लाइव ड्रामा: किसी के साथ उच्च नीच हो जाए तो बनारस की ठंढई पीके भुला दीजिए..

admin
0 0
Read Time:5 Minute, 30 Second

 

-सुभाष गौतम||

लाइव ड्रामा- विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान नई दिल्ली, का पांचवा दिन, दिनांक 19 फरवरी दिन बुधवार. पुस्तक मेला के हाता नं 18 में अभी घुसबे किये थे कि दुरे से देखा कोई बुढा पहलवान दुगो नन्हा पहलवान अगले बगले लिए राजकम में दंगल के लिए जारहे थे. जो जानेमाने पहलवान थे पर कभी मुकाबला नहीं करते और अगर इनसे कोई मुकाबला किया तो समझो जीवन भर दंगल का लायक नहीं रहा. दुआ सलाम हुआ, अब नन्हा पहलवानों में एक सिकिया पहलवान जुड़ गया. बाबा भोरे भोरे रेल से पहुचे और नाहा-धो के पनपियाव करने के तुरत बाद चल पड़े थे. आज वो दूल्हा भी थे और समधी भी-“दुनिया को अपने…रखकर मस्ती में रहना…दुनिया और हम बजाए हरमुनिया” लेकिन आज मुरलिया वाले बाबा की इन्होने पिपिहरी बजादी वैसे तो इसकी चर्चा बहुते जगह हो गई है. सुने में आया की यह पुस्तक मा मुरलिया वाले बाबा की क्या इजरी पिजरी कर दिए हैं. भेदिया-धसान वाले भक्तों को पढना चाहिए. लोग कहते है हीरा कही भी रहे चमकता ही है. निपटान को पूरब टोला के तरफ गया तो देखा की डायमंड पब्लिसिंग की गुमटी थी शौचालय के बगल में जो चमक नहीं भभक रही थी.World-Book-Fair-2014

पुरे पुस्तक मेले में “नमो मन्त्र” से लेकर नमो मूत्र औषधि तक बिक रहा है. आशाराम जेल में मॉल उसका सेल में धका-धक् चल रहा है. पुरुषों, स्त्रियों, युवा और युवतियों को सफ़ेद पोशाक पहनाकर काले कारनामे कराए जा रहे है. इसी प्रकार हिन्दयुग्म प्रकाशन के गुमटी में किसी सन्यासी ने जबरजती “नमो मन्त्र” औषधि की चार शीशी रखवा दिया है. इस शीशी को शैलेश जी जब जब देखते थे भनभना उठते थे. आज मनो हुंकार एवं फुफकार लेखक सम्मलेन भी हो रहा था जिसमे कोई पोहटर बेनर नहीं था. जिन जिन को लेखक बनना था वो उस गुप्त रैली में बैठे थे. प्रथम लेखक नमो परियोजना 20 लाख की है जो “नमों और नरसंहार देश हित में” लिखी जानी है. ऊपर से एक लाख पुस्तक की खरीद-फ़रोख्त रायल्टी अलग से हैं. जैसे लेखक कोना-अतरा में फुफकार शुरु हुआ कुछ वामपंथी लमपंथी करने लगे. कुछ प्रगतिशील लेखकों को पता ही नहीं था की यह फुफकार लेखक सम्मलेन है, जिसमें किसी नमों मन्त्र-जंत्र कथा कहानी उपियास की चर्चा है जिसका खर्चा कर्ता-धर्ता कक्ष और भक्ष है. फिर प्रगतिशील लेखकगण फुफकार सुन कर धीरे धीरे ऐसे घिसकने लगे जैसे गाँव में आटा-पिसान देने के डर से लोग मदारी देखने के बाद घर में घुस जाते है. लेकिन एक हमरे भाई साहब थे उनको तो जंतर बांध दिया.

पुस्तक मेला का सबसे महत्वपूर्ण स्थान मीडिया स्टडीज ग्रुप, जहा जन मिडिया पत्रिका मितली है वहा जो पहुचता जड़ जमा लेता क्यों कि अनिल दा जब आते है एक खाची पकोड़ा-पकोड़ी, इस्कुट-बिस्कुट और रोटी में लगा के खाने वाला जाम-शाम लाते है. वहा चाय भी भेटा जाता है फुल प्रूप जनता दरबार है. वहा आप मिडिया की कारगुजारी से लेकर कारखाना पर बहस-मुबाहिसे कर सकित हैं. अन्य किसी गुमटी में तो पानी और बिस्कुट भी नहीं भेटता है. शाम को दिल्ली के हसीन कवि प्रो अशोक चकचक जो कुछ समय पहले भचकत रहें. क्यों की साईकिल का स्वाद लेने सुबह सुबह निकले थे कि किसी कार वाले ने थोकरिया दिया था. मेला के समय स्वस्थ होके आज लाफिंग कवि कलीनिक का अकेले मजमा लगाए रहें साँझा तक. इस कवि ने अपना एक गुप्त राज भी बताया कि फेसबुक पर कसी महिला/पुरुष ने मुझे बेटा कहा और मुझे आती प्रसन्नता हुई. कृपया जनता से आग्रह हैं कि आप कविता पढ़ते समय न कहे वर्ना बच्चा स्कुल जाने लगे गा. इस हसीन कवि की कल्पना क्या तारीफ करू कल्पना इंहोने कुकुर पर इतनी जबरजत कविता सुनाई की श्रोता कविता नामक हड्डी देख जाने का नाम ही नहीं ले रही थी संजोग की जरनेटर बताना पड़ा.

नोट- अगर किसी के साथ उच्च नीच हो जाए तो बनारस की ठंढई पीके भुला दीजिए. अइंचा-पइचा, इजरी -पिजरी का महिना है…

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

लाइव ड्रामा: जब कबर ही खोदना था तो इतना तारीफ में टीला काहे खड़ा किए..

-सुभाष गौतम|| लाइव ड्रामा- विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान नई दिल्ली, का छठा दिन, दिनांक 20 फरवरी दिन बृहस्पतिवार. पुस्तक मेला के हाता नं 18 में अथर कार्नर पर राजकाल प्रकाश से प्रकाशित पुस्तक “तिनका तिनका तिहाड़” का लोकार्पण और परिचर्चा शुरू ही हुआ था कि किसी उजबक ने कान […]
Facebook
%d bloggers like this: