धारा 370 को लेकर राजनीति गरमाई..

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अनुच्छेद 370 – एक संक्षिप्त परिचय :

भारतीय संविधान के अंतर्गत जम्मू कश्मीर के लिए अलग संवैधानिक व्यवस्था है. इसके अनुसार जम्मू और कश्मीर को अलग स्वायत्त राज्य का दर्जा और विशेष अधिकार मिले हुए हैं. अनुच्छेद 370 के अनुसार जम्मू कश्मीर में कुछ विभागों को छोड़ कर केंद्र के कानून लागू करने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की सहमति आवश्यक है. इसके तहत विदेश, वित्त, रक्षा और दूरसंचार को छोड़कर बाकी विभागों में केंद्र का कानून लागू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है. साथ ही किसी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू और कश्मीर में संपत्ति न तो खरीद सकता है न बना सकता है. संविधान की शुरुआत से ही लागू इस व्यवस्था में बदलाव के लिए भाजपा शुरू से ही प्रयासशील रही है .

नयी सरकार और विवादों की शुरुआत : 
अनुच्छेद 370 पर डॉo जीतेन्द्र सिंह के बयान के जवाब में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने तीखा ट्वीट किया है. इस मामले में जीतेन्द्र सिंह के बयान के बाद से कांग्रेस और सहयोगियों के साथ साथ जम्मू कश्मीर की सरकार का भी तेज़ विरोध सामने आया था जिसमें कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस समेत कई पार्टियों ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया था. बाद में विवाद बढ़ने पर जीतेन्द्र सिंह ने सफाई भी दी थी.Omar Abdullah  abdullah_omar  on Twitter

जवाबी हमला: विवाद की पुष्टि
मुखमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट के माध्यम से दिए सन्देश में कहा है कि केंद्र सरकार के राज्यमंत्री कहते हैं कि 370 को ख़त्म करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. बहुत अच्छे, ये एक जल्दबाज़ी भरा कदम है, लेकिन यह तय नहीं कि कौन किस्से बात कर रहा है. मेरे शब्दों को ध्यान रखिये और इस ट्वीट को सुरक्षित कर के रख लीजिये – जब मोदी सरकार महज याद बन कर रह जाएगी तब या तो जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होगा या फिर अनुच्छेद 370 बरक़रार रहेगा. उमर ने अगले ट्वीट में कहा, ‘अनुच्छेद 370 ही वो संवैधानिक कड़ी है जो जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़े है. इसे खत्‍म करने की बात करना न केवल जानकारी के अभाव का मामला है बल्कि गैर जिम्मेदराना भी है।’

संघ का हस्तक्षेप और प्रधानमंत्री कार्यालय की सफाई :
हाल ही में पीएमओ में राज्यमंत्री का कार्यभार सँभालने वाले उधमपुर के सांसद जितेंद्र सिंह ने अपने इरादे जता दिए हैं कि जम्मू कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 पर बहस होनी चाहिए. गौरतलब है कि भाजपा की जम्मू कश्मीर की इकाई शुरू से ही अनुच्छेद 370 के खिलाफ रही है और ये विरोध लगातार पार्टी के एजेंडे में शामिल रहा है. अब जब भाजपा केंद्र में वापस आई है तो इस मौके का पूरा इस्तेमाल करने की मंशा रखते हुए जीतेन्द्र सिंह ने मुहीम शुरू कर दी है.

dr jitendra singhअब तक सिर्फ दो पक्षों के बीच रहे इस विवाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी आ गया है. संघ के प्रवक्ता राम माधव ने ट्वीट में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह को आड़े हाथों लिया है. माधव लिखतते हैं -“जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होगा? क्या उमर जम्मू कश्मीर को अपनी पैतृक संपत्ति समझ रहे हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था और आगे भी रहेगा।”

शपथग्रहण के तुरंत बाद पीएमओ से शुरू हुए इस विवाद को फैलते देर नहीं लगी. हालांकि जीतेन्द्र सिंह ने बाद में मामला सँभालने की कोशिश करते हुए कहा भी था कि उन्होंने प्रधानमंत्री के हवाले से कुछ नहीं कहा है. लेकिन उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की भारत दौरे के समय आये इस बयान को गंभीरता से लेते हुए इस पर तीखी प्रतिक्रिया दे कर मामले को आंच दे दी.

कश्मीर में नेता प्रतिपक्ष मह्बूबा मुफ़्ती ने जारी बयान में कहा है कि ऐसी बयानबाजी फ़ौरन बंद होनी चाहिए. इसके कश्मीर पर गंभीर असर पड़ सकते हैं और माहौल बिगड़ सकता है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा सरकार किसी हड़बड़ी में नहीं है और सोच समझकर फैसला लिया जायेगा. सभी पक्षों से बातचीत के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जायेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “धारा 370 को लेकर राजनीति गरमाई..

  1. अब्दुल्ला परिवार ने देश के लिए किया ही क्या है सिवाय गांधी परिवार की चापलूसी के. वे अपनी रियासत की तरह कश्मीर पर अपना हक़ दिखा रहे हैं उम्र अब्दुल्ला भूल जाते हैं कि कश्मीर का राजस्व कितना कम है और उसका सारा खर्च देश की जनता की गाढ़ी कमाई से आये करों से चलता है वे अलग अस्तित्व दिखा क्या हासिल करना चाहते हैं यदि उन्हें पाकिस्तान से इतना प्यार है तो वहां चले जाना चाहिए वहां क्या दुर्गति होगी पता चल जायेगा. महबूबा मुफ़्ती आज धरा 370 हटाने का विरोध करती हैं पर इनके परिवार ने देश के लिए क्या किया सिवाय आतंकवादियों को बढ़ावा देने के आतंकवादियों के होंसले बुलंद इन्होने ही किये थे जब इनकी बहन रूबिआ का अपहरण कर छोड़ने के बदले आतकवादी रिहा किये गए जब इनके पिता देश के गृह मंत्री थे निहायत अपने स्वार्थ पूर्ति के इन लोगों ने कश्मीर को क्या दिया। इसी डर से कि कहीं इनकी चौधराहट ख़त्म न हो जाये वे इसका विरोध करते हैं.

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