सुरीले लोगों का समागम

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-राजेंद्र बोड़ा||

भारतीय सिनेमा और हिंदुस्तानी फिल्म संगीत के अध्येता अनिल भार्गव और उनके परिवार ने आज ‘सुर संगत’ की मेजबानी की. आज के समागम में संगीत के वयोवृद्ध रसिक बलदेव सिंह कछवाहा विशेष तौर से मौजूद थे.sur sangat

भारतीय सिनेमा इतिहास के विशेषज्ञ एम डी सोनी, सिने संगीत और सिने पत्रिकाओं के संग्रहकर्ता अरुण अग्रवाल, सिने संगीत की रेकार्डों के संग्रहकर्ता इनाम उल हक़, हिंदुस्तानी फिल्मों के संग्रहकर्ता अब्दुल अज़ीज़, पुस्तक प्रकाशक राजेश अग्रवाल, डाक टिकटों, सिक्कों और नोटों के संग्रहकर्ता आलोक वर्मा, इलेक्ट्रोनिक विशेषज्ञ पी सी टाक, लेखक नवल किशोर शर्मा, फिल्मी गानों के संग्रहकर्ता पी डी माथुर, डिजिटल सिनेमा और संगीत के बाज़ार के विशेषज्ञ अनिल गुप्ता तथा राजेश सिन्हा भी संगत में शामिल थे.

हिन्दी सिनेमा के सौ साल के इतिहास को याद करती छवियों के प्रदर्शन के अलावा इतिहास का हिस्सा बन रहे सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉलों पर नयनतारा कोटियां की डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘वन शो लेस’ का भी इस अवसर पर प्रदर्शन किया गया.

अगले माह नौ मार्च को ‘सुर संगत’ की मेजबानी राजेश अग्रवाल करेंगे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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