जसवंत सिंह का टिकट कटा, उमा भारती भी नाराज़…

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भारतीय जनता पार्टी में नरेंद्र मोदी कैंप को एक और झटका लगा है. लालकृष्ण आडवाणी के बाद अब उमा भारती और जसवंत सिंह के पार्टी से नाराज होने की खबरें आ रही हैं. उमा भारती और जसवंत सिंह टिकट बंटवारे को लेकर नाराज हैं.jaswant singh

umaऐसी खबरें हैं कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भोपाल से चुनाव लड़ना चाहती हैं. पार्टी ने उन्हें झांसी से टिकट दिया है. हालांकि उमा भारती ने इस खबर का खंडन किया है कि उन्होंने भोपाल से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को चिट्ठी लिखी है. उधर जसवंत सिंह भी नाराज हैं क्योंकि उन्हें टिकट नहीं मिला है. वह राजस्थान की बाड़मेर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला है. बीजेपी ने बाड़मेर से कर्नल सोनराम को टिकट दिया है, जो राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पसंद हैं.

बीजेपी में नरेंद्र मोदी गुट से अलग माने जाने वाले नेता कई बार अपनी नाराजगी जता चुके हैं. पहले सुषमा स्वराज ने रेड्डी ब्रदर्स को पार्टी में वापस लेने को लेकर आपत्ति जताई थी. उन्होंने ट्विटर पर लिखा था कि उनकी आपत्ति के बावजूद पार्टी ने रेड्डी ब्रदर्स को वापस बुलाया.

यूं भी बीजेपी में टिकट बंटवारे के बाद से लगातार घमासान जारी है. कई बड़े नेताओं के टिकटों पर विवाद हो रहा है. शुक्रवार को पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो उन्हें काले झंडे दिखाए गए. हरियाणा की सोनीपत, चंडीगढ़ और यूपी की गाजियाबाद सीट पर भी उम्मीदवारों को पार्टी समर्थकों का विरोध झेलना पड़ रहा है. सोनीपत से पूर्व सांसद किशन सिंह सांगवान के बेटे प्रदीप सांगवान टिकट न मिलने से नाराज हैं, तो चंडीगढ़ और गाजियाबाद में पार्टी वर्कर्स बाहरी उम्मीदवारों को टिकट देने का विरोध कर रहे हैं. चंडीगढ़ से ऐक्ट्रेस किरण खेर और गाजियाबाद से पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह को टिकट मिला है.

बिहार में भी कई सीटों पर बाहरी लोगों को टिकट मिलने से पार्टी में असंतोष है.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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