महान संघर्ष समिति ने पेड़ों पर मार्किंग के खिलाफ शांतिपूर्वक जताया विरोध..

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ग्रामीणों ने जंगल में कंपनी अधिकारियों को सर्वे और पेड़ों को चिन्हित करने से रोका..

सिंगरौली, 6 मई 2014. एस्सार कंपनी ने महान जंगल क्षेत्र के ग्रामीणों के अधिकारों का एक बार फिर उल्लंघन किया. कंपनी ने सीमांकन के लिए जंगल में पेड़ों और पत्थरों को चिन्हित करना शुरु कर दिया है. महान संघर्ष समिति ने इसका विरोध किया है और अधिकारियों को तुरंत इस गतिविधि को रोकने की मांग की.IMG_0151

विशेषकर महिलाओं ने इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाग लिया. सोमवार को विरोध स्थल पर पुलिस भी पहुंची लेकिन ग्रामीणों ने विरोध जारी रखा. ग्रामीणों का विरोध देखते हुए कंपनी के अधिकारी सर्वे उपकरण जंगल में ही छोड़ कर चले गए थे, जिसे ग्रामीणों ने देर शाम बंधोर पुलिस चौकी में जाकर जमा करवा दिया. आज अमिलिया, बुधेर, सुहिरा और बंधोरा के करीब 140 ग्रामीणों ने बैठक कर निर्णय लिया कि वे कंपनी द्वारा जंगल में किए जा रहे किसी भी कार्य का शांतिपूर्वक विरोध जारी रखेंगे.

कंपनी के अधिकारी गुप्त रुप से पिछले तीन से चार महीने से प्रस्तावित कोयला खदान के सीमांकन के लिए पेड़ों और पत्थरों पर अंकन कर रहे हैं. पिछले महीने महान संघर्ष समिति ने इसके खिलाफ जिला कलेक्टर और जिला वनमण्डलाधिकारी सिंगरौली के पास शिकायत भी दर्ज करवाया था लेकिन कोई भी कार्रवायी नहीं की गयी.

पिछले साल अगस्त में कंपनी अधिकारियों ने इसी तरह पेड़ों को चिन्हित करने का काम किया था जिसका महान संघर्ष समिति ने जोरदार विरोध जताया था.

महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता और अमिलिया निवासी विजय सिंह ने कहा कि, ‘एस्सार के कर्मचारियों ने महान जंगल में चुपके से पेड़ों और पत्थरों को अंकित किया है. हमलोगों ने कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे सर्वे को रोक दिया है और इसका विरोध आगे भी करते रहेंगे. यह हमारे वन सत्याग्रह का ही एक हिस्सा है जिसे हमने महान को दूसरे चरण की मंजूरी मिलने के बाद फरवरी में शुरू किया था’.

ग्रीनपीस की कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने सवाल उठाते हुए कहा कि, ‘क्या उन्हें गैर वन गतिविधि शुरू करने की अनुमति मिल गई है ? यह लोगों के अधिकारों का हनन है. हम वनमण्डलाधिकारी से मांग करते हैं कि वो तुरंत कंपनी को गतिविधि को रोकने का आदेश दे’.IMG_0171
इससे पहले फरवरी में पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली द्वारा महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण का पर्यावरण मंजूरी दे दिया गया था, जिसका महान के ग्रामीणों द्वारा पुरजोर विरोध किया गया. उन्होंने उस विशेष ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के जाली होने का सबूत पेश किया है जिसके आधार पर दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी दी गयी है.

साल 2012 में महान कोल ब्लॉक को 36 शर्तों के साथ पहले चरण का पर्यावरण मंजूरी दिया गया था जिसमें वनाधिकार कानून को लागू करवाना भी शामिल था. 6 मार्च 2013 को अमिलिया में वनाधिकार पर विशेष ग्राम सभा आयोजित किया गया था. इस ग्राम सभा में 184 लोग उपस्थित थे लेकिन आरटीआई से मिले ग्राम सभा के प्रस्ताव में 1125 लोगों के हस्ताक्षर हैं. इनमें कई ऐसे हैं जो तीन साल पहले मर चुके हैं. इसके अलावा 27 अमिलिया निवासियों ने लिखित रुप से शिकायत दर्ज कराया है कि वे उस ग्राम सभा में उपस्थित नहीं थे.

महान संघर्ष समिति के जगनारायण शाह ने फर्जी ग्राम सभा के प्रस्ताव के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवायी है लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है. मीडिया खबरों के अनुसार जिला कलेक्टर एम. सेलवेन्द्रन ने कहा है कि वे इस मामले को देखेंगे. महान संघर्ष समिति ने पुलिस अधीक्षक डी. कल्याण चक्रवर्ती के पास भी आवेदन दिया है.

स्पष्ट है कि दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी सवालों के घेरे में है. महान संघर्ष समिति मांग करती है कि जंगल में इस तरह के सर्वे पर रोक लगायी जाय और ग्रामीणों की शिकायत पर जल्द से जल्द कार्रवायी की जाय.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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