कोलकाता में दुष्कर्म पीडिता की हत्या के बाद बिहार में उबाल..

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कोलकाता में सामूहिक दुष्कर्म के बाद पीडिता की हत्या से बिहार में बंगाल सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध हो रहा है. पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर के विभिन्न संगठनों ने बंगाल सरकार से इस मामले में त्वरित कार्यवाही करने की मांग की है.

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अक्तूबर में दो बार सामूहिक दुष्कर्म की शिकार पीडिता को मामला वापस लेने की धमकी देने वाले आरोपियों ने ही जला कर मार डाला. अस्पताल में एक हफ्ते तक इलाज के दौरान पीडिता के लिए गए  बयान को पुलिस ने उसकी मौत के बाद जारी किया, मंगलवार को पीडिता की मौत हो गई थी राजनितिक भूचाल के कारण पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. पीडिता का इलाज और शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है की मौत के समय पीडिता गर्भवती थी.

पीडिता बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाली थी. वो कोलकाता में अपने टैक्सी ड्राईवर पिता के साथ रहती थी और पढाई कर अपना भविष्य सवारने की कोशिश कर रही थी. अक्टूबर में कुछ युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पुलिस की तरफ से किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं दी गई. उसी दिन मेडिकल चेकअप होने के बाद घर लौटते समय पीडिता का फिर से आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और मामला वापस लेने की धमकी दी. पुलिस में शिकायत करने के बाद भी पीडिता को कोई सुरक्षा नहीं दी गई. इसी बीच आरोपी मामला वापस लेने के लिए लगातार धमकाते रहे और 23 दिसम्बर को पीडिता को जलाने की कोशिश की. आखिर 31 दिसम्बर को पीडिता ने दम तोड़ दिया.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने दुष्कर्म के बाद जला कर मारने की घटना को संज्ञान में लिया है. आयोग की चेयरपर्सन ममता शर्मा ने पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर क्षोभ व्यक्त किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिख कर सरकार से इस मामले में रिपोर्ट तलब की हैमिथिला सेना

मृत पीडिता के पिता ने राज्यपाल एमके नारायणन से मिल कर न्याय की गुहार लगायी. उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा की मांग की और अपने परिवार के लिए राज्यपाल से सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया. बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है. इसकी जानकारी पीडिता के पिता ने राज्यपाल को दी है. थाना प्रभारी ने उन्हें बिहार भागने और टैक्सी नहीं चलाने देने की जो धमकी दी थी उसकी भी जानकारी उन्होंने राज्यपाल को दी है. राज्यपाल ने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है. मृत पीडिता के पिता ने दोषियों को फांसी की सजा की मांग की है. संभव है दोष प्रमाणित होने के बाद दोषियों को फांसी की सजा मिले लेकिन पाशविक अत्याचार सहन नहीं करने पर किशोरी के मर जाने के बाद भी उसके परिजनों को अपनी सुरक्षा के लिए राज्यपाल की शरण में जाना क्या दर्शाता है? देश के सभी नागरिकों को किसी भी राज्य में रोजी-रोजगार करने और रहने का संवैधानिक अधिकार है. मृत पीडिता के परिजनों के प्रति सहानुभूति नहीं जता कर उन्हें प्रताड़ित करने का औचित्य समझ से परे है. राज्य के मुख्य सचिव संजय मित्रा ने कहा है कि मृत किशोरी की अंत्येष्टि के लिए परिवार के लोगों ने जो सहायता मांगी उसे मुहैया करायी गयी. लेकिन किशोरी के पिता ने राज्यपाल से मिल कर पुलिस पर प्रताड़ित करने का जो आरोप लगाया उसके बारे में मुख्य सचिव ने मुंह नहीं खोला. हालांकि मुख्य सचिव ने शव पर राजनीति करने करने की निंदा की जिससे साबित होता है कि इस मामले में पुलिस व स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है.

फ़ोन पर पीडिता के पिता से बात हुई तो उन्होंने कहा मैं तो घटना के बाद एस पी साहेब के पास गया था लेकिन एस पी ने ऐसे डांट कर बात की और कहा सामान बांधों यहाँ से और बिहार का रास्ता नापो, इतना बोलते ही पीडिता के पिता रोने लगे. उन्होंने कहा मैं तो सुरक्षा की गुहार और मामले में कार्यवाही  की मांग करने गया था. इसी बीच बिहार सरकार ने अपने आई जी जे एस गंगवार को कोलकाता भेजा है. जे एस गंगवार को पुलिस और पीड़ित परिवार से मामले का रिपोर्ट सौपने का निर्देश दिया गया है. साथ ही नितीश कुमार ने 1 लाख रुपए देने की घोषणा की जो आई जी के हाथो परिजनों को सौप दिया है.

इस घटना के विरोध में बिहार से दिल्ली तक जबरदस्त प्रदर्शन हो रहे है, विभिन्न जिलो में ममता बनर्जी का पुतला फूंका जा रहा है, संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर  बंगाल सरकार मामले पर कार्यवाही नहीं करती है तो बिहार से हजारो की संख्या में लोग कोलकाता जा कर भारी प्रदर्शन करेंगे. शुक्रवार को दिल्ली में मिथिला राज्य निर्माण सेना और अन्य मैथिल संगठनो के बंग भवन पर सैकड़ो की संख्या में जबरदस्त प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौपा, मिथिला राज्य निर्माण सेना ने मामले में निष्पक्ष जाँच की मांग की है. मिथिला राज्य निर्माण सेना का कहना है अगर मामले में जल्द से जल्द करवाई नहीं हुई तो बिहार में जबरदस्त प्रदर्शन के साथ बंगाल जाने वाली ट्रेनों को रोका जायेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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