Home देश पत्रकारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति से है मीडिया की स्वतंत्रता, पूंजीपति के फायदे से नहीं..

पत्रकारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति से है मीडिया की स्वतंत्रता, पूंजीपति के फायदे से नहीं..

-शेष नारायण सिंह||

नई दिल्ली, जनता दल यू  के अध्यक्ष , शरद यादव ने कहा है कि देश की बहुत सारी मीडिया कंपनियों  ने दोनों  ही बड़ी पार्टीयों से थैली पकड  ली है. कहते हैं कि इसी  कारण से  बीजेपी की मर्ज़ी के हिसाब से ख़बरों को छापा जाता है और उसका प्रसारण किया जाता है.  उन्होंने नरेंद्र मोदी के लिये बनारस के बेनियाबाग में  सभा करने की  अनुमति न मिलने पर चुनाव आयोग के खिलाफ़ बीजेपी नेताओं  के  धरने की निन्दा की और  कहा कि  वे भी बनारस गये थे और उनको भी सभा करने की  अनुमति नहीं मिली थी लेकिन चुनाव आयोग जैसी एक निष्पक्ष संस्था के  खिलाफ़ धरने पर बैठने की  कोई  ज़रुरत नहीं थी.  उन्होंने मीडिया कंपनियों , खासकर टेलिविजन चैनलो  की  आलोचना की  और कहा कि बीजेपी की मर्ज़ी की ख़बरें छापने का कोई औचित्य नहीं है.sharad_yadav

शरद यादव की आज की प्रेस वार्ता लगभग पूरी तरह से नरेन्द्र मोदी के तथाकथित  झूठ  बयानोँ और मीड़िया कंपनियों के  मालिकों को समर्पित था. उन्होंने कहा कि चुनाव सर्वे के नाम पर टी वी चैनल उन पार्टियों  का प्रचार करते हैं जो उनको पैसे देते हैं.  उन्होंने कहा कि  मीडिया के मालिकों  की  कृपा  से नरेन्द्र मोदी  के पक्ष  में जो हवा बनायी गयी थी , उसकी पोल खुल चुकी है और अब बीजेपी वाले  ज़मीन पर आ गये हैं. इसीलिये चुनाव आयोग जैसी  स्वतन्त्र संस्था के खिलाफ़ अभियान चला रहे हैं और मीडिया उनको गैर वाज़िब प्रचार दे  रहा है.  उन्होंने  कहा कि  मीडिया की स्वतन्त्रता  आज वास्तव मे मालिको की स्वतंत्रता हो गयी है. मीडिया की आज़ादी को सही अर्थों में  पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ना पडेगा.  आज की स्थिति बहुत खराब है क्योंकि मीडिया के नाम पर पूंजीपति सरकारों से लाभ ले रहे हैं , चुनाव के दौरान सभी पार्टियों से पैकेज ले रहे हैं और जनता  को राजनीतिक सच्चाई से गुमराह कर रहे हैं. उन्होंने फिर कहा कि मीडिया समूहों  मे काम करने वाले पत्रकार ईमानदार है. लेकिन उनको मालिक बेवजह नौकरी से निकाल देते हैं.  उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों की भर्ती  और बर्खास्तगी की घटनायें बहुत ज़्यादा होती हैं.

शरद यादव ने कहा कि अगर मीडिया कम्पनियां सही अर्थों  मे निष्पक्ष  हो जाएँ तो चुनाव सुधार क लक्ष्य साठ  प्रतिशत से ज़्यादा हासिल कर लिया जाएगा.लेकिन इसके लिए मालिकों की नहीं पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा  को सुनिश्चित करना पडेगा. शरद यादव ने  कहा कि  वे  घंटों भाषण  करते है लेकिन उसमें से एकाध वाक्य निकलाकर उसका अर्थ का अनर्थ करके  छाप दिया जाता है.  बताने लगे कि  पिछले दिनों उनके हवाले से खबर छपी थी कि उन्होने लालू यादव और  नीतीश कुमार  को जातिवादी करार दिया था. यह  बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने की घटना है.  उन्होंने प्रियंका  गांधी के नीच राजनीति वाले मामले भी ज़िक्र किया  और आरोप लगाया कि  नरेन्द्र मोदी ने उसको बिल्कुल गलत तरीके से उठाया.  उन्होंने इस बात पर भी एतराज़ जताया कि नरेन्द्र मोदी अपने आपको एकाएक पिछड़ी  जाति का बताने लगे हैं. श्री यादव ने  नरेन्द्र मोदी को याद दिलाया कि पिछड़ों के उत्थान राजनीति करणा बहुत आसान नहीं है और वह नरेन्द्र मोदी के बस की  बात नहीं है.  डॉ भीमराव अम्बेडकर और  डॉ राम मनोहर लोहिया   ने पिछड़ी जातियों की राजनीति की थी और उनके उत्थान  की बात की थी. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पूरा जीवन पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिये  लगा दिया.  नरेंद्र मोदी को तो उसकी समझ भी नहीं है. शरद यादव ने धमकी दी कि नरेन्द्र मोदी की जाति के कुछ लोगों को एक दिन प्रेस के सामने बैठा देगें और साबित कर देगें कि  नरेंद्र मोदी पिछड़ी जाति के नहीं हैं.बार बार कहते  रहे कि नरेंद्र मोदी को अपनी नीच जाति का इल्हाम उत्तर प्रदेश और  बिहार के चुनावों के लिए ही क्यों हुआ.

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