अब महिला श्रमिकों को भी मिलेंगे हमाल लाइसेंस…

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-श्वेता त्रिपाठी||

अब तक पुरूष व्यापारियों, हमालों, तोलने या मापने वालों को ही लाइसेंस दिए जा रहे थे। महिला श्रमिकों को लाइसेंस देने की दिशा में कभी काम ही नहीं किया गया। लाइसेंस नहीं होने से महिला हमाल श्रमिकों को मंडी में कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ता था। लेकिन एक लंबी कोशिश के बाद आज 25 महिला हमाल श्रमिकों को भी लाइसेंस मिल पाया है। जयपुर की मुहाना मंडी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब महिला हमाल श्रमिकों को भी लाइसेंस जारी किए गए हैं।hamal

मुहाना मंडी जयपुर में मुहाना रोड स्थित ज्योतिराव फुले कृषि उपज मंडी (फल व सब्जी) राजस्थान की सबसे बड़ी फल व सब्जी मंडी है। इस मंडी को मुहाना में स्थापित हुए लगभग 6 साल हो चुके हैं। इससे पहले यह मंडी लालकोठी में हुआ करती थी। मंडी के भरोसे रोजगार चलाने वाले श्रमिकों ने मंडी का साथ नहीं छोड़ा और लालकोठी से मुहाना तक का सफर तय किया। इस मंडी पर हजारों परिवारों की आजीविका टिकी हुई है। जयपुर की चारों दिशाओं से हजारों की संख्या में महिला श्रमिक भी इस मंडी में आकर हमाली, तुलाई तथा फल व सब्जी बेचने का काम करती हैं। हमाली का काम बहुत ही जोखिम भरा काम है। मंडी यार्ड में कई महिलाओं के साथ दुर्घटनाएं घटीं परंतु उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला क्योंकि उनके पास मंडी में अपने काम की पहचान का कोई सबूत नहीं था। जबकि हमाली का काम करने वाले सभी श्रमिकों को राजीव गांधी कृषक साथी सहायता योजना-2009 के अंतर्गत दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा मिलना चाहिए।

राजस्थान कृषि उपज मंडी नियम 1963 के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंडी समिति के लाइसेंस लिए लिए बिना हमाली, दलाल, तोलने या मापने वाले, सर्वेक्षण करने वाले, भंडारीकरण करने वाले के रूप में या अन्य किसी तरीके से कारोबार नहीं कर सकता है। यदि कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस मंडी यार्ड में काम करता है तो मंडी समिति को यह अधिकार है कि वह उस व्यक्ति को मंडी क्षेत्र में काम करने की स्वीकृति ना दे। इन सब नियमों के बावजूद मंडी क्षेत्र में काम करने वाले ज्यादातर श्रमिकों के पास मंडी समिति के लाइसेंस नहीं हैं। व्यापारियों के अलावा अन्य काम करने वाले कुछ ही श्रमिक लाइसेंसधारी हैं। मंडी क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों को लाइसेंस देने हेतु मंडी समिति द्वारा भी कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। लोगों को लाइसेंस के फायदे व प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी तक नहीं है।

श्रमिक सहायता एवं संदर्भ केंद्र जयपुर द्वारा महिला श्रमिकों व उनके मुद्दों पर काम किया जा रहा है। केंद्र द्वारा मुहाना मंडी में खुली मजदूरी कर रही महिला श्रमिकों को संगठित कर उनकी समस्याओं के समाधान के प्रयास जारी हैं। मुहाना मंडी में सैंकड़ों की संख्या में महिलाएं बोझा ढोने का काम करती हैं। एक भी महिला के पास मंडी समिति द्वारा मंडी क्षेत्र में काम करने की स्वीकृति का लाइसेंस नहीं है। यह सभी महिलाएं लालकोठी मंडी से यही बोझा ढोने का काम करती आ रही हैं। केंद्र द्वारा महिलाओं से तथा व्यापारियों से इस विषय पर चर्चा की गई। कुछ व्यापारियों व महिलाओं ने बताया कि उनके हमाली लाइसेंस बनवाने हेतु पूर्व में लालकोठी मंडी में भी कई बार प्रयास किए गए। तथा लिखित में भी महिला श्रमिकों के हमाली लाइसेंस बनवाने की मांग की गई परंतु उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। केंद्र द्वारा मंडी समिति में जाकर इस महिला श्रमिकों की समस्याओं तथा दुर्घटना के कुछ केस जिनमें कि बोझा ढोने के दौरान महिला श्रमिकों की मृत्यु हो गई थी, उनको मंडी समिति के सचिव, अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों के सामने रखा गया। इन महिला हमाल श्रमिकों के स्थाई लाइसेंस बनाने की मांग की। मंडी समिति द्वारा लाइसेंस बनाने की स्वीकृति तो मिल गई परंतु लाइसेंस प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती मंडी के किसी लाइसेंसधारी व्यापारी की लिखित सिफारिश लानी थी। कोई व्यापारी लिखित में सिफारिश देने को तैयार नहीं था। केंद्र द्वारा कुछ व्यापारियों से इस बात पर चर्चा कर उन्हें सिफारिश देने को तैयार किया गया। अक्टूबर 2013 में केंद्र द्वारा 25 महिला हमाल श्रमिकों के लाइसेंस आवेदन पूर्ण कर मंडी समिति में जमा करवाए गए। मंडी समिति की बैठक मे इन 25 आवेदनों के लाइसेंस के प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया गया। फरवरी 2014 के अंत में समिति द्वारा लाइसेंस बनाकर दे दिए गए हैं।
लाइसेंस हेतु निम्न शर्तों का पूरा करना जरूरी है :

लाइसेंस शुल्क – 20 रुपए
स्वयं का शपथ पत्र
2 पासपोर्ट साइज फोटो
पते व फोटो की पहचान के दस्तावेज की प्रतिलिपि
किसी लाइसेंसधारी व्यापारी की लिखित सिफारिश
मंडी समिति द्वारा अब तक सिर्फ 451 के लगभग ही हमाल, तोलने या मापने वाले, सर्वेक्षण करने वाले, भंडारीकरण करने वालों के लाइसेंस समिति द्वारा बनाए गए हैं। मंडी समिति को लाइसेंस बनाने हेतु समय-समय पर कैंपों का आयोजन करना चाहिए। लाइसेंसधारियों के वेलफेयर के लिए सरकार के साथ मिलकर कुछ योजनाएं बनानी चाहिए।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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