आजतक के सुप्रिया प्रसाद की अनैतिक मेहरबानी…

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दुनिया में ऐसा चमत्कार , परोपकार, अहसान, और दरियादिली सिर्फ आज तक ही दिखा सकता है. अपने दसवी कक्षा फेल बैतूल के पत्रकार को मध्यप्रदेश शासन की जिला स्तरीय अधिमान्यता के लिए सहमति पत्र देता है और वह आजतक के नाम पर जी न्यूज , जी मीडिया, पी सेवन जैसे दर्जनो न्यूज चैनलो को एक जैसी प्रायोजित स्टोरी भेजता है.

इस देश में आजतक अपने यहां पर पत्रकारो को प्रशिक्षण देता है उसकी स्वंय की अकादमी और प्रशिक्षण संस्थान है. देश भर में सैकडो पत्रकारिता के महाविद्यालय एम जे और बीजे की डिग्री दे रहे है लेकिन आजतक दसवी फेल व्यक्ति को अपने चैनल का रिर्पोटर बना कर संदेश क्या देना चाहता है यह समझ से परे की बात है.

आज भी राजेश भाटिया बैतूल से उसके नाम की फेसबुक पर उन खबरो का अपलोड कर रहे है जो उसके नाम से जी मीडिया में चल रही है उसके बाद भी अपने ही चैनल का रिर्पोटर बता का उसे अधिमान्यता भी दे रहा है. आखिर पढ लिख कर पत्रकार बनने या न्यूज चैनल से जुडने का क्या मतलब रहा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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