जसवंत सिंह बोले बीजेपी पर नकली लोग काबिज़ हुए..

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पसंद की सीट से टिकट न मिलने से नाराज बीजेपी के सीनियर नेता जसवंत सिंह ने कहा है कि बीजेपी पर नकली लोगों को कब्जा हो गया है. शनिवार को उन्होंने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि बाड़मेर सीट पर वह कोई समझौता नहीं करेंगे. जसवंत सिंह ने फिलहाल सारे विकल्प खुले रखे हैं, जिसमें नर्दलीय चुनाव लड़ने की बात भी शामिल है.jaswant

जसवंत सिंह रविवार को बाड़मेर पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं बाड़मेर पहुंचकर अपने समर्थकों से बात करूंगा और उसके बाद ही कोई फैसला लूंगा.’ उन्होंने कहा, ‘पार्टी मेरे साथ दो बार ऐसा कर चुकी है और अब कोई अन्य प्रस्ताव स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता.’ बीजेपी ने बाड़मेर से कर्नल सोनराम चौधरी को टिकट दिया है. कर्नल चौधरी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद बताए जाते हैं.

जसवंत सिंह ने बिना किसी का नाम लिए बीजेपी के नेतृत्व पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘यह बहुत त्रासद है कि आदर्शों वाली पार्टी पर ऐसे लोग काबिज होते जा रहे हैं जो बीजेपी के आदर्शों के घोर आलोचक रहे हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे तत्वों ने बीजेपी को हथिया लिया है जो पार्टी के आदर्शों का कतई सम्मान नहीं करते.’

जसवंत सिंह ने कहा कि बीजेपी अब दो हिस्सों में बंट चुकी है. उनके मुताबिक, ‘एक हिस्सा असली लोगों का है और दूसरा नकली. और दुर्भाग्य से इस वक्त पार्टी पर नकली लोगों का कब्जा है.’

जसवंत सिंह ने कहीं साफ नहीं किया है कि वे नकली लोग कौन हैं जिन्होंने बीजेपी पर कब्जा कर लिया है, लेकिन उनका इशारा नरेंद्र मोदी और उनके पसंदीदा नेताओं की तरफ है. नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाए जाने से नाखुश लालकृष्ण आडवाणी भी लगभग ऐसा ही मानते हैं. जब 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, तब आडवाणी ने बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को एक चिट्ठी लिखी थी. उस चिट्ठी में आडवाणी ने वैसी ही बातें कही थीं, जो जसवंत अब कह रहे हैं.

आडवाणी ने लिखा था, ‘ मुझे नहीं लगता कि यह वही आदर्शवादी पार्टी है जिसे डॉक्टर मुखर्जी, पंडित दीनदयाल जी और वाजपेयी जी ने बनाया और जिस पार्टी का एकमात्र मकसद राष्ट्र और राष्ट्र के लोग थे.’

इस चिट्ठी को आडवाणी ने अपना इस्तीफा बताते हुए लिखा था, ‘आज हमारे ज्यादातर नेता अब सिर्फ अपने निजी हितों को लेकर चिंतित हैं. इसलिए मैंने पार्टी के तीन अहम पदों राष्ट्रीय कार्यकारिणी, संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति से इस्तीफा देने का फैसला किया है. इस पत्र को मेरा इस्तीफा माना जाए.’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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