पेड न्यूज़ पर निर्वाचन आयोग सख्त…

admin
Read Time:4 Minute, 44 Second

लोकसभा चुनाव के दौरान मीडिया में पेड न्यूज को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाने का निश्चय किया है. आयोग पेड न्यूज़ को लेकर काफी गंभीर है. इस पर अंकुश लगाने के लिए आयोग ने अभी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. इसी कवायद में राजधानी लखनऊ के योजना भवन में पत्रकारों के साथ हुई कार्यशाला में हर मुद्दे पर चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राऊत ने विस्तार से चर्चा की.ec1

चुनाव आयोग द्वारा आगामी आम चुनावों के दौरान पेड न्यूज पर निगरानी के लिए जिला से राष्ट्रीय स्तर तक निगरानी समितियां बनाई जा रही हैं. इस बार के चुनावों में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया भी पेड न्यूज के सिलसिले में चुनाव आयोग की निगरानी में होगा.

चुनाव आयोग के महानिदेशक अक्षय राऊत ने बताया कि आयोग कुछ भी नया नहीं कर रहा है केवल प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस को ही लागू करने की कोशिश कर रहा है, जिससे मतदाताओं को गलत संदेश न दिया जा सके. चुनाव के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर आयोग इस कदर गंभीर है कि वह पीसीआई से भी इस बारे में डिस्कस करने के बाद ही यह कदम उठा रहा है. नेताओं के समाचार पत्रों या मीडिया संगठनों पर भी आयोग की निगरानी रखेगा.

पेड न्यूज़ को रोकने को लेकर धारा 127 ए के तहत आयोग अब किसी भी ऐसे पोस्टर या पर्चा छपवाने पर कार्रवाई करेगा जिसमें पोस्टर छपवाने वाले का नाम या पूरा विवरण न हो. आयोग का मानना है कि ऐसा चुनाव में किसी भी ख़बर को लेकर गलत संदेश न जाए इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

इतना ही नहीं चुनाव से पहले हर मीडिया संस्थान और पत्रकारों को अब आयोग मीडिया हैंडबुक देने की योजना भी तैयार कर रहा है जिसमें चुनाव कवरेज की पूरी जानकारी होगी. चुनाव आयोग की मानें तो सोशल मीडिया पर भी आयोग नजर रखेगा और कार्रवाई भी करेगा, लेकिन हकीकत में यह आयोग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है.
चुनाव आयोग का मानना है कि चुनाव से 48 घंटे पहले ऐसी ख़बरों पर लगाम लगना ही चाहिए जिससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा रहा हो. यही वजह है कि चुनाव 48 घंटे के दौरान वह जीत रहे हैं, वह आगे चल रहे हैं और वह हार रहे हैं जैसी ख़बरें सेक्शन 126 बी आरपी एक्ट के तहत आएंगी और उसपर कार्रवाई होगी. हालांकि आयोग का यह भी कहना है कि पेड न्यूज़ की परिभाषा को हमें समझना होगा. आयोग ऐसी ख़बरों पर लोकसभा उम्मीदवारों पर ही कार्रवाई करेगा न की पार्टी पर. आयोग की मानें तो पेड न्यूज़ का एंगल कैंडिडेट ही होता है लिहाजा उसी पर कार्रवाई होनी भी चाहिए.

चुनाव आयोग पेड न्यूज़ को रोकने की मुहिम भी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइडलाइन्स के अनुसार ही चला रहा है. लिहाजा इसका पालन भी मीडिया संस्थानों को करना ही होगा, लेकिन पेड न्यूज़ के दायरे में कौन सी ख़बर आती है और उसपर कार्रवाई में कितना समय लगता है यह सबसे बड़ी चुनौती है. आयोग पेड न्यूज़ रोकने की मुहिम तो हकीकत में चला रहा है, लेकिन उसके पास इससे निपटने का कोई कारगर हथियार अभी नहीं है. वह केवल उम्मीदवार से विज्ञापन के हिसाब से शुल्क वसूल सकता है कोई कारगर कार्रवाई नहीं कर सकता.

0 0

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

धर्म कोई अस्मिता नहीं है...

-शंभूनाथ शुक्ल|| पत्रकारिता के संस्मरण (पार्ट आठ) धार्मिक आधार पर कोई राष्ट्र नहीं बना करते और बनेंगे तो स्थायी नहीं रह सकते. इसीलिए पाकिस्तान के विपरीत भारत को हमारे नेताओं ने एक सेकुलर, उदार और हर गरीब-अमीर को साथ लेकर चलने वाला लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया. इसके संविधान में धार्मिक आधार […]
Facebook
%d bloggers like this: