आडवाणी बोले भाजपा अब वन मैन पार्टी…

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बीजेपी `वन मैन शो` बन कर रह गई है. इस तथ्य से सिर्फ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ही नहीं बल्कि बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी भी सहमत हैं. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की एक सभा में लालकृष्ण आडवाणी ने सीनियर नेताओं से कहा है कि पार्टी अब `वन मैन पार्टी` की दिशा में बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस आरोप से सहमत हैं कि पार्टी में एक नेता का प्रभुत्व है.LK_Advani

इस बैठक में मोदी, राजनाथ सिंह और आडवाणी के साथ पार्टी के चुनिंदा सीनियर नेता मौजूद थे. उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करने को लेकर प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा हो रही थी और मोदी, आडवाणी की बगल में बैठे थे. तभी आडवाणी ने यह कहकर सबको चौंका दिया जो पार्टी के नेताओं के लिए असहज स्थिति हो गई.

गौर हो कि कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी बीजेपी को हमेशा वन मैन पार्टी कहते हैं. वन मैन पार्टी के तहत निशाना बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को बनाया जाता है और सियासी हलको में आलोचना यह होती है कि पार्टी सिर्फ मोदी पर ही केंद्रित होकर रह गई है.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “आडवाणी बोले भाजपा अब वन मैन पार्टी…

  1. आडवाणी का कहना कुछ हद तक सही भी है, पर उन्हें यह भी गौर करना चाहिए कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है.इसके उत्तर में अंगुली उन पर भी उठती है.जब उच्च नेता पद पर कुंडली मार कर बैठ जाते हैं,कार्यकर्ताओं की द्वीतीय पंक्ति को आगे बढ़ने का मौका नहीं देते,तो एक मौका ऐसा आता है कि सही नेतृत्व उभर कर नही आ पाता, और जैसे ही मौका मिलता है,ऐसे हालात पैदा होते हैं.
    जहाँ तक राहुल के कथन का सवाल है,तो उनकी पार्टी भी वन मैन शो ही है और आज ही नहीं बहुत लम्बे अरसे से है.यहाँ तो कार्य कर्ता की कोई सुनवाई है ही नहीं.
    यह भारतीय लोकतंत्र की कमजोर कड़ी ही है कि आम आदमी का कोई महत्व ही नही.जो एक व्यक्ति राजनीति में आ गया जैम गाया तो वह परिवार ही अपनी बिसात बैठाता रहता है, और राजनीति उनका खानदानी पेशा बन जाती है.यहाँ तक आप जैसी पार्टी जो आम आदमी का प्रतिनिधि होने का दावा करती है वहाँ भी लगभग ये ही हाल है. कमोबेश यही हाल क्षेत्रीय दलों का है चाहे द्रमुक, हो या अन्ना द्रमुक,स पा हो ब स पा , लालू का रा ज दल हो या पंवार की एन सी पी.ये सभी जेबी पार्टियां है और जनता के लिए संकट ही है कि जाये तो जाये कहाँ सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं.और भाई बंद हैं..

  2. आडवाणी का कहना कुछ हद तक सही भी है, पर उन्हें यह भी गौर करना चाहिए कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है.इसके उत्तर में अंगुली उन पर भी उठती है.जब उच्च नेता पद पर कुंडली मार कर बैठ जाते हैं,कार्यकर्ताओं की द्वीतीय पंक्ति को आगे बढ़ने का मौका नहीं देते,तो एक मौका ऐसा आता है कि सही नेतृत्व उभर कर नही आ पाता, और जैसे ही मौका मिलता है,ऐसे हालात पैदा होते हैं.
    जहाँ तक राहुल के कथन का सवाल है,तो उनकी पार्टी भी वन मैन शो ही है और आज ही नहीं बहुत लम्बे अरसे से है.यहाँ तो कार्य कर्ता की कोई सुनवाई है ही नहीं.
    यह भारतीय लोकतंत्र की कमजोर कड़ी ही है कि आम आदमी का कोई महत्व ही नही.जो एक व्यक्ति राजनीति में आ गया जैम गाया तो वह परिवार ही अपनी बिसात बैठाता रहता है, और राजनीति उनका खानदानी पेशा बन जाती है.यहाँ तक आप जैसी पार्टी जो आम आदमी का प्रतिनिधि होने का दावा करती है वहाँ भी लगभग ये ही हाल है. कमोबेश यही हाल क्षेत्रीय दलों का है चाहे द्रमुक, हो या अन्ना द्रमुक,स पा हो ब स पा , लालू का रा ज दल हो या पंवार की एन सी पी.ये सभी जेबी पार्टियां है और जनता के लिए संकट ही है कि जाये तो जाये कहाँ सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं.और भाई बंद हैं..

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