आप के हर कदम पर जनता की नजर है…

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-हरेश कुमार||

हाल ही में दिल्ली की गद्दी पर सत्तासीन हुए अरविंद केजरीवाल ने चुनाव में देश व दिल्ली की जनता के बीच इतनी सारी उम्मीदें जगा दी है कि उन्हें अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा. मीडिया से व्यापक तौर पर मिली कवरेज से आम आदमी पार्टी को चुनावों में काफी लाभ हुआ, जिससे 13 महीने पहले गठित यह पार्टी देखते ही देखते इतनी ताकतवर हो गई कि इसने पहले से स्थापित पार्टियों को नए सिरे से सोचने व सीखने पर मजबूर कर दिया.kejriwal3-jan3

चुनावों में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 15 साल से सत्ता में स्थापित कांग्रेस को ना सिर्फ गद्दी से हटाया बल्कि भाजपा के चुनावी रथ को रोकने में भी कामयाबी पाई. एक तरह से आप कह सकते हैं कि आप ने भाजपा के मुंह से सत्ता का निवाला छिन लिया. भाजपा के नेता इस बात को लेकर आश्वश्त थे कि दिल्ली में इस बार तो उनकी सरकार बनकर ही रहेगी, वे आप को जनता का समर्थन मिलने पर आंख मूंदे थे. इसे आप स्वांत: सुखाय भी कह सकते हैं. इसी कारण से भाजपा के हाथों कांग्रेस ने पहले भी सत्ता छीन ली थी, क्योंकि यहां पार्टी के लोग भले ही सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के गले मिलते रहे हों लेकिन अंदरखाने में हर एक-दूसरे को कमजोर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता था. कांग्रेस में भी यह बात थी लेकिन सोनिया गांधी का एक डर था. जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री, शीला दीक्षित और दिल्ली प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष, जय प्रकाश अग्रवाल एक-दूसरे को फूटी आंखों नहीं देखना चाहते थे. इसका प्रभाव आप जयप्रकाश अग्रवाल के संसदीय सीट के विकास पर भी स्पष्ट तौर पर देख सकते हैं.

खैर, यह सब अब बीती बातें हो गईं, लेकिन केजरीवाल ने जिस तरह से चुनाव पूर्व कांग्रेस के भ्रष्टाचार और कुशासन सहित वीवीआईपी संस्कृति को मिटाने की बात कर रहे थे और चुनावों में जिस तरह से घूम-घूम कर शीला दीक्षित से विरुद्ध में 370 पेज का आरोप लगा रहे थे, वही केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से गद्दी प्राप्त करते ही अब भाजपा के विधानसभा में नेता हर्षवर्धन से इसके सबूत मांग रहे हैं. सत्ता में आप हैं और आपने जनता से वादे किए थे कि सत्ता में आने पर कांग्रेस के 15 सालों के भ्रष्टाचार पर कड़ाई से कदम उठायेंगे और एक-एक भ्रष्टाचारी को जेल भेजेंगे, चाहे कोई भी हो. लेकिन अरे ये क्या. अब तो सत्ता मिलते ही आप पर सत्ता का असर होने लगा. हां, यह सही है कि आपने प्रति परिवार को प्रतिदिन 667 लीटर यानि 20 हजार लीटर पानी और 400 यूनिट तक टैरिफ को आधा कर दिया. लेकिन ये तो आने वाला वक्त बतायेगा कि सच में जनता पर इसका असर कितना होने वाला है.

मीडिया के दबाव से भले ही केजरीवाल ने अपने लिए भगवान दास रोड पर दिल्ली सरकार की तरफ से मिला दस कमरों का फ्लैट छोड़ दिया हो लेकिन इसका गलत संदेश जनता में गया है. फिर उनके मंत्रियों के द्वारा सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल. इन सबको किसी ने मना नहीं किया था, लेकिन ये तो उन्होंने ही जनता से वादा किया था कि हम जनता से किया हर वादा पूरा करेंगे और वीवीआईपी संस्कृति को खत्म करेंगे, लेकिन अभी सत्ता में आये महज जुम्मा चार दिन ही हुए हैं और आप हैं कि अभी से अपने रंगे दिखाने लगे. अरे जनाब देश-दुनिया की नजर आप और आपके कार्यों पर है.फूंक-फूंक कर कदम रखिये. वरना कहीं ऐसा ना हो जाये कि आप की हालत भी असम गण परिषद यानि अगप जैसी हो जाए जिसका गठन उस समय छात्रों ने बड़ी ही ताम-झाम से किया था लेकिन राजनीतिक चरित्र ने उसे भी अपने लपेटे में ले लिया था. यह तो आप पर निर्भर है कि आप इतिहास बनाते हैं या इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं और लगता है कि आप का उदय भले ही धूमकेतु की तरह हुआ हो लेकिन आप जल्द ही सत्ता का हिस्सा बनकर नष्ट ना हो जाये और अन्य दलों व नेताओं से ज्यादा फर्क आप में नहीं. हम सबकी इस पर नजर है. आपका शुभचिंतक.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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One thought on “आप के हर कदम पर जनता की नजर है…

  1. केज़रीवाल
    जिस राजनीति के लेकर चलना च रहे थे वो अब नहीं बची ह वो ख़तम हो गयी कोंग्रेस का समर्थन ले कर कोंग्रेस के बी टीम कही जाने लगी है बच्चिय कि कसम खा कर भी बही किया जो नहीं करना चाहिए था यदि एसा नहीं करते तो निश्चित साड़ी राष्ट्रिय पार्टिया के साथ साड़ी प्रान्त कि सरकारो को बही करना पड़ता जो केजाेरी वाल कहते पूरे देश का चारित्तीय बदल जात ये सब से बड़ी उपलब्ब्धि देश को होती मगर आधार भूत अज्ञानता के कारन सत्ता कि ला लाच में बहुत बड़ी शाखीय को खो दिया है अब कोई बैसि इस्थिति बना ही नहीं सकता अभी तुरंन्त केज़रीवाल भरय मुद्रा कि टकसाल बन सक्ते थे देश आज भी ईमानदारी कि बहुत कीमत करता है जिस का मूलीय है वो केज़रीवाल ने अनजाने में खो दीया ये साधारण बात नहीं होती इस कि समझा भी होनी चाहिए थी वो वह सम्झा नहीं पाये शत्ता कि ला लाच में भटका गएहर आम नागरिक को अपने चारित्तीय पर भी थोडा रुक के सोचने कि इस्थित बन गयी थी जो समाज केलिए बडाभरी परिवर्तन होने कि सुरुआत हो सकती थी पूरी दुनिया को भी प्रेरणां मिल सकती थी वो केज़रीवाल न ने खोदिया है वो इस देश कि टकसाल बन सकते थे जो आज खुदी इक नोट [रुपिया] बन कर सड़क पर बाज़ार के बस्तु बनकर रह गए है

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