दंगे आखिर कब तक…

admin 8

साम्प्रदायिक दंगो का विस्तृत अध्ययन करने पर पता चलता है कि वहां साम्प्रदायिक दंगे भड़कने की आशंका नहीं रहती है, जहाँ की सरकार अल्पसंख्यक वोटरों पर अत्यधिक निर्भर रहती है. ऐसी सरकार दंगो को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देती है क्योंकि दंगे की मार तो सबसे ज्यादा अल्पसंख्यको ही उठानी पड़ती है.

1 (13)
भारतीय इतिहास में ऐसे अनेको उदारहण मिलेंगे जैसे बिहार में राजद के १५ वर्ष के अत्यधिक ख़राब कानून व्यवस्था की दौर में भी हिन्दू मुस्लिम के बीच कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ छोटी मोटी कई घटनाये हुई, लेकिन उसे फ़ौरन दबा दिया गया. जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तब पूरा भारत राम मंदिर के मुद्दे पर आग में जल रहा था आये दिन दंगे भड़क जाते थे लेकिन बिहार में स्थिति बाकि राज्यों के मुकाबले सामान्य थी. बिहार में लालू की सियासत मुस्लिम वोटरों पर निर्भर थी इसलिए प्रशासनिक अधिकारियो को सख्त आदेश था की दंगा किसी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जोनल ऑफिसरो को इसके लिए खास तौर पर जवाबदेह बनाया गया था.
दिल्ली में १९८४ में सिख विरोधी दंगे कांग्रेस शासन के दौर में हुआ. कांग्रेस पार्टी तब हिन्दुओ की भावना के साथ खेल कर उसका राजनीतिक लाभ उठाने का कोशिश कर रही थी. बाबरी विध्वंस और २००२ के गुजरात दंगे जो बीजेपी के शासन के समय हुए, बहुत ही खौफनाक थे तथा वहां भी बहुसंख्यको की भावना के साथ खेल कर सियासी रोटी सेकी गई.1 (5)
हाल ही में मुज़फ्फरनगर दंगे हुए जिसपे नज़र डाला जाये तो बड़ा अचरज होता है. वहां ऐसी पार्टी की सरकार है जिनकी बुनियाद ही मुस्लिम वोटरों पर टिकी हुई है. मायावती के राज में साम्प्रदायिक रूप से लगभग शांत रहने वाले राज्य में नई सरकार आते ही क्या हो गया कि अब तक विभिन्न क्षेत्र में दंगे की लगभग ७० से ज्यादा घटनाये हो चुकी हैं. मुज़फ्फरनगर दंगे शुरुआत होने के बाद ३ सप्ताह तक अनवरत जारी रहा. समाजवादी पार्टी जो की कभी यह कहने से नहीं चूकती है कि वो मुसलमानों की संरक्षक है फिर भी मुज़फ्फरनगर में प्रशासन की इतनी ढीली रफ़्तार समझ में नहीं आई. सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुज़फ्फरनगर दंगे में मात्र १०७ लोग मारे गए जिनमे ६६ मुस्लिम और ४१ हिन्दू है. सरकार की नफरत की सियासत तो देखिये दंगो के इतिहास में पहली बार धर्म के आधार में मृतकों की संख्या बताई गई है.
मुज़फ्फरनगर दंगो की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टीगेशन सेल बनाया है उत्तर प्रदेश सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम आर एम श्रीवास्तव के अनुसार  इसमें एस पी रैंक के दो ऑफिसर डी एस पी रैंक के तीन इंस्पेक्टर रैंक के २० ऑफिसर होंगे और मेरठ के आई जी इसकी निगरानी करेंगे.1 (8)
मुज़फ्फरनगर दंगे में हजारो लोग बेघर हो गए कुछ को अपना घर बार छोड़ के भागना पड़ा. लोग अपने घर को छोड़ कर राहत शिविर में रहने के लिए विवश है.
शरणार्थी राहत शिविर में कैसे रहते हैं, पल पल अपने जीवन के लिए कैसे लड़ते है हैं, रोटी के टुकडो के लिए कैसे लड़ते है? ये वही लोग है जो कल तक सुख चैन की जिन्दगी जी रहे थे आखिर इन्होने कौन सा गुनाह कर दिया जो ऐसे जीने के लिए विवश है. दंगे करता कोई है, करवाते कोई है और सज़ा हमेशा की तरह गरीब और बेगुनाह ही काटते है.
हाल ही में मुज़फ्फरनगर दंगे के राहत शिविर गए हमारे मित्र जावेद मंजूर का कहना है कि राहत शिविर जो कि वन विभाग के जमीन पर बना हुआ है चारो तरफ कटा के घिरा हुआ है उनका कहना है की हालात दर्दनाक और दयनीय है पीड़ित लोग अभी भी डरे हुए है. १५ किलोमीटर की परिधि में १० राहत शिविर चल रहे हैं. शामली जिला में इन शिविरों में १३३० परिवार के ७३७६ लोग रह रहे है इनके पास मूलभूत संसाधन भी नहीं है. जीने के लिए इन शिविरों में सबसे ज्यादा समस्या छोटे और नवजात बच्चो के लिए है जो कि ठण्ड की मार नहीं सह पा रहे. इनके पास खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है. पहनने को गर्म कपडे नहीं है.
साधारण चिकित्सा का भी अभाव है अब तक ४० बच्चे मारे जा चुके है ठण्ड से पूरे मुज़फ्फरनगर के राहत शिविर में.
मुद्दा ये है की अगर कोई राजनितिक पार्टी सांप्रदायिक तनाव या दंगे भड़काने में अपना राजनैतिक स्वार्थ देखती है तो इनसे कैसे निबटा जाये ?1 (6)
क्या प्रस्तावित सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केंद्रित हिंसा निवारण (न्याय प्राप्ति एवं क्षतिपूर्ति) कानून से इस दिशा में कोई मदद मिलेगी ? इसके लिए प्रशासन में व्यापक सुधार की जरुरत है.
मुज़फ्फरनगर दंगे के बाद ये प्रश्न अत्यंत प्रसगिक हो गए है काश हाल ही में राष्टीय एकता परिसद की बैठक में अगर दंगे जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा हुई होती तो ये पता चल जाता की कौन सा राजनितिक पार्टी कहाँ खड़ी है ऐसे मुद्दे पर किनकी क्या सोच है सांप्रदायिक दंगे बेसक राजनितिक मुद्दा है. इन्हें रोकने के लिए सिर्फ प्रशानिक ढांचे में परिवर्तन करने से काम नहीं चलेगा. लेकिन कोई भी राजनितिक दल इस मुद्दे पर सोचने के लिए तैयार नहीं है.
आखिर कब तक एक धर्म के लोग दुसरे धर्म के लोगो को मार कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते रहेंगे.

Facebook Comments

8 thoughts on “दंगे आखिर कब तक…

  1. भाई सा. मुसलमान कभी दंगे नहीं कराता है वक़्त और हालात करवाते है ये सब दंगे और जो लोग दंगे करते है वो मुसलमान ही नहीं क्यूंकि ईस्लाम कभी भी लड़ना नहीं सिखाता है वोह तो सिर्फ मौहब्बत से रहना सिखाता है जो लोग नाम से मुसलमान है वो ही ऐसे काम करते है

  2. दंगे करता कोई है, करवाते कोई है और सज़ा हमेशा की तरह गरीब और बेगुनाह ही काटते है.

  3. तिवारिवल जी ये आपकी सोच है मैं इससे इत्तफाक नहीं रखता हूँ

  4. जब तक राजनितिक दल धर्म आधारित राजनीती करना नहीं छोड़ेंगे,जब तक नेता व धर्म के ठेकेदार अपने सवरथ नहीं छोड़ेंगे यह सिलसिला ऐसे ही चलेगा.

  5. जब तक राजनितिक दल धर्म आधारित राजनीती करना नहीं छोड़ेंगे,जब तक नेता व धर्म के ठेकेदार अपने सवरथ नहीं छोड़ेंगे यह सिलसिला ऐसे ही चलेगा.

  6. १९४७ के दन्गे बटवारे के समय केदङ्गो कि सुरु आत भी मुसलमानो ने कि थी आज तक जिनते भी दन्गे हुए उन सब कि आकर्िमकता मुसलमानो ने ही कीथी मज़ज़फरपुर मेभी मुसलमानो ने ही आक्रामक थे गुजरात गोधरा कि पहल भी मुसलमानो ने ही कि थी जितने भी जांच आयोग बने उनकी जांच रिपर्ट पड़िये सब का िेक ही निस्कर्ष सामने आया है पहल हमेशा मुस्लमान ने ही कि है ये बात आप को आशानी से हजम भले ही न हो मगर येहै सच सातत्य भी यही है हिन्दू तो खाई घर निकलता ही नहीं है वह केवल बचायो ही करता है दुनिया के १४ देश आज भी जल रहे है मुस्लमान मसलमना को ही मार रहा है ये कॉम है ही एसी ये केवल हटिया में ही विश्वास करते है क्रूरु लोग है अपराधी वृत्ति के है ये विडार इएन को कारन चैहिये

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

अखिलेश यादव की लैपटॉप योजना के खेल भी निराले हैं..

-आशीष सागर दीक्षित|| बाँदा – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की वोटो को लुभाने वाली लैपटॉप योजना के हाल भी निराले है ! प्रदेश के युवा बेरोजगारों के लिए भत्ते की तर्ज पर इंटर पास छात्र – छात्रा को लैपटॉप वितरण में भी जमकर कमाई के उपाय तलाश किये गए है. […]
Facebook
escort eskişehir - lidyabet - macbook servis - kabak koyu
%d bloggers like this: