सरहदों में बंधा सोहैल..

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-सिकंदर शेख||

“”पंछी नदियां पवन के झोंके , कोइ सरहदvlcsnap-2014-04-28-13h49m43s166 ना इन्हेँ रोके , सरहदें इंसानों के लिये हैं , सोचो तुमने और मैने क्या पाया इन्साँ होके “” मशहूर गीतकार जावेद अख्तर की ये खूबसूरत पंक्तियाँ पाकिस्तान की एक महिला के भारत में जन्मे बच्चे पर बिल्कुल सटीक बैठती है और आपनी माँ फातमा कि गोद मैं सोते वक़्त इस नन्हीं सी आत्मा के मासूम लबो से शायद ये बोल बोल ना निकल सके मगर एक महीने के इस बच्चे सोहैल ने पुरी दुनिया मैं सबको यही सोचने पर मज़बूर कर दिया है, उसकी माँ उसको प्यार से निहारती अपनी सुनीं आँखों से सियासत दानों को कोस रही है , अपने वतन में बैठे अपने पति को याद कर रही है , उसका कुसूर सिर्फ़ इतना है कि उसने पाकिस्तान की नागरिक होकर हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर एक नन्हीं सी जान को दुनिया मैं पहला कदम रखवाया है , और अब सियासतदानों के उसूलों में उसे अपने बच्चे से जुदा होने का ग़म सता रहा है.

क्या है मामला..

पाकिस्तान के मीर मोहम्मद की पत्नी माई फातमा का परिवार सिंध सूबे में पालकी डेरकी गांव में रहता है. वह जैसलमेर स्थित अपने ननिहाल मामा के यहां करीब दो माह पहले आई थी. उसके साथ उसका देवर, एक पुत्र अरखाज अली व पुत्री शकीना थी. भारत आने के दौरान फातमा गर्भवती थी. उसने 14 मार्च को जैसलमेर के एक निजी हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म दिया. शनिवार को वह पाकिस्तान के लिए रवाना हुए. इस दौरान मुनाबाव में कस्टम इमिग्रेशन जांच के बाद उसे पाकिस्तान के लिए रवाना कर दिया गया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने पांचवें नवजात शिशु को लेने से इनकार कर दिया. हालांकि महिला के पासपोर्ट में उसके नवजात शिशु का इंद्राज किया गया. लेकिन फोटो प्रिंट नहीं होने से पाक ने लेने से मना कर दिया. काफी जद्दोजहद के बाद निराश होकर इस परिवार ने पाक जाने का कार्यक्रम रद्द कर दिया. अब वे दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में फरियाद करेंगे. लेकिन सोहैल नाम के इस बच्चे फातमा का साफ़ कहना है के वो अपने बच्चे सोहैल के बिन पाकिस्तान कैसे जा सकती है वो हरगिज़ भी इसके बिना पाकिस्तान नहीं जायेगी उसने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि वो इसमें उसकी मदद करे ताकि वो अपने बच्चे के साथ वापस अपने वतन पाकिस्तान जा सके.vlcsnap-2014-04-28-13h50m24s55

आखिर क्या होगा डेढ़ माह के बच्चे का? भारत के नियम में बच्चा भारतीय नहीं..

राष्ट्रीयता कानून के मुताबिक जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्मा व्यक्ति यहां का नागरिक तभी कहलाया जा सकता है जबकि उसके माता-पिता में से एक भारत का नागरिक है. इस बच्चे के मामले में दोनों पाकिस्तानी हैं. हालांकि 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 तक देश में जन्मे सभी लोगों को भारत का नागरिक माना गया.

और पाक इस आधार पर कर सकता है स्वीकार..

यदि किसी देश के माता-पिता अपनी संतान को अन्य किसी देश में जन्म देते हैं तो वे अपने देश के उच्चायोग (कॉन्सुलेट) में जाकर बच्चे की फिजिकल तस्दीक कर सकते हैं. ओरिजिनल बर्थ सर्टिफिकेट, माता-पिता ओरिजिनल मैरिज सर्टिफिकेट व पासपोर्ट दिखाने के बाद पाकिस्तान के अधिकारी बच्चे को अपने देश ले जाने का प्रबंध कर सकते हैं. कुछ देशों में इसके लिए फीस भी चार्ज की जाती है.

अब यह परिवार सीआईडी (बीआई) के कार्यालय में एंट्री करवाने के बाद दिल्ली जाने के लिए अनुमति लेगा. संभवत: आज अनुमति मिलने के बाद यह परिवार दिल्ली के लिए रवाना हो जाएगा, जहां पाक उच्चायोग से पांचवे सदस्य के पाक में प्रवेश की इजाजत लेने की कार्रवाई करेगा. पाक विदेश उच्चायोग के हस्तक्षेप के बाद ही इनका पाक जाना संभव हो पाएगा. हालांकि इनका जैसलमेर में रहने का वीजा का समय अभी बाकी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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