सहारा हुआ बेसहारा, सुब्रत राय के गिरफ्तारी वारंट जारी..

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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा के ख़िलाफ ग़ैरज़मानती वॉरंट जारी किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कोर्ट ने ये ग़ैरज़मानती वॉरंट सुब्रत रॉय के अदालत में पेश न होने पर जारी किया है. 140220153022_supreme_court_summons_subrata_roy__624x351_afp
कोर्ट ने सुब्रत रॉय के अदालत में पेश न होने पर कहा कि इस अदालत के हाथ बहुत लंबे हैं. कोर्ट ने आदेश दिया है कि सुब्रत रॉय 4 मार्च को अदालत में पेश हों.

हालांकि सहारा समूह के तीन डायरेक्टर अदालत में पेश हुए.

सहारा समूह ने एक बयान जारी कर कहा है कि सुब्रत रॉय अदालत में पेश होने के लिए दिल्ली आए थे लेकिन 24 फ़रवरी की शाम को उन्हें उनकी मां की तबीयत को लेकर डॉक्टरों का संदेश मिला और उन्हें वापस लखनऊ जाना पड़ा.

सहारा समूह के बयान में कहा गया है कि सुब्रत रॉय की मां की तबीयत बहुत नाज़ुक है और उन्हें अपनी मां के पास रहने की ज़रूरत है.

क्या है मामला?

यह मामला निवेशकों को उनके 20 हजार करोड़ रूपए नहीं लौटाए जाने से संबंधित है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में सेबी को निवेशकों के पैसों की वसूली के लिए कंपनी की संपत्ति की बिक्री करने की इजाज़त दी थी.

केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की खंडपीठ ने सेबी को पिछली सुनवाई में यह निर्देश दिया था कि वह निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए की उगाही के लिए सहारा ग्रुप की संपत्ति को बेच दे.

सहारा समूह पर निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपए बकाया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त , 2012 में दिए गए अपने फैसले में सेबी को पैसों की वसूली के लिए सहारा कंपनी की संपत्ति की कुर्की करने का आदेश दिया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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