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राजस्थान का रण – अपनों की बगावत से परेशान है पार्टियां…

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-रमेश सर्राफ धमोरा||
आगामी लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस व भाजपा में टिकट वितरण के बाद मची बगावत से दोनो ही प्रमुख पार्टियों को परेशानी में डाल दिया है. राजस्थान में सत्तारूढ़ भाजपा की मुख्यमंत्री मिशन पच्चीस के नारे के साथ राज्य की सभी पच्चीस सीट जीतने की व्यूह रचना कर रही थी. वहीं कांग्रेस चाहती है कि 2009 के चुनाव में जीती 20 सीटों में से कम से कम आधी सीटे हर हाल में जीती जायें. मगर दोनो ही पार्टियों में मची बगावत से उन्हे अपना मिशन कामयाब होता नहीं लग रहा है.JASWANT SINGH-1

2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राजस्थान से मात्र चार सीटे झालावाड़, जालोर, बीकानेर व चूरू पर जीत हासिल की थी. पार्टी ने चूरू के अलावा बाकी तीनों सांसदो को पुन: मैदान में उतारा है, वहीं चूरू के मौजूदा सांसद रामसिंह कस्वां के चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ के मध्य दारिया हत्याकांड को लेकर चल रहे मतभेदों के कारण लगातार चार बार सांसद रहे रामसिंह कस्वां के स्थान पर उनके पुत्र राहुल कस्वां को प्रत्याशी बनाया है. पार्टी ने जीती हुयी इन चार सीटों को छोड़ कर गत चुनाव में हारी बाकी सभी 21 सीटों पर नये लोगों को मौका दिया है. गत चुनाव में हारे किसी को भी इस बार पुन: टिकट नहीं दिया गया हैं.

BUTA SINGHकांग्रेस ने इस बार अपने मौजूदा 20 सांसदो में से सात श्री गंगानगर, सीकर, जयपुर ग्रामीण, भरतपुर, करोली-धोलपुर, पाली व बांसवाड़ा का तो टिकट काट दिया व दो सांसदो की सीट बदलकर भीलवाड़ा से डा.सी.पी.जोशी को जयपुर ग्रामीण व टोंक-सवाईमाधोपुर से नमोनारायण मीणा को दौसा से मैदान में उतारा है. इसके अलावा 2009 में पार्टी ने हारी पांच सीटे बीकानेर, चूरू, दौसा, जालोर व झालावाड़ से गत चुनाव में प्रत्याशी रहे लोगों को इस बार टिकट नहीं देकर वहां नये लोगों को प्रत्याशी बनाया गया है. इस तरह से कांग्रेस ने भी 14 सीटों पर नये चेहरों को मौका दिया है.

भाजपा में टिकट वितरण के बाद कई सीटों पर प्रत्याशियों को अपने ही नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. बाडमेर से टिकट नहीं मिलने ने नाराज वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने पार्टी से बगावत कर निर्दलिय ताल ठोक दी है. भाजपा से बाडमेर से जसवंत सिंह के स्थान पर हाल ही में काग्रेस से भाजपा में शामिल हुये कर्नल सोनाराम को प्रत्यासी बनाया गया है. जसवंत सिंह अपने जीवन का अंतिम चुनाव बताकर वोट मांग रहें हैं वहीं मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कर्नल सोनाराम की जीत को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है. राजे हर हाल में सोनाराम को जिताना चाहती है. राजे ने बाडमेर-जैसलमेर के सभी भाजपा विधायको व जिला अध्यक्षों को को पूरी ताकत से सोनाराम के पक्ष में काम करने के निर्देश दिये हैं.MAHADEV KHENDELA

भाजपा को सीकर में अपने पूर्व सांसद सुभाष महरिया की बगावत से जूझना पड़ रहा है. टिकट नहीं मिलने से नाराज महरिया निर्दलिय चुनाव लड़ रहू हैं. महरिया वसुन्धरा राजे के काफी करीबी माने जाते थे मगर 2009 में लोकसभा व 2013 में विधानसभा चुनाव हार जाने से महरिया की स्थिति कमजोर हो गयी थी. इस कारण उनका टिकट कट गया. भाजपा ने यहां से योगगुरू बाबा रामदेव के करीबी स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती को प्रत्याशी बनाया है. महरिया के मैदान में उतरने से भाजपा को मुश्किल हो रही है. सीकर सीट से भाजपा के सभी छ विधायक पार्टी प्रत्याशी सुमेधानन्द स्वामी के पक्ष में लगे हुयें हैं. बीकानेर सीट पर भी मौजूदा सांसद अर्जुनराम मेघवाल का पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी खुलकर विरोध कर रहें हैं. भाटी गत विधानसभा चुनाव में अपनी हार का जिम्मेदार मेघवाल को मानते हैं.

