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और फिर कलम ने चलवा दी गोलियां…. भरतपुर लुटा नहीं लेकिन हो गया बंद

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राजस्थान में भरतपुर के राजघराने पर लिखी गई किताब को लेकर इन दिनों बवाल मचा हुआ है। पूर्व राज परिवार के ही दो गुटों में हुए विवाद के बाद भरतपुर जिले का माहौल बिगड़ गया है और तनाव बरकरार है। शुक्रवार को शहर के कई इलाके बंद रहे। तनाव के हालात को देखते हुए प्रशासन ने अगले 15 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लगा दी है। जिले के संवेदनशील इलाकों में पुलिस तैनात किये जाने के साथ ही दोनों पक्षों में समझौता कराने के प्रयास किये जा रहे हैं।

गौरतलब है कि किताब ‘भरतपुर राजवंश: अछूती स्मृतियां’ के कुछ तथ्यों पर पूर्व सांसद एवं पूर्व राज परिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह को आपत्ति थी। वह गुरुवार को अपने समर्थकों के साथ किताब के लेखक रघुराज सिंह के होटल पहुंचकर हंगामा करने लगे। रघुराज सिंह विश्वेंद्र के चाचा हैं। विश्वेन्द्र सिंह की मौजूदगी में होटल में जमकर तोड़फोड़ हुई। पथराव हुआ और गोलियां चलीं। गोलीबारी में आठ लोग घायल हुए थे। इसके बाद से जिले में तनाव बढ़ गया। विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर प्रशासन किताब के लेखक और गोली चलाने वालों पर कार्रवाई नहीं करता है तो शीघ्र ही सातों जातियों की पंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। इधर भाजपा नेता पूरी तरह से रघुराज सिंह के पक्ष में आ गए है। प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने रघुराज सिंह के पक्ष में कमान संभाल रखी है।

इस पर है एतराज

रघुराज सिंह की किताब में पूर्व महाराजा सवाई किशन सिंह के समय लाखोंका कर्जा लेकर सेना के लिए विदेश से महंगी वर्दी मंगाने का जिक्र है। विश्वेंद्र ने इस तथ्य को गलत बताते हुए कहा कि 1924 की भयानक बाढ़ में जनता की जरूरतें पूरी करने और सिंचाई व्यवस्था सुधारने के लिए दरभंगा स्टेट से कर्ज लिया गया था। जिसे ब्याज सहित बृजेंद्र सिंह के शासनकाल में चुकाया गया।

(पोस्ट जागरण में प्रकाशित खबर पर आधारित)

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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