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हाई प्रोफाइल महिलाओं को फंसा बनाता था अश्लील MMS..

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लखनऊ, वो काफी शातिर था. उसने अपने लैपटॉप बैग में छेद कर रखा था और उसमें अपने मोबाइल का कैमरा फिक्‍स कर देता थाऔर कैमरे को बेड की तरफ घुमा कर वो महिलाओं की अश्‍लील क्लिप बना लेता था. उसके बाद वो महिलाओं को ब्‍लैकमेल कर मोटी रकम वसूलता था.Visitor takes pictures of an adult film actress while she performs during the Eros Show in Sofia

जी हां, पुलिस ने एक ऐसे युवक को दबोचा है जो कम से कम 40 से ज्‍यादा हाई प्रोफाइल महिलाओं को अपना शिकार बना चुका था. पुलिस ने उस युवक के पास से 5 मोबाइल फोन, डायरी और लैपटॉप बरामद किया है. लैपटॉप में कई महिलाओं की अश्‍लील क्लिपिंग मिली हैं. मामला उत्‍तर प्रदेश के बिजनौर जिले का है.

पुलिस को सूचना मिली कि बिजनौर के मोहल्‍ला आर्दशनगर निवासी पंकज चौधरी महिलाओं को झांसे में लेकर उनकी ब्‍लू फिल्‍म बना लेता है. पुलिस फौरन पंकज की ताक में लग गई और उसे उसके ही घर के पास से धर दबोचा. पुलिस ने पंकज के घर की तलाशी ली तो वहां से लैपटॉप, 5 मोबाइल और एक डायरी बरामद हुई. पुलिस ने जब लैपटॉप की छानबीन की तो उसमें 6 महिलाओं की ब्‍लू फिल्‍म मिली.

पुलिस ने बताया कि पंकज महिलाओं को ब्‍लैकमेल कर उनसे मोटी रकम वसूलता था. अगर किसी महिला ने पैसे देने से मना किया तो पंकज उस क्लिप को वायरल कर देने की धमकी देता था. पुलिस की माने तो पंकज के खाते में महिलाओं से 50 से 70 हजार रुपये तक आते हैं.

पूछताछ में पंकज ने पुलिस को बताया कि वह 40 से ज्यादा महिलाओं को ब्लैकमेल कर चुका है. वह वर्ष 2008 से इस काम को कर रहा है. 30 साल के पंकज के निशाने पर शादीशुदा महिलाएं ज्यादा रहती थीं. एक दो युवतियों को भी वह जाल में फंसाकर ब्लैकमेल कर चुका है.

पुलिस ने बताया कि पंकज चौधरी की शहर में स्थित सेंट मैरी स्कूल के पास सीमेंट की दुकान है. झांसे में लेकर पंकज महिलाओं को अपने मकान पर ले जाता था. उसने अपने कमरे में लैपटॉप के बैग में छेद कर रखा है. बैग के छेद में मोबाइल फिक्स करके कैमरे का मुंह बेड की ओर कर देता था. जो महिलाएं बेड तक उसके साथ गईं, उसकी वह अश्लील क्लिपिंग बना लेता था. पुलिस के मुताबिक पंकज ने पत्नी को छोड़ रखा है. वह घर पर अकेला रहता है. पुलिस ने बताया कि हाई प्रोफाइल महिलाएं पंकज के निशाने पर थीं. ऐसे महिलाएं बदनामी के डर से उसे अच्छी रकम दे देती थीं.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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