सरकार रिलायंस की जेब में : देश गया तेल लेने..

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मुकेश अम्बानी ने अपने पिता धीरूभाई से रिलायंस समूह के साथ साथ भारत सरकार को भी विरासत में पा लिया है. अम्बानी परिवार देश का सबसे धनवान परिवार केवल इस लिए बन पाया क्यों कि उसकी जेब में टेक्सटाइल्स, वाणिज्य, उद्योग तथा पेट्रोलियम मंत्रालयों के अलावा सीधे प्रधान मंत्री के आदेश पर काम करनेवाले सीबीआई के उच्च अधिकारी आ गए.

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इन मंत्रियों और उनके मातहत काम करनेवाले अधिकारिओं के जरिये अम्बानी परिवार ने समय समय पर अपने समूह को आर्थिक लाभ पहुँचाने वाली नीतियां बनवायीं और जब कभी उसने क़ानून तोडा तो जेल जाने से बचते भी रहे. अभी हाल में मुकेश अम्बानी के पुत्र ने शराब के नशे में दो व्यक्तियों को अपनी कार से कुचल कर मार दिया फिर भी न तो उसे गिरफ्तार किया गया और न ही इस बारे में किसी अखबार या टेलीविज़न चैनल्स में इसका जिक्र आया.

देश को अरबों रुपये का घाटा पेट्रोल और डीजल के आयात के कारण सहना पड़ता है उसके पीछे भी अम्बानी परिवार का हाथ है. अम्बानी समूह ने पहले तो भारत सरकार के पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन के निजीकरण के फैसले के बाद कृष्णा-गोदावरी बेसिन का ठेका बड़े ही सस्ते दर से ले लिया और फिर के जी बेसिन से तेल और गैस निकालने पर लगने वाले खर्च को ज्यादा दिखा कर सरकार को चूना लगाया. यह मामला एक जन हितकारी याचिका द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के सामने लाया गया तब न्यायालय ने सीबीआई, पेट्रोलियम मंत्रालय और रिलायंस को कारण बताओ नोटिस दिया. अब चूंकि लोक सभा चुनाव सर पर आ गए हैं, यह मामला भी अगली सरकार बनने तक टल गया है.
उल्लेखनीय है कि कृष्णा-गोदावरी गैस के एक्सप्लोरेशन का ठेका सस्ते दर में दिलाने के बदले रिलायंस ने ओ एन जी सी के तत्कालीन डायरेक्टर को सेवा निवृत्त होने के बाद अपने समूह में डायरेक्टर के पद पर नियुक्त कर लिया. इसी प्रकार उसने आयकर विभाग के एक उच्च अधिकारी और सीबीआई के एक निदेशक को भी अपने समूह में रख लिया.mukesh-ambani-645x446

धीरुभाई की उच्च सरकारी अधिकारियों को अपने समूह में नौकरी देने के तरीके का अनुकरण गुजरात का अदानी ग्रुप भी कर रहा है. उसने भी मोदी सरकार से कई उच्च अधिकारिओं को अपने समूह में निवृत्त होने के बाद उनकी सेवाओं के पुरस्कार स्वरूप बड़ी तनख्वाह पर नौकरी पर रख लिया है.

अब आने वाले लोक सभा चुनाव में अम्बानी तथा अदानी के अलावा टाटा, कि जिसके नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात में सस्ती जमीन और लगभग शून्य ब्याज दर पर 30,000 करोड़ रुपये का लोन दिया गया, नरेन्द्र मोदी को प्रधान मंत्री बनाने की कोशिश में तन मन धन से लग गए हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “सरकार रिलायंस की जेब में : देश गया तेल लेने..

  1. देश में भले ही लड़कियों और महिलाओं के लिए कानून हों पर रिलायंस स्कूल जामनगर ( गुजरात ) में हिंदी शिक्षक की बेटी को बोर्ड परीक्षा नहीं देने दिया जाता है और उसी स्कूल में कार्यरत निर्दोष हिंदी शिक्षिका को अमानवीय प्रताड़नाएँ झेलनी पड़ती हैं क्योंकि [ उन्होंने रिलायंस स्कूल के प्रिंसिपल मिस्टर एस.सुंदरम के हिंदी दिवस (14-9-10) के दिन के इस कथन :- “बच्चों हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, हिंदी टीचर आपको गलत पढ़ाते हैं।” तथा उसी विद्यालय के प्रतिदिन के प्रात: कालीन सभा में प्रिंसिपल सुंदरम बार-बार यह कहते हैं “बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है, सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ अपनी बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ खरीद कर लाते हैं, गाँधीजी पुराने हो गए, उन्हें भूल जाओ, फेसबुक को अपनाओ तथा बच्चों अगर आपके मम्मी-पापा भी आप पर सख्ती करते हैं तो आप पुलिस में केस कर सकते हो”] जैसी बातों से असहमति जताई थी। राज्य के शिक्षामंत्री तथा मुख्यमंत्री महोदय से बार-बार निवेदन करने, महामहिम राष्ट्रपति-राज्यपाल, सी.बी.एस.ई. प्रधानमंत्री आदि के इंक्वायरी आदेश आने. के बावजूद कोई निदान नहीं मिला है ! सब कुछ दबाकर चीफ सेक्रेटरी गुजरात 2011 से ही बैठे हुए हैं अर्थात राष्ट्रभाषा हिंदी का सवाल एक बहुत बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। देश की प्रमुख पार्टियाँ रिलायंस की मुट्ठी में हैं ये बातें रिलायंस के अधिकारी खुले आम करते हैं। उक्त स्कूल की घटना तथा पेट्रोलियम मंत्री रेड्डी साहब का हटाया जाना इस बात को प्रमाणित करता है, —

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