‘महारानी’ की सियासत, सादगी और किफ़ायत…

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फैसलों का ‘असर’ दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भले महारानी कहा जाता हो, लेकिन अब उन्होंने सादगी और किफ़ायत की सियासत करने का फ़ैसला किया है. दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा को आधा कर दिया है. वे जब सफ़र पर निकलती हैं या राजधानी जयपुर में कहीं जाती हैं, तो कारों का लंबा-चौड़ा काफ़िला उनके साथ नहीं होता.vasundhara_raje_624x351_bbc

उन्होंने अपने पुराने बंगले में रहने और आठ सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास न जाने का फ़ैसला किया है. उन्होंने मंत्रियों और अफ़सरों को भी सादगी पेश करने को कहा है. हालांकि, राज्य सरकार इन फ़ैसलों के लिए दिल्ली में ‘आप’ सरकार के निर्णयों को ज़िम्मेदार नहीं मानती.

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है, ”ये फ़ैसले ‘आप’ से प्रभावित नहीं हैं बल्कि ‘आप’ हमारी सरकार से प्रभावित है. हम शुरू से ही सादगी का परिचय दे रहे हैं.” राज्य सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री की पहल पर अब सभी मंत्री सादगी का परिचय देते हुए काम करेंगे. मंत्रियों के काफ़िले में पुलिस सुरक्षा वाहन के अलावा दो से अधिक वाहन नहीं होंगे.

सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन पांच सितारा होटलों में नहीं होगा. मंत्री सरकारी कार्यक्रमों में किसी भी सामूहिक भोज का आर्थिक बोझ सरकार पर नहीं डालेंगे. वे अभिनंदन और सामूहिक गोष्ठी जैसे कार्यक्रमों में कम से कम ख़र्च करेंगे. राजधानी जयपुर में बुधवार और गुरुवार को कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दौरान यह फ़ैसला लिया गया, तो मंत्रियों ने ख़ुद एक पत्र पर हस्ताक्षर करके मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे अब सादगी से रहेंगे.

उधर, मुख्यमंत्री के इन फ़ैसलों के बाद जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अमिताभ राय ने सुरक्षा दस्ता हटाने का फ़ैसला किया है.

राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार द्वारा विधायकों को दी गई गनमैन की सुविधा भी ख़त्म करने का फ़ैसला लिया है.

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, ”मुख्यमंत्री आम आदमी के अंदाज़ में सादगी का परिचय दे रही हैं. वे पद संभालने के साथ ही ट्रैफ़िक सिग्नल पर रुकने, अपना काफ़िला कम करने, सरकारी विमान की जगह नियमित उड़ान से यात्रा करने, सुरक्षा दस्ता आधा करने, सरकारी वाहन की जगह निजी वाहन का उपयोग करने और मुख्यमंत्री आवास के स्थान पर छोटे सरकारी आवास में रहने जैसे निर्णय ले चुकी हैं.”  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वसुंधरा के इन फैसलों का स्वागत किया है. उन्होंने आगे बताया, “मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेकर सभी मंत्रियों ने भी अब सरकारी ख़र्च में कटौती करने का महत्वपूर्ण फ़ैसला किया है.”

गहलोत भी कह चुके हैं कि वसुंधरा अपने पुराने अनुभव को देखते हुए सादगी अपनाती हैं, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए. मगर कांग्रेस प्रवक्ता डॉक्टर अर्चना शर्मा ने इस पर सवाल उठाए और कहा कि सादगी का यह प्रपंच लोकसभा चुनाव देखते हुए मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए है. अगर सादगी ही इनका लक्ष्य था, तो वसुंधरा राजे ने विधानसभा परिसर में इतना बड़ा समारोह क्यों किया जबकि आज तक राजभवन में ही मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण करते रहे हैं.

इस पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा कहती हैं कि कांग्रेस को इस समय सही फ़ैसले ग़लत और ग़लत फ़ैसले सही लग रहे हैं. इसलिए वह सादगी की आलोचना करती है. राज्य के मुख्य सचिव राजीव महर्षि ने अधिकारियों से कहा है कि वे दो गाड़ियां न रखें. सरकारी कारों का निजी कामों में इस्तेमाल न करें. अधिकारी अपने सरकारी आवास पर सरकारी चौकीदार नहीं रखें.

मुख्य सचिव ने ज़िला कलेक्टरों से कहा है कि वे बेसहारा बच्चों को चिह्नित कर उनकी शिक्षा और पालन-पोषण की व्यवस्था करें.

(बीबीसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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  1. अब कांग्रेसी बहुत खिसियाए हुए हैं, उन्हें सब चुनाव से जुड़ा ही लग रहा है.महारानी के हर कदम में अब उन्हें शक ही नज़र आएगा.कोई इलाज भी नहीं. अब इसके सिवाय कोई चारा भी नहीं.अभी तो पांच साल में बहुत कुछ होगा.वसुंधरा को भी पांच साल में भौत कुछ करना होगा और इन्हें भी ऐसे ही जलना होगा.

  2. अब कांग्रेसी बहुत खिसियाए हुए हैं, उन्हें सब चुनाव से जुड़ा ही लग रहा है.महारानी के हर कदम में अब उन्हें शक ही नज़र आएगा.कोई इलाज भी नहीं. अब इसके सिवाय कोई चारा भी नहीं.अभी तो पांच साल में बहुत कुछ होगा.वसुंधरा को भी पांच साल में भौत कुछ करना होगा और इन्हें भी ऐसे ही जलना होगा.

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