सेना पर नेताओं के बयान सही नहीं, सेना धर्म या जाति से युद्ध नहीं जीतती…

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-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर, पूर्व विदेश मंत्री और निर्दलीय प्रत्याशी जसवंत सिंह की पत्रकार वार्ता गुरूवार को बाड़मेर में आयोजित हुई. वसुंधरा राजे पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि राज्य में आपात काल जैसे हालात की याद आ रही हैं और वसुंधरा डरा धमका कर और परेशान कर सत्ता चला रही हैं. अपने विधायक पुत्र मानवेन्द्र सिंह की जमीन पर सेना के द्वारा कब्जा करने के मामले में जसवंत सिंह ने कहा कि यह राज्य सरकार की शह से किया गया हैं. उन्होंने कहा कि बाड़मेर जैसलमेर के विकास के लिए वे चुनाव मैदान में हैं. वहीँ सपा नेता आज़म खान के कारगिल युद्ध के बयान पर बोलते हुए जसवंत सिंह ने कहा कि किसी एक धर्म जाति या मजहब के सैनिको के युद्ध जिताने का बयान सही नही और उन्हें दुःख हैं कि राजनेता राजनीति के लिए इस तरह से बयान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि सेना पर राजनीति ठीक नही हैं और कारगिल युद्ध में सैनिको के अदम्य साहस को इस तरह से राजनीति में नहीं डालना चाहिए.jaswant singh

जसवंत सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नरेंद्र मोदी बाड़मेर आ रहे हैं लोकतंत्र में अपनी बात कहने का सभी को अधिकार है, उन्होंने कहा की गरमी हैं छाया पानी की व्यवस्था करा ले. जसवंत सिंह ने कहा की उनके पुत्र के निर्माणधीन मकान पर सेना के कब्जे के मामले में मुख्यमंत्री ही सही जवाब दे सकती हैं उन्होंने कहा की मानवेन्द्र सिंह को पार्टी से बाहर करने की साज़िश रची जा रही हैं. उन्होंने वसुंधरा राजे पर आरोप लगाया कि वो मेरे खानदान के पीछे पड़ी हैं.

इस दौरान जसवंत सिंह ने अपना घोषणा पत्र भी जारी किया, घोषणा पत्र में बाड़मेर जैसलमेर जिले के इक्कीस सूत्री कार्यक्रम शामिल किये गए हैं.

इन दिनों जसवंत सिंह का चुनाव प्रचार जोर शोर से चल रहा हैं और स्थानीय लोक कलाकारों ने जसवंत का बखान करते लोक गीत तैयार कर लिए हैं जो क्षेत्र में प्रसिद्ध हो गये हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “सेना पर नेताओं के बयान सही नहीं, सेना धर्म या जाति से युद्ध नहीं जीतती…

  1. आजम खान जैसे घटिया लोगों से तो और क्या अपेक्षा की जा सकती है ये देश को बाँटने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.उनका स्टेटमेंट ऐसा है मनो वे खुद भी उस समय मोर्चे पर लड़ रहे थे जब की सच में कहीं दुबके हुए थे.जसवंत सिंह जैसे पूर्व सैनिक अफसर के द्वारा सेना पर उनकी ज़मीन पर कब्जे का आरोप भी उचित नहीं जब की उनके पुत्र द्वारा क्रय किये जाने से पुरवा ही सन उसे ले चुकी थी.

  2. आजम खान जैसे घटिया लोगों से तो और क्या अपेक्षा की जा सकती है ये देश को बाँटने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.उनका स्टेटमेंट ऐसा है मनो वे खुद भी उस समय मोर्चे पर लड़ रहे थे जब की सच में कहीं दुबके हुए थे.जसवंत सिंह जैसे पूर्व सैनिक अफसर के द्वारा सेना पर उनकी ज़मीन पर कब्जे का आरोप भी उचित नहीं जब की उनके पुत्र द्वारा क्रय किये जाने से पुरवा ही सन उसे ले चुकी थी.

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