राखी बिरला के बहाने आम आदमी सत्ता तक पहुंचा…

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दिल्ली के मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं आम आदमी पार्टी की विधायक राखी बिरला की मां शीला राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय में बतौर सफाईकर्मी कार्यरत हैं. राखी अब दिल्ली सरकार में मंत्री बनने जा रही हैं, तो लोगों की नजरों में वे आम से खास हो गई हैं. उन्हें मंत्री बनाए जाने से उनकी मां को बेहद खुशी है. उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटी मंत्री बनेगी.RAKHI-BIRLA.

वे कहती है कि वह अच्छा काम करेगी. उसकी सोच अच्छी है और उसके अंदर अपने पिता की तरह ही लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करने की भावना है. मंगोलपुरी के लोगों को उससे बड़ी उम्मीदें हैं और हमेशा लोगों के सुख-दुख में शामिल रहेंगी. वे चाहती है कि मंत्री बनने के बाद बेटी क्षेत्र में नशाखोरी पर रोक लगाने के लिए काम करे. छोटे बच्चे को जब नशा करते हुए देखती हैं तो बड़ा दुख होता है. वे कहती हैं कि क्षेत्र में महिलाओं के साथ आये दिन वारदात होती रहती हैं, जिससे महिलाएं घरों से निकलने में कतराती हैं. राखी इस समस्या के समाधान के लिए काम करेगी.

rakhiबेटी भले ही मंत्री बन गई हो, लेकिन वे सफाईकर्मी की अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगी. राखी कहेगी तब भी नहीं, क्योंकि यही नौकरी उनके पूरे परिवार की जीविका का आधार रही है. केजरीवाल के मंत्रिमंडल में शामिल होने जा रही सबसे कम उम्र की 26 वर्षीय राखी का इस ओहदे तक पहुंचना वास्तव में आम आदमी का सत्ता का पहुंचने जैसा है. वजह साफ है कि मंगोलपुरी के टी ब्लॉक की एक सकरी गली स्थित 25 गज के मकान की ऊपरी मंजिल पर बने जिस कमरे में उसका परिवार रहता है, वहां मंगलवार को भी जमीन पर गद्दा बिछा दिखा.

राखी का परिवार खुले किचन में खाना पकाता है. परिवार में पिता भूपेंद्र सिंह बिरला, दो भाई वीरेंद्र व विक्रम व भाभी श्यालू व प्रियंका हैं. भाभी प्रियंका कहती हैं कि पहली बार विधायक बनी ननद अब मंत्री बनने जा रही हैं तो यह गर्व की बात है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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