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शताब्दियों का संवाद मिलता है आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के चिंतन में : विश्वनाथ त्रिपाठी

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-वेदप्रकाश||

के.के. बिरला फाउंडेशन की ओर से हर वर्ष दिया जाने वाला व्यास सम्मान, इस वर्ष डा. विश्वनाथ त्रिपाठी को आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी पर लिखी उनकी संस्मरणात्मक जीवनी ‘व्योमकेश दरवेश’ के लिए दिया गया है. 1991 से आरंभ यह सम्मान अपने तेइसवें वर्ष में पहुँच गया है। 29 मई को शाम 6 बजे इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मल्टी पर्पस हाल में डॉ.नामवर सिंह ने निर्णायक समिति के अध्यक्ष डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित और के. के. बिरला फाउंडेशन के निदेशक डॉ.सुरेश तुपर्ण के साथ उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया।vishvanath tripathi

23 वे व्यास सम्मान कार्यक्रम के आरंभ में डॉ.सुरेश तुपर्ण ने डॉ.त्रिपाठी को दिये जा रहे इस सम्मान के प्रशस्ति-पत्र का वाचन किया। इसके बाद चयन समिति के अध्यक्ष डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित ने डॉ.विश्वनाथ त्रिपाठी की रचनाशीलता और व्योमकेश दरवेश कृति के संबंध् में अपने विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि हिंदी में जीवनी साहित्य अन्य भारतीय भाषाओं की अपेक्षा काफी कम काम हुआ है। इस विधि का आरंभ भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा बीवी फातिमा की जीवनी से मानी जाती है।

इसे वही व्यक्ति लिख सकता है जिसे चरित्र नायक का गहरा सान्निध्य प्राप्त हुआ हो। अंत में अध्यक्षीय भाषण में डॉ.नामवर सिंह ने कहा कि मैं तो केवल पंडितजी का शिष्य था जबकि विश्वनाथ जी अंतेवासी थे। यह जीवनी एक मुकम्मल किताब है। विश्वनाथ त्रिपाठी जी ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के चिंतन में शताब्दियों का संवाद मिलाता है. खुद को मिले हुए सम्मान के बारे में उन्होंने कहा आगे कि ‘इस सम्मान की मेरे मानसिक कोने में कहीं जरुरत रही होगी, आप जानते ही हैं कि लेखको की कई प्रकार की जरूरते होती हैं, कुछ अलंकारिक होती हैं कुछ अहंकारिक होती हैं’. मंच का संचालन अमिषा अनेजा ने किया. कार्यक्रम में जाने माने साहित्यकार और बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की.

 

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