कांग्रेस की मृगतृष्णा..

admin 1
0 0
Read Time:2 Minute, 21 Second

-शम्भुनाथ शुक्ला||
जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं किया करतीं पर कांग्रेस जिंदा हो तब ना! कांग्रेसी नेता जो बस दस जनपथ की गणेश परिक्रमा किया करते हैं यह बात नहीं समझेेंगे. उन्हें तो बस सारी संभावनाएं राहुल गांधी में ही दिखाई देती हैं जिनका आचरण एक पप्पू से बेहतर नहीं. कांग्रेसी नेता मुस्तफा ने हिम्मत दिखाई तो उन्हें बाहर कर दिया गया.T-H-Mustafa

अब इस पार्टी से कोई उम्मीद नहीं करना. अगर वाकई एक सार्थक विपक्ष बनना है तो बंगाल की ममता अथवा तमिलनाडु की जय ललिता से ही उम्मीद की जा सकती है. बेहतर हो कि ये सब अपने क्षेत्रीय दायरे सेे बाहर निकलें और यूपी, बिहार, मप्र आदि बीमारू प्रदेशों में भी आकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन करें. वर्ना विपक्ष तो बचेगा नहीं और फिर सरकार वह सब कर लेगी जो उसके हिडन एजंडे में होगा. तब जनता को लगेगा कि जिस कांग्रेस पर भरोसा किया वह कितनी बड़ी डफर निकली.

नेता वंश परंपरा से नहीं हुआ करते अलबत्ता राजा हुआ करते हैं. वे राजा कई दफे अपनी हरकतों से जोकरनुमा पप्पू बन जाया करते हैं. अपने राहुल गांधी की भूमिका अब ऐसी ही हो गई है. उधर पप्पू के चंपुओं को बस राहुल की चापलूसी से फुरसत नहीं है. इसीलिए मुस्तफा को बाहर किया. अगर वाकई कांग्रेस में एक स्वस्थ विपक्ष बनने की हिम्मत है तो हर राज्य में जाकर वहां के लोगों से सीधे संवाद करे. गांव-गांव और कस्बे-कस्बे जाए और लोगों के बीच उम्मीद जगाए. पर यह पार्टी तो 2019 का इंतजार कर रही है कि तब तक जनता नई सरकार से नाखुश हो जाएगी और फिर हमारे के भाग्य से छींका टूट जाएगा और पप्पू हाथी पर बैठकर जनता दर्शन को निकला करेंगे.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “कांग्रेस की मृगतृष्णा..

  1. व्यक्ति पूजा वाले दलों का यही हश्र होना था ,लेकिन कांग्रेस पहले भी इस दौर से गुजर चुकी है राजीव भी चापलूसों की चौकड़ी से ही घिरे रहते थे , पर बाद में पार्टी ठोकर खा संभल गयी थी , अब कुछ समय इंतजार कर एक दो चुनावों में राहुल की क्षमता को और परखा जायेगा, और असफल रहने पर फिर 2016- 2017 तक प्रियंका को ल खड़ा किया जायेगा ताकि 2019 तक वह पार्टी में नया जोश भर खड़ा कर सके अपंग कांग्रेसी फिर उसके पिछलग्गु हो जायेंगे क्योंकि इनकी आदत इस परिवार से डांट खा अनुशासन में रहने की है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

शताब्दियों का संवाद मिलता है आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी के चिंतन में : विश्वनाथ त्रिपाठी

-वेदप्रकाश|| के.के. बिरला फाउंडेशन की ओर से हर वर्ष दिया जाने वाला व्यास सम्मान, इस वर्ष डा. विश्वनाथ त्रिपाठी को आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी पर लिखी उनकी संस्मरणात्मक जीवनी ‘व्योमकेश दरवेश’ के लिए दिया गया है. 1991 से आरंभ यह सम्मान अपने तेइसवें वर्ष में पहुँच गया है। 29 मई को […]
Facebook
%d bloggers like this: