अखिलेश यादव की लैपटॉप योजना के खेल भी निराले हैं..

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-आशीष सागर दीक्षित||

बाँदा – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की वोटो को लुभाने वाली लैपटॉप योजना के हाल भी निराले है ! प्रदेश के युवा बेरोजगारों के लिए भत्ते की तर्ज पर इंटर पास छात्र – छात्रा को लैपटॉप वितरण में भी जमकर कमाई के उपाय तलाश किये गए है. यह जानकारी सूचना अधिकार में हस्तम ग्राम्य के भूपेंद्र सिंह ने हासिल की है. भूपेंद्र ने 5 बिन्दुओ पर मुख्य सचिव से इस समब्ध में जानकारी मांगी थी.cm ke laiptop

लिमिटेड लैपटॉप बनाने का ठेका देश के बड़े समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशन के बाद मैसर्स एच.पी.इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स एसर, मैसर्स एच.सी.एल. एवं मैसर्स लेनोवो के माध्यम से लिया गया है. साथ ही इसके आपूर्ति का ठेका मैसर्स एच.पी. इंडिया सेल्स को दिया गया है.

शेष अन्य तीन प्रमुख बिंदु जिनमे प्रदेश के 72 जिलो में लैपटॉप वितरण के समय खर्च किये गए धनराशी, समारोह पंडाल का ठेका / टेंट व्यवस्था की जानकारी गोल – मोल कर दी गई है. 6 माह बाद अधूरी सूचना प्रदान कर प्रदेश में इस योजना में किये गए बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार को छुपाया गया है, मुख्यमंत्री के जिले में समारोह का ठेका इटावा के एक ठेकेदार को ही दिया गया है. उल्लेखनीय है कि बमुश्किल 15 हजार के एक लैपटॉप को 19058 रूपये में प्रति यूनिट क्रय किया गया है. उधर युवा बेरोजगारी से जूझ रहे राजाबाबू ने कहा कि कहा कि प्रदेश की दो योजना एक बेरोजगारी भत्ता और लैपटॉप योजना केवल वोट बैंक के लिए शुरू की गई है. लाखो टन ई कचरा तैयार कर घटिया किस्म के लैपटॉप वितरित किये गए है जिनमे समाजवादी पार्टी का प्रचार अधिक है सूचना तंत्र का ज्ञान नही. ग्राम के छात्र – छात्रा बिना इंटरनेट लैपटॉप को कम दामो में बेच रहे है या फिर वे कबाड़ के मोल पड़े है. कुछ ने उनको अपने गाने / फिल्म देखने का माध्यम बना रखा है.

प्रदेश के सतही विकास , युवा उन्मुखी करण के लिए आवश्यक है कि रोजगारपरक शिक्षा नीतिया बनाकर उन्हें मुकम्मल तरीको से ज़मीन पर चलाया जाये. इस लैपटॉप की जगह आप युवा लोगो को शिक्षा के लिए स्कालरशिप भी 20 हजार रुपयों की दे सकते थे सीधे उनके खातो में डालकर. और जहाँ ये लैपटॉप दिए भी जा रहे है उनमे भी छल किया गया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “अखिलेश यादव की लैपटॉप योजना के खेल भी निराले हैं..

  1. gaavon main bijili nahee hai… kuchh shaharo ko chhod diya jaye to poore pradesh main bijli khastaa haal hai… bachche LEPTOP kya hawa or paani se chalayenge….. logo ko bhikh-manga banaya ja rahaa hai… kabiliyat hote huye bhee aaj ka yuva sarkaree bheekh ka intjaar kartaa hai…. chunav aayen or kuchh bheekh mil jaye….. sarkaar ko yadi kuchh karnaa hai to sarkaree or privet sector main jyada se jyada rojgaar uplabdh karaye…… apnee mehanat ka paisaa hoga to LEPTOP to apne aap aa jayegaa…..

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