हमारी क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है. यह बेहद गंभीर अपराध है.

स्नोडेन को माफी के बारे में पूछे जाने पर कार्नी ने कहा कि मुझे लगता है कि हमने इस संबंध में लगभग स्पष्ट कर दिया है कि उनकी माफी पर विचार नहीं किया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग के दायरे में आता है. फिलहाल स्नोडेन रूस में हैं.

बाद में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने उसी दिन स्नोडेन के साथ ईमेल के जरिए हुई बातचीत का ब्यौरा जारी किया. एनएसए ने सीनेट की खुफिया मामलों की समिति को सूचित किया कि स्नोडेन द्वारा ईमेल के जरिये अथवा अन्य किसी भी तरीके से किसी के भी सामने एनएसए की खुफिया गतिविधियों को लेकर कोई चिंता जाहिर करने या शिकायत करने का कोई साक्ष्य नहीं मिला. एनएसए ने कहा कि ऐसे किसी संवाद की तलाश वह जारी रखेगी.

(एजेंसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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