नमो खुद की बात को खुद ही काट रहे हैं ट्विटर पर..

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नरेन्द्र मोदी अपनी खुद के कहे गए वाक्यों को किस तरह काट देते हैं इसकी बानगी मिलती है उनके ट्विटर एकाउंट पर. नरेन्द्र मोदी खुदको भारत का प्रधानमंत्री बनाने के लिए चल रहे अभियान में सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग कर रहे हैं और उन्होंने खुद को ट्विटर पर पूरी तरह सक्रिय कर रखा है. यदि आप नेरन्द्र मोदी द्वारा की जा रही ट्विटस को गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि उनकी अधिकांश ट्विट अपनी ही बात को काटती मिलेगी.

नरेंद्र मोदी की ट्विटस पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें.
नरेंद्र मोदी की ट्विटस पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें.

आज ही शाम चार बजकर सैंतालिस मिनट पर उन्होंने बांग्लादेशियों की घुसपैठ को लेकर दो ट्विट की. पहली ट्विट में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि “सिर्फ अकेले असम ही नहीं बल्कि सभी राज्यों में बांग्लादेश से आने वाले हिंदुओं को समायोजित करने और उन्हें गरिमा के साथ जीवन की पेशकश करनी चाहिए.”

इसीके तुरंत बाद उनकी नई ट्विट आई और उसमें नरेन्द्र मोदी का कहना था कि “जो लोग दूसरों की वोट बैंक की राजनीति एजेंडे को आगे करने के लिए आए हैं, ऐसे घुसपैठियों के लिए हमारे यहाँ कोई जगह नहीं है. इन्हें वापस भेजा जाना चाहिए”

बांग्लादेशियों के एक ही मुद्दे पर दो विरोधाभासी बयान देकर नरेन्द्र मोदी क्या कहना चाह रहे हैं, इसे सिर्फ नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम ही समझ सकती है.

यह रहे मोदी की इन दोनों ट्विटस के लिंक:

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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