नीतीश संकल्प और जनता विकल्प में व्यस्त…

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शनिवार को दरभंगा में आयोजित मिथलांचल संकल्प रैली के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पुराने सहयोगियों से लेकर विरोधियो तक सबको कटघरे में खड़ा कर दिया. मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर प्रहार करते हुए कहा बीजेपी के कुछ अपराधिक छवि के नेता बिहार में कानून व्यवस्था बनाये रखने में अड़चन डाल रहे है इसके साथ ही विकास में रूकावट के लिए भी मुख्यमंत्री ने दोष बीजेपी के उपर मढ दिया.

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हाल के दिनों में कांग्रेस के साथ नरमी दिखाने वाले नीतीश कुमार ने मिथलांचल संकल्प रैली में कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी राजद और लोजपा के प्रभाव में आ कर बिहार को विशेष राज्य दर्जा दिए जाने पर अचानक ब्रेक लगा दिया. विशेष राज्य के दर्जे के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील की वो अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, राजद और लोजपा को इसका करारा जवाब देंगे.

विशेष राज्य के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर चुटकी लेते हुए कहा अभी अभी भगवान कृष्ण की घर से निकले विशेष राज्य की मांग में टांग अड़ा दिए. मुख्यमंत्री ने कहा राजद और लालू प्रसाद की सोच विशेष राज्य के मुद्दे पर हमेशा नकारात्मक रही है. विशेष राज्य का दर्जा आर्थिक जरुरतों पर आधारित था ना कि राजनीतिक, ऐसे में कांग्रेस इस पर राजनीतिक कारणों से क्यों रोक लगाएगी. अभी तक केंद्र सरकार और कांग्रेस से विशेष राज्य की बातें सही दिशा में चल रही थी, लेकिन जब से कांग्रेस और राजद गठबंधन की सुगबुगाहट हुई है उसी समय से ये मुद्दा भटकने लगा.sanklp1

sanklpसंकल्प रैली के लिए बहादुरपुर विधानसभा क्षेत्र से आये विभूति साहनी ने बताया कि लगता है मुख्यमंत्री के पास अब कोई एजेंडा नहीं है विशेष राज्य के अलावा, सालों से एक ही रट लगाये जा रहे है विभूति ने कहा जैसे भारत वर्षो से संयुक्त राष्ट्र के स्थाई सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए गुहार लगाता रहा है, ठीक उसी तरह बिहार के मुख्यमंत्री भी केंद्र से यही गुहार लगा रहे हैं. मुख्यमंत्री को बिहार के विकास से लिए सोचना चाहिए. जब 2005 में नीतीश मुख्यमंत्री बने थे तब बिहार की जनता विकास से रूबरू होने लगी थी लेकिन धीरे धीरे सब खत्म होता जा रहा है. कानून व्यवस्था की स्थिति चरमराते जा रही है. आये दिन अपहरण, बलात्कार हत्या जैसी घटनाये सुनने को मिल रही है. उनका कहना था की बिहार की जनता का मोह अब धीरे धीरे नीतीश से भंग होने लगा है और लोग बेहतर विकल्प तलाश रहे है.

इसी बीच रैली में मिथिला राज्य की मांग कर रहे मिथिला राज्य निर्माण सेना और जदयू कार्यकर्ता के बीच झड़प हो गई जिससे अफरातफरी मच गई. अलग मिथिला राज्य के गठन के लिए मिथिला राज्य निर्माण सेना मुख्यमंत्री का शांतिपूर्वक घेराव करके ज्ञापन सौपने का कार्यक्रम था, लेकिन जब मिरानिसे के प्रवक्ता अनूप कुमार मैथिल अपनई विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपने जा रहे थे उसी बीच कुछ जदयू कार्यकर्ता ने उन पर वहां रखी कुर्सियां फेकने लगे कुर्सीयां फेकने के कारण मिरानिसे के दो वरिष्ट नेता को चोट लगी.

महीनों से जिस संकल्प रैली की तैयारी चल रही थी उसमे एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप के अलावा बिहार की जनता के लिए कुछ नहीं था, जदयू के अन्य नेताओ से ले कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक 2014 के लोकसभा चुनाव को टारगेट करते दिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “नीतीश संकल्प और जनता विकल्प में व्यस्त…

  1. सुशासन बाबू के गले में फांस फँस गयी लगती है. लालू को अंदर देख व कोई ज्यादा उम्मीद न दिखने पर उन्होंने बाबू के गले में हाथ डाल भा ज पा से गठबंधन तुड़वा दिया था, पर जैसे ही लालू बाहर आये कांग्रेस वापस उनके गले लग गयी.बिहार को विशेष राज्य का दर्ज देने का आशश्वसन देने वाले मन मोहनसिंह व चिदंबरम मौन हो गए. अब बाबू को नए दोस्त ढूंढने पद रहे हैं.जमीं पर पड़ी लो ज पा में उन्हें कुछ उम्मीद दिख रही है जिसकी वास्तविक हालत कौन नहीं जनता? पर इलाज भी क्या?मोदी के रहते भा ज पा के पास आ नहीं सकते और कोई नजदीक आता नहीं. तीसरे मोर्चे के माध्यम से पी ऍम का सपना देख भले ही लें , पर वहाँ तो पहले ही से पी ऍम के कई उम्मीदवार सपने देख रहें है. लगता है सुशासन बाबू का पासा उल्टा पड़ गया है.

  2. सुशासन बाबू के गले में फांस फँस गयी लगती है. लालू को अंदर देख व कोई ज्यादा उम्मीद न दिखने पर उन्होंने बाबू के गले में हाथ डाल भा ज पा से गठबंधन तुड़वा दिया था, पर जैसे ही लालू बाहर आये कांग्रेस वापस उनके गले लग गयी.बिहार को विशेष राज्य का दर्ज देने का आशश्वसन देने वाले मन मोहनसिंह व चिदंबरम मौन हो गए. अब बाबू को नए दोस्त ढूंढने पद रहे हैं.जमीं पर पड़ी लो ज पा में उन्हें कुछ उम्मीद दिख रही है जिसकी वास्तविक हालत कौन नहीं जनता? पर इलाज भी क्या?मोदी के रहते भा ज पा के पास आ नहीं सकते और कोई नजदीक आता नहीं. तीसरे मोर्चे के माध्यम से पी ऍम का सपना देख भले ही लें , पर वहाँ तो पहले ही से पी ऍम के कई उम्मीदवार सपने देख रहें है. लगता है सुशासन बाबू का पासा उल्टा पड़ गया है.

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