Home देश महान, मध्य प्रदेश में मारपीट के बाद वन सत्याग्रही गिरफ्तार..

महान, मध्य प्रदेश में मारपीट के बाद वन सत्याग्रही गिरफ्तार..

महान संघर्ष समिति (एमएसएस) और ग्रीनपीस के दो-दो एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के बावजूद वन सत्याग्रह को तेज करने के लिए चार गांव के 150 से भी अधिक लोग एस्सार के खिलाफ संघर्ष जारी रखे हुए हैं.

मई, 8, सिंगरौली, मध्य प्रदेश. धमकियों और घटिया रणनीति के तहत की गई ग्रीसपीस और एम एस एस के चार कार्यकर्ताओं के गिरफ्तारी के बावजूद 150 से अधिक ग्रामीण एस्सार के नाजायज कोल खदान के प्रस्ताव के विरोध में सिंगरौली जिला स्थित महान जंगल में संघर्ष जारी रखे हुए हैं.10330473_10152096577737844_3684550980849418815_n

अमेलिया गांव के निवासी और एम एस एस के सदस्य हरदयाल सिंह ने कहा ” वे हमें इन गंदी चालों से नहीं डरा सकते. हम दूसरे कई जगहों के आन्दोलनकारी भाइयों और बहनों से प्रभावित हैं जो जगह-जगह अपना आंदोलन चला रहे हैं. हम अपनी गिरफ्तारी, शारीरिक हिंसा या अन्य किसी तरह की यातना से डरते नहीं हैं. हम अपनी लड़ाई को जारी रखेगें और किसी भी परिस्थिति में जंगल छोड़कर नहीं जाएगें. हमें विश्वास है कि हम जीतेगें और हमें न्याय मिलेगा.”

स्थानीय पुलिस ने आधी रात में चार प्रदर्शनकारियों को सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और डकैती का बेतुका आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले भी ग्रीनपीस के एक कार्यकर्ता को पुलिस द्वारा उस समय पीटा गया, जब उन्होंने एक जाली दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. इस साल के फरवरी से वे लोग वन सत्याग्रह कर रहे हैं. उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया गया है और वैढ़न में न्यायिक हिरासत में रखा गया है.

पिछले कुछ दिनों से एम एस एस के सदस्य वन विभाग और एस्सार के अधिकारियों से मांग कर रहे हैं कि कोल खदान के लिए रास्ता साफ करने के लिए जिस तरह से जंगलों की कटाई हो रही है उसपर तत्काल रोका लगाई जाय. मोटेतौर पर एक अनुमान है कि खदान के लिए रास्ता बनाने में लगभग पांच लाख से अधिक पेड़ों को काटना पड़ेगा और वन क्षेत्र के 54 गांवों के तकरीबन पचास हजार लोगों की जीविका इससे प्रभावित होगी.

ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आइच ने कहा, ” हम स्थानीय लोगों के दृढ़विश्वास से बहुत प्रभावित हैं और अब महान में एस्सार द्वारा किए जा रहे के गलत कामों को बेनकाब करने के लिए कृतसंकल्प हैं. वे हमारी प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहे हैं. एस्सार ग्रीनपीस द्वारा स्थानीय लोगों को सशक्त बनाने की ईमानदार कोशिश को दुर्भावनापूर्ण इरादे से बदनाम कर रहे हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि जो कोई भी एस्सार के कोल खदान के खिलाफ काम करेगा उसके खिलाफ हताश होकर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का अभियान चलाएगा. ”

सोमवार को हुए उस प्रदर्शन के 48 घंटे के भीतर ही चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है जिसमें एम एस एस के लोगों के अलावा महिलाएं भी शामिल थी. प्रदर्शनकारी एस्सार और वन विभाग के अधिकारियों के सामने पेड़ों को काटने के लिए लगा रहे निशान का विरोध कर रहे थे. ग्रीनपीस के जिन दो एक्टिविस्टों अक्षय और विनीत गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है वे तो सिर्फ अपने कैमरा से पेड़ों पर लगाए जा रहे निशान का फोटो ले रहे थे.

ग्रीनपीस की सीनियर कंपैनर प्रिया पिल्लई ने कहा, “आखिर उनलोगों की गिरफ्तारी क्यों हुई जो सिर्फ फोटोग्राफी कर रहे थे. क्या एस्सार को इस बात का डर था कि इससे उसके अनैतिक क्रिया-कलापों का खुलासा हो जाएगा. ये सभी इस बात का प्रमाण है कि एस्सार अपने हित के लिए स्थानीय लोगों के शांतिपूर्वक विरोध के अधिकार को खत्म कर देना चाहती है. ”

ग्रीनपीस की कंपैनर प्रिया पिल्लई का कहना है कि जिस हड़बड़ी में गिरफ्तारी की गई वह अभूतपूर्व है. उनका कहना था, ” स्थानीय पुलिस तो इस तरह से काम ही नहीं करती है. वह इतनी तेज गति से कभी काम नहीं करती. एम एस एस के सदस्य ग्राम सभा में हुई गड़बड़ियों के मामले को पिछले दो महीने से उठा रहे हैं लेकिन पुलिस मामले पर कंुडली मारकर बैठी है और इस मामले में अभी तक कुछ नहीं की है. एस पी से मिलने के बावजूद अभी तक इस मामले में एफ आई आर तक दर्ज नहीं हुआ है. ” ऐसा लगता है कि सरकार वहां जल्दी से जल्दी खनन शुरु करवाना चाहती है.

इस साल फरवरी में, महान के दूसरे चरण के वन मंजूरी (अंतिम चरण निकासी) के बाद महान के जग नारायण साह ने 6 मार्च 2013 के फर्जी ग्राम सभा की मंजूरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी . उसके बाद एक बड़ी रैली में जिसमें 14 से अधिक गांवों के लोगों ने वन सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया और उस परियोजन को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करने का संकल्प लिया था. जिलाधिकारी ने अधिकारिक रूप से यह घोषणा भी की थी कि वे इस मामले को नए सिरे से ग्राम सभा की बैठक बुलाकर देखेगें.

वन सत्याग्रह लगातार मजबूत हो रहा है क्योंकि इसमें शहरी इलाके से कार्यकर्ता आकर स्थानीय लोगों के साथ जुड़ रहे हैं. पिछले महीने बाहर से आए कई कार्यकर्तागण जंगलों में १५ दिन रूककर स्थानीय समुदाय के लोगों को महुआ बीनने में मदद कर रहे थे.

ग्रीनपीस और एम एस एस इस घटिया हरकतों के सामने घुटने नहीं टेकेगी. ग्रीनपीस वन मंजूरी को रद्द करने की मांग पर कायम है.

Facebook Comments
(Visited 7 times, 1 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.