छत्तीसगढ़ पुलिस ने इन दोनों आदिवासियों के निजी अंगों में मिर्च भर दी..

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छत्तीस गढ़ पुलिस ने एक पढ़ी लिखी आदिवासी महिला सोनी सोरी को महज़ इसलिए नक्सली घोषित कर दिया क्योंकि वह आदिवासियों को पढ़ा रही थी और उन्हें जागृत कर रही थी. सोनी सोरी के अनुसार छत्तीसगढ़ पुलिस ने उसे न केवल नग्न किया बल्कि उसके साथ दुराचार करने की भी कोशिश की. यही नहीं छत्तीसगढ़ पुलिस ने सोनी सोरी के यौनांगों में मिर्च भर दी, जब इससे भी पुलिस का मन नहीं भरा तो उसके जननांग में पत्थर भर दिए.20140208_153935

आज दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उसने अपनी आप बीती पत्रकारों को बताई तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए.

इसी तरह कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए पढ़े लिखे आदिवासी पत्रकार लिंगा कोड़ोपी को भी छत्तीस गढ़ पुलिस ने महज़ इसलिए नक्सलवादी घोषित कर गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उसने आदिवासियों के गाँव पर हुए एक अत्याचार का वीडियो यूट्यूब पर अपलोडकर दिया था. लिंगा के अनुसार छत्तीसगढ़ पुलिस ने उसकी गुदा में मिर्च लगा डंडा घुसा दिया. उसके बाद लम्बे समय तक जेल में उसकी गुदा से रक्त बहता रहा.

आप खुद सुनिए सोनी और लिंगा पर हुए अत्याचार की कहानी खुद उन दोनों की ज़ुबानी..

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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