कांग्रेस को जालोर, चूरू, टोंक-सवाईमाधोपुर, सीकर, पाली, श्रीगंगानगर, बांसवाड़ा, करोली-धोलपुर, भरतपुर, जयपुर शहर सीट पर अपनो के ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है. सीकर से पूर्व मंत्री व मौजूदा सांसद महादेवसिंह खण्डेला का टिकट काट कर बिजली विभाग के एक पूर्व इंजिनियर को दे दी गयी जिससे महादेव सिंह का नाराज होना लाजमी माना जा रहा है. कांग्रेस ने जालोर से पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह को इस बार फिर टिकट नहीं दी तो उन्होने भी निर्दलिय ताल ठोक कर कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा दी है. बूटा सिंह का जालोर में खासा प्रभाव हे इसके उपरान्त भी कांग्रेस ने जालोर से 2013 के विधानसभा चुनाव में चित्तोडग़ढ़ पराजित उदयलाल आंजना को प्रत्यासी बनाया है. जिसका स्थानीय कार्यकर्ता उनको बाहरी बता कर विरोध कर रहें है. चूरू से कांग्रेस नेता अभिनेष महर्षि पार्टी से बगावत करके बसपा टिकट से चुनाव मैदान में उतर गये जिससे वहां कांग्रेस टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रताप पूनिया तीसरे स्थान पर जाते दिख रहें हैं.

CHURU MAHARASHI ABHINESHटोंक-सवाईमाधोपुर सीट से क्रिकेटर अजहरूद्दीन को मुस्लिम कोटे से टिकट देने का मुस्लिम समाज के नेताओं में ही गहरा रोष व्याप्त हो रहा है. पूर्व विधायक मकबूल मंडेलिया ने तो जयपुर में बाकायदा प्रेस कांफ्रेस करके अजहरूद्दीन की टिकट का विरोध किया था. टोंक-सवाईमाधोपुर क्षेत्र के स्थानीय कांग्रेसजनो ने भी अजहरूद्दीन से दूरी बना रखी है. श्रीगंगानगर से मौजूदा सांसद भरतराम मेघवाल के स्थान पर चूरू के रहने वाले पूर्व मंत्री भंवरलाल मेघवाल को प्रत्याशी बनाया है. भंवरलाल मेघवाल 2013 में चूरू जिले के सुजानगढ़ से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं. जयपुर शहर सीट से मौजूदा सांसद महेश जोशी का जयपुर के सभी पूर्व विधायक व जयपुर महापौर ज्योति खण्डेलवाल विरोध कर रही हैं.

बांसवाड़ा से मौजूदा सांसद व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ताराचन्द भगोरा का टिकट काट कर विधायक महेन्द्रजीत मालवीय की जिला प्रमुख पत्नी रेशमा मालवीय को टिकट देने से वहां के स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता परिवारवाद का आरोप लगाकर विरोध कर रहें हैं. करोली-धोलपुर सीट से मौजूदा सांसद रामखिलाड़ी बैरवा, जयपुर ग्रामीण से मौजूदा सांसद व केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री लालचन्द कटारिया, भरतपुर सांसद रतनसिंह, पाली सांसद बद्रीराम जाखड़ का टिकट काटा गया है. बाडमेर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे कर्नल सोनाराम के भाजपा में शामिल होकर प्रत्याशी बन कर चुनाव लडऩे से कांग्रेस प्रत्यासी हरीश चौधरी मुकाबले में पिछड़ते नजर आ रहे हैं. कांग्रेस से छठी बार विधायक बने भंवरलाल शर्मा ने पार्टी के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर रखा है मगर पार्टी आज तक उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई है. ऐसे में पार्टी चुनावी मुकाबला किस ताकत के बल पर कर पायेगी. कुल मिलाकर राजस्थान में कांटे की जंग के आसार नजर आ रहे हैं. जिसमें कांग्रेस काफी पिछड़ती हुयी लग रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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