चुनावों में उम्मीदवारों के फोन की टेपिंग ..

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छत्तीसगढ़ में सोनी सोरी से नक्सली सांठ -गाँठ को लेकर सुबूत मिलने का दावा.. बिहार विधानसभा के अध्यक्ष पर नक्सलियों को समर्थन के बदले धन का आफर देने का आरोप..

-आवेश तिवारी||
लोकसभा चुनावों में नक्सली हिंसा की सम्भावनाओं के बीचो-बीच उम्मीदवारों के फोन काल पर खुफिया एजेंसियों द्वारा निगरानी रखने का मामला सामने आया है.एजेंसियां , उम्मीदवारों और नक्सलियों के बीच सांठ-गाँठ को लेकर कई उम्मीदवारों और अलग अलग पार्टियों के बड़े नेताओं के टेलफोन काल्स पर निगरानी रखे हुए हैं. ख़ास तौर से छत्तीसगढ़ ,बिहार और झारखंड में गृह मंत्रालय के आदेश से शुरू की गई इस शुरूआती जांच में एजेंसियों को कई चौंका देने वाली जानकारियां हासिल हुई है. मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि ख़ुफ़िया एजेंसियां हमें लगातार ऐसे उम्मीदवारों को लेकर इनपुट उपलब्ध करा रही है हैं ,वो जल्द ही इस संबंध में चुनाव आयोग को अपनी लिखित शिकायत सौंपेंगे. मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नक्सल )एम ए गणपति बताया है कि अब तक जो जानकारी मिल रही है उससे कहा जा सकता है कि इन राज्यों में कई उम्मीदवारों ने नक्सलियों से संपर्क किया है , नक्सली अपने लाभ हानि के हिसाब से उम्मीदवारों को सहयोग देने न देने की बात कर रहे हैं , एजेंसियां ऐसे उम्मीदवारों की गतिविधियों पर पूरी तरह से निगाह रखे हुए हैं. जानकारी मिली है कि बिहार के जमुई से उम्मीदवार उदय नारायण सिंह द्वारा माओवादियों से मदद लिए जाने को लेकर इंटेलिजेंस एजेंसियों की रिपोर्ट इसी सप्ताह गृह मंत्रालय को भेजी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जनता दल यू के उम्मीदवार और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण सिंह ने हाल ही में एक बड़े नक्सली लीडर के साथ बैठक भी की थी और उन्हें सहयोग के लिए धन का लोभ भी दिया था उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में बस्तर से आप पार्टी की उम्मीदवार सोनी सोढ़ी से नक्सली सांठ गाठ को लेकर हमारी निगाह में हैं.soni sori

उदय नारायण सिंह को लेकर सोमवार को एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट गृह मंत्रालय को प्राप्त हुई है. खुफिया एजेंसियों की माने तो छत्तीसगढ़ के एक बहुचर्चित उम्मीदवार को समर्थन देने न देने को लेकर माओवादी संगठनों में आपसी मतभेद पैदा हो गए हैं , माओवादी संगठनों की सेन्ट्रल कमेटी के एक बड़े नेता ने जहाँ इस एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कराने को लेकर अपनी राय रखी है , वहीँ अन्य कैडर नहीं चाहते कि इस एक उम्मीदवार का समर्थन किया जाए झारखंड में माओवादी संगठनों ने एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने का फरमान जारी करने को लेकर एकराय बन गई है. छत्तीसगढ़ में पूर्व गृह मंत्री विक्रम उसेंडी जिस पर नक्सली सांठ -गाँठ के यदा कदा आरोप लगते रहे हैं को लेकर गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना था कि अभी फिलहाल उनके और नक्सलियों के बीच चुनावों को लेकर किसी भी किस्म के सांठ -गाँठ की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है.

इस बीच चुनावों के दौरान माओवादी गतिविधियों पर निगाह रखने के क्रम में खुफिया एजेंसियों ने छत्तीसगढ़ समेत अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे लगभग 125 संगठनों पर भी निगरानी रखने का काम शुरू कर दिया है जिन पर नक्सलियों से सांठ गाँठ का शक है. गृह मंत्रालय के सचिव स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि हमारी तैयारियां पूरी है लेकिन माओवादियों ने भी चुनावों को प्रभावित करने के लिए हर सम्भव तैयारी कर रखी है , हमने सुरक्षा बलो को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अंतिम तौर पर तैनात कर दिया है , फिलहाल हमारी कोशिश है कि नक्सलियों को बारूदी सुरंग लगाने में सफल नहीं होने दिया जाए इसके अलावा हमारी निगाह विद्यालयों और मोबाइल टावरों पर भी है , जिनको नक्सली निशाना बना सकते हैं. हमारी असली परीक्षा 10 अप्रैल को है. हम किसी भी कीमत पर माओवादियों को सफल नहीं होने देंगे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